Tuesday, February 18th, 2020

डॉ. बी.आर.अम्बेडकर का आईडिया ऑफ इण्डिया युगानुकूल

dddkdआई एन वी सी न्यूज़ अजमेर, विधानसभा अध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल ने कहा कि देश में आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक समरसता तथा देश की एकता के लिए संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। देश के विकास के लिए हमें बाबा साहब के विचारों का अधिक से अधिक प्रचार करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 अप्रेल को डॉ. अम्बेडकर के विचारों पर अमल की सीख के साथ ही अब इन सुधारों की शुरूआत हो गई है।        श्री मेघवाल ने मंगलवार को अजतेर के  महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में डॉ. बी.आर.अम्बेडकर शोध पीठ की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में  यह विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी का विषय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का राष्ट्र निर्माण में योगदान रखा गया था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर भारत को एकता के सूत्र में पिरोने तथा इसे तरक्की के पथ पर आगे बढ़ाने की सोच रखते थे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लिए आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृति एवं सामाजिक उन्नति की सोच के साथ देश का संविधान तैयार किया।        उन्होंने कहा कि लम्बे समय तक संविधान को उसके मूल स्वरूप में लागू नहीं किया जा सका। अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डॉ. अम्बेडकर के विचारों के प्रचार-प्रसार एवं उनके बताए रास्ते पर चलकर शासन करने प्रतिबद्धता जाहिर करने से निश्चित तौर पर परिवर्तन आएगा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी विद्यालयों में संविधान पढ़ाए जाने के जो आदेश दिए हैं वे बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे।        श्री मेघवाल ने कहा कि धारा 370 का विरोध हो या अन्य विषय, डॉ. अम्बेडकर ने देश को एक रखने के लिए हमेशा पुरजोर वकालत की। उनके विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक वैचारिक आंदोलन खड़ा करना होगा। तभी समाज के सभी वर्गों, विशेषकर पिछड़े व दलित समुदायों को उनका वास्तविक अधिकार मिल सकेगा। इन्हीं विचारों से समाज की विसंगतियां भी दूर होंगी।        राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री ललित के पंवार ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर का समाज को सबसे बड़ा योगदान मातृशक्ति को उनके अधिकार दिलाना एवं दलित समुदाय का सशक्तिकरण है। बाबा साहब बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनके व्यक्तित्व को किसी एक पहलू से नहीं आंका जा सकता।        श्री पंवार ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारतीय वर्ण व्यवस्था जो कि कर्म आधारित थी और विकृत होकर जन्म आधारित हो गई। यह व्यवस्था समाज के लिए सबसे अधिक विभाजनकारी है। यहां तक कि व्यक्ति के नाम में भी यह विसंगतियां दिखाई पड़ती है। डॉ. अम्बेडकर ने इन विसंगतियों का दंश स्वयं भोगा और इनके निराकरण के लिए अपना सर्वस्व लगा दिया।        श्री पंवार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपनी पीड़ा को प्रेरणा बनाया और समाज के नवनिर्माण के लिए जो योगदान दिया वह अभुतपूर्व है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में धारा370 का विरोध किया। वे जानते थे कि यह नासूर बन जाएगा। आज जब हमारे जवान वहां शहीद होते हैं तो बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता पता चलती है।        दिल्ली से आए प्रो. संगीत रागी ने कहा कि डॉ. बी.आर.अम्बेडकर का आईडिया ऑफ इण्डिया युगानुकूल है। उनके व्यक्तित्व को किसी एक पहलू से नहीं जाना जा सकता। उनके लेखन पर भाष्य लिखे जाने चाहिए।        कुलपति प्रो. कैलाश सोडानी ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय की डॉ. बी.आर.अम्बेडकर शोध पीठ के लिए एक करोड़ रूपए दिए गए हैं। इस राशि से मिलने वाले ब्याज से शोध पीठ का कार्य चलता रहेगा। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शिक्षा योजना में चयन किए जाने के पश्चात 5 करोड़ रुपए मिले हैं। इस राशि से विश्वविद्यालय में एक हजार लोगों की बैठक क्षमता वाला ऑडीटोरियम तथा रिमोट सेंसिंग विभाग के लिए भवन बनाया जाएगा।        डॉ. बी.आर.अम्बेडकर शोध पीठ के निदेशक प्रो. शिवप्रसाद ने संगोष्ठी का परिचय एवं अतिथियों को स्वागत किया। विश्वविद्यालय के कुल गीत के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, पूर्व कुलपति, अधिकारी, अतिथि एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment