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Tuesday, April 20th, 2021

तो ग्रेच्युटी देनी होगी

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पांच साल लगातार सेवा करने बाद सेवा से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को पेमेंट ऑफ ग्रेट्यूटी एक्ट, 1972 के तहत  पूरी ग्रेच्युटी मिलेगी। इसमें नियोक्ता कटौती नहीं कर सकता।

जस्टिस आर भानुमती की पीठ ने कहा कि धारा 4 के अनुसार ‘सेवा समाप्ति’ यानी टर्मीनेशन में सेवा से इस्तीफा देना भी शामिल है। पीठ ने यह फैसला राजस्थान परिवहन की अपील पर दिया जिसमे मृत कर्मचारी की पत्नी को ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया गया था।  इस कर्मचारी ने बीमारी के कारण सेवानिवृत्ति मांगी थी, लेकिन जब उसे रिटायर नहीं किया गया तो सेवा इस्तीफा दे दिया था। बाद में उसकी मृत्यु हो गई।

उसकी पत्नी ने सेवानिवृति के लाभ मांगने के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने परिवहन संस्थान को आदेश दिया कि कर्मचारी को स्वयं वॉलंटरी रिटायर हुआ माना जाए और उसे सेवा समाप्ति के सभी लाभ जर किए जाएं।

कोर्ट ने कहा यहां उसकी लगातार पांच वर्ष सेवा ही महत्वपूर्ण है। उसने सेवा से इस्तीफा दिया है,  उसका कोई अर्थ नहीं है। यह स्पष्ट है उसकी सेवा में ब्रेक नहीं है और उसने इस्तीफा देने तक पूर्ण सेवा की है। इसलिए वह ग्रेच्युटी का हकदार है।

सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन विभाग की अपील खारिज कर दी और कहा कि हाईकोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है कि कर्मचारी इस्तीफा देने पर भी ग्रेच्युटी लेने का अधिकारी होता है।  इसके लिए एक शर्त यही है कि कर्मी की सेवा पांच वर्ष तक लगातार होनी चाहिए। ग्रेच्युटी एक्ट की धारा 4 में यह साफ कहा गया है। PLC.

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