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Thursday, November 26th, 2020

तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय की परंपरा को फिर से जीवंत करने का प्रयास : डॉ. रमन सिंह

dr raman singh chief minister chhattisgarhआई एन वी सी ,

राय पुर , मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह आज गायत्री विद्यापीठ परिसर केसर नगर राजनांदगांव में आयोजित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के शुभारंभ समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार द्वारा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की छत्तीसगढ़ में स्थापना के माध्यम से तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव के गायत्री स्कूल की राजनांदगांव ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ में अपनी विशिष्ट पहचान है। यह संस्था सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंडया के अगले प्रवास के अवसर पर राजनांदगांव में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का विधिवत भूमिपूजन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव को यह सौभाग्य मिला है कि यहां देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी राजनांदगांव में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना से लोगों को विज्ञान, धर्म, अध्यात्म, दर्शन की शिक्षा का एक अच्छा केन्द्र मिलेगा। डॉ. सिह ने कहा कि केवल शांतिकुंज हरिद्वार में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय संचालित है, इसके बाद देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राजनांदगांव का चयन किया जाना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा पध्दति संपूर्ण भारतीय पध्दति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यहां युवा वर्ग को जीवन की हर चुनौतियों का सामना करने की शिक्षा मिले और बेहतर शिक्षित और संस्कारवान युवा पीढ़ी का निर्माण हो।गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंडया ने इस अवसर पर कहा कि आने वाले समय में भारत एक बार फिर से जगतगुरू के पद पर प्रतिष्ठित होगा। भारत की सांस्कृतिक धरोहर हमेशा से विदेशियों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही है। भारत के अध्यात्म, वेद, ज्ञान-विज्ञान को उन्होंने स्वीकार किया। अध्यात्म के सहारे जीवन को तनाव से मुक्त किया जा सकता है। धर्म और अध्यात्म साथ-साथ मिलकर चलते हैं, तो समाज आगे बढ़ता है। बच्चों को जीवन में समग्र विकास की कला सीखाएं, जिससे वे पढ़-लिखकर शिक्षा और विज्ञान के स्वरूप को समझ सकें। उन्होंने कहा कि भारत अध्यात्म का जगतगुरू रहा है। हमारा प्रयास होगा कि भारत आने वाले समय में एक बार फिर वैज्ञानिक आध्यात्मवाद के जगतगुरू के पद पर प्रतिष्ठित हो।     डॉ. प्रणव पंडया ने इस अवसर पर कहा कि राजनांदगांव में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के माध्यम से एक नए युग की शुरूआत हो रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने हमें नई-नई जानकारियां, नई विधाएं प्रदान की, जिससे हम सुविधाभोगी होने के साथ-साथ भौतिक विकास की ओर अग्रसर होते गये। इससे मानव-मानव के बीच अलगाव को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि विज्ञान सुख-सुविधा देने का साधन है, किन्तु साधनों को परिष्कृत कर उपयोग के लायक बनाना अध्यात्म का काम है। विज्ञान धर्म के बिना अधूरा है।     डॉ. पंडया ने कार्यक्रम में कहा कि छत्तीसगढ़ को समृध्द, सशक्त राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता। सरकार की शिक्षा प्रणाली में वैदिक संस्कृति की शिक्षा को शामिल कर व्यक्ति का समग्र विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के शिक्षक और शिक्षिकाएं बच्चों को श्रेष्ठतम संस्कार देने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. पंडया ने कहा कि आज राजनांदगांव में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की शुरूआत करने जा रहे हैं। इसके पहले केवल शांतिकुंज हरिद्वार में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय संचालित है। उन्होंने कहा कि यहां न्यूनतम राशि पर शिक्षा दी जाएगी। राजनांदगांव में स्थापित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का साऊथ केम्पस तथा बिलासपुर में स्थापित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का नार्थ केम्पस कहलाएगा। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरूदेव के सपने को साकार करना हम सभी का कर्तव्य है। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में नया अध्याय होगा। डॉ. पंडया ने कहा कि हम सरस्वती शिशु मंदिर की तरह भगवती शिशु मंदिर खोलकर संस्कार की शिक्षा देंगे।गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. पंडया ने मुख्यमंत्री डॉ. सिंह को गायत्री साहित्य की पुस्तकें भेंट की। गायत्री परिवार के नंदकिशोर सोनी ने स्वागत भाषण दिया और श्री ओंकारभाई ने  सुमधुर संगीत और गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री मधुसूदन यादव, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री लीलाराम भोजवानी, नगर निगम राजनांदगांव के महापौर श्री नरेश डाकलिया, पूर्व महापौर श्रीमती शोभा सोनी, पूर्व सांसद श्री प्रदीप गांधी, जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष श्री भरत वर्मा और छत्तीसगढ़ गो सेवा आयोग के सदस्य श्री पुरूषोत्तम गांधी सहित अनेक जनप्रतिनधि और गणमान्य नागरिक तथा गायत्री परिवार से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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