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Wednesday, August 4th, 2021

देश की उन्नति में सहयोग करना ही राष्ट्रधर्म

Arjun-Ram-Meghwalअजमेर जयपुर,

 केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि देश के हित और उन्नति में सहयोग करना ही राष्ट्रधर्म है। हम स्वच्छता, समय पर कर अदायगी, नियमों का पालन और अपने राष्ट्र के प्रति अटूट श्रृद्धा का प्रदर्शन कर भी राष्ट्रधर्म का पालन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनियां की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की और अग्रसर है। अजमेर के जवाहर रंगमंच पर शुक्रवार को श्री सुन्दरसिंह भण्डारी चेरिटेबल ट्रस्ट उदयपुर द्वारा स्व. सुन्दरसिंह भण्डारी की 12वीं पुण्य तिथि के अवसर पर व्याख्यान माला एवं विशिष्टजन सम्मान समारोह में बोलते हुए केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने विविध उदाहरणों से राष्ट्रवाद और नागरिकों के कर्तव्य विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में कपड़ों के आधार पर व्यक्ति को जेंटलमैन या सुसभ्य माना जाता है। हमारे यहां संस्कार और चरित्र व्यक्ति को जेंटलमैन बनाते हैं। श्री मेघवाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 19 वीं शताब्दी में यह आभास कर लिया था कि आने वाले समय में भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा। उस समय ब्रिटिश पत्रकारों ने उनकी सोच का उपहास किया हो लेकिन आज देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। शीघ्र ही हम विश्व की आर्थिक महाशक्ति होंगे। आज पूरा विश्व  योग का लोहा मान रहा है और भारतीय योग का सम्मान कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करें, स्वच्छता में सहयोग करें और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करें। यही राष्ट्रधर्म का पालन है। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर देते हुए कहा कि हम अपनी संस्कृति पर गर्व करना सीखें। कार्यक्रम में गृह मंत्री श्री गुलाब चन्द कटारिया ने कहा कि त्याग और समर्पण से ही देश मजबूत होगा। राष्ट्रधर्म और कर्तव्यों का पालन करने के लिए हमें  महान विचारकों के जीवन से पे्ररणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में शिक्षा एवं पंचायतीराज राज्यमंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि देश को आगे बढ़ाना और मजबूत करने के लिए हमें राष्ट्रधर्म का पालन करना होगा। वर्तमान पीढ़ी भोग और भौतिकता की ओर आकर्षित है, हमें युवाओं को अपनी संस्कृति से रूबरू कराना होगा। उन्होंने कहा कि संस्कृति की ओर युवाओं का रूख मोड़ने के लिए शिक्षा सर्वाधिक उपयुक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में बदलाव कर युवाओं को संस्कृति और राष्ट्र नायकों से परिचित करवाया है। श्री देवनानी ने कहा कि राज्य के पाठ्यक्रम में 200 से अधिक वीर वीरांगनाओं, संतों, लोक नायकों, देश के अमर शहीदों और विचारकों का पाठ जोड़े गए हैं। यह सभी महान व्यक्तित्व युवाओं को भौतिकतावादी सोच से परे राष्ट्रधर्म से जोड़ने में सहायक सिद्ध होंगे। समाज में आयी विकृतियों को दूर करने में भी यह बदलाव सकारात्मक नतीजे दिखा रहा है। कार्यक्रम में श्री धनप्रकाश त्यागी, डॉ धर्मचन्द, श्री जगदीश जोशी, श्री किरणमल सावनसुखा, श्री पे्रमचन्द गुप्ता, श्री कुंजबिहारी शर्मा, श्री राधाकृष्ण मलिक, श्री कैलाश भंसाली, श्री पद्माकर श्रीरामजी तारे, श्री चौथमलजी सनाढ्य, श्री लेखराज माधु, वैद्य केदार शर्मा, श्री सुरेश कटारिया, श्री मदन मूंदड़ा, श्री रामेश्वर भारद्धाज, श्री केसर सिंह नाहर, श्री नारायण पण्ड्या, श्री मधुरेश नन्दन कुलश्रेष्ठ, श्री दामोदर शांडिल्य तथा श्री हरिकृष्ण जोशी को ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री औंकार सिंह लखावत, महापौर श्री धर्मेन्द्र गहलोत, अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शिवशंकर हेड़ा, श्री रासासिंह रावत, श्री श्रीकिशन सोनगरा, उप महापौर श्री सम्पत सांखला सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। ---

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