दांतों की समस्या का संबंध बैड हार्ट आर्टरीज से

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आईएनवीसी ब्यूरो   
नई दिल्ली. सर्दी के दिनों में हृदय की बीमारियां अधिक होने के साथ ही ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, लकवे जैसी समस्याएं भी अधिक होती हैं। यह वह समय है जब आपको अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से न सिर्फ संपर्क करना चाहिए बल्कि अपने दांत के डॉक्टर से भी मिलना चाहिए जिससे गम डिसीज के जरिए मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हृदय बीमारी का पता लगाया जा सके।
यह जानकारी देते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम हृदय बीमारी, लकवे और मधुमेह का प्रमुख आषंकित तथ्य है जिसमें उच्च रक्तचाप, तोंद का मोटापा, ,उच्च ब्लड षुगर, ”गुड” एचडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी और उच्च ट्राइग्लाइसराइड् (एक अन्य तरह का ब्लड फैट) षामिल हैं। इस सिंड्रोम का आमतौर पर तब पता लगता है जब व्यकित इसके तीन या इससे अधिक लक्ष्ण नज़र आते हैं।
इसका संबंध पीरियोडॉन्टाइटिस से है जो कि एक दांतों का संक्रमण होता है और यह 40 फीसदी वयस्कों में संभव है। यह समस्या इन्फ्लेमेशन में कमी और मेटाबोलाइज ग्लूकोज की क्षमता में कमी की वजह से होती है।
जर्नल ऑफ क्लीनिकल इन्डोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए डॉ. अग्रवाल ने बताया कि जो लोग पीरियोडोन्टाइटिस के शिकार होते हैं, उनमें हृदय बीमारी का खतरा 20 फीसदी अधिक होता है। पीरियोडोन्टाइटिस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम दोनों का ही संबंध इन्फ्लेमेशन और इन्सुलिन रुकावट से है।
अध्ययन में 34 फीसदी लोग मध्यम किस्म के पीरियोडोंटाइटसि के और 37 फीसदी गंभीर किस्म के पीरियोडोंटाइटिस के मेटाबॉलिक सिंड्रोम के षिकार या फिर सिर्फ हल्के पीरियोडोंटाइटिस के। मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बढ़ने का पता लगने के साथ ही मसूढ़ों में गंभीर किस्म का रक्तस्राव होने लगता है और पीरियोडोंटल या दांत और मसूढ़ों के बीच में घाव हो जाता है। यह समस्या 40 या इससे अधिक उम्र के लोगों में अधिक पायी गई ।
45 से अधिक उम्र वाले गंभीर पीरियोडोंटाइटिस के शिकार लोगों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम की संभावना 2.3 गुना अधिक होता हे बनिस्बत जो इससे प्रभावित नहीं होते हैं। अध्ययन में पाया गया कि गंभीर पीरियोडोंटाइटिस का उपचार कराये जाने के बाद ब्लड वेसल फंक्शन छह महीनों के बाद बेहतर हुआ।

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