Friday, February 28th, 2020

जेएनयू में भारी बवाल - पुलिस तैनात

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में रविवार शाम को जमकर बवाल हुआ और मारपीट में छात्र संघ अध्यक्ष आइश घोष का सिर फट गया है। छात्र संघ का दावा है कि यह बवाल लेफ्ट और एबीवीपी के छात्रों के बीच हुआ है। इस हिंसा में दोनों छात्र संगठनों के करीब 25 छात्र घायल हुए हैं।
बताया जा रहा है कि विंटर सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन के लिए पांच जनवरी आखिरी दिन था, इसलिए छात्र रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे। मगर लेफ्ट और छात्र संघ ने उनको रोकने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों के दोनों गुट आपस में भिड़ गए।

इसके बाद पेरियार हॉस्टल के सामने पत्थरबाजी शुरू हो गई। घटना के बाद कैंपस में पुलिस पहुंची है। घटना में कई छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। वहीं कई अन्य छात्रों को पुलिस अपने साथ ले गई है।

जेएनयू में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष आइश घोष ने कहा, 'मुझे मास्क पहने गुंडों ने बेरहमी से पीटा है। मेरा खून बह रहा है और मुझे बेहरमी से पीटा गया है। उन पर नकाब पहने लोगों ने हमला किया है।'
केजरीवाल ने तुरंत हिंसा रोकने की अपील की
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है। केजरीवाल ने कहा, 'मैं जेएनयू में हिंसा से काफी हैरान हूं। छात्रों पर बुरी तरह से हमला किया गया है। पुलिस को तुरंत हिंसा रोककर शांति कायम रखनी चाहिए। अगर कैंपस के भीतर भी छात्र सुरक्षित नहीं हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा।'

दिल्ली सरकार ने कहा है कि जेएनयू कैंपस की स्थिति को देखते हुए सात एंबुलेंस भेजी गई हैं जबकि 10 एंबुलेंस स्टैंडबाय पर हैं। कैंपस में भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया है।
भारत माता की जय बोल रहे थे हमलावर : जेएनयूएसयू
एबीवीपी के बाद जेएनयू छात्र संघ ने भी ट्वीट करते हुए अपना पक्ष रखा है। जेएनयूएसयू ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'वे भारत माता की जय बोल रहे थे। कैंपस में छात्रों से मारपीट करने के बाद वे भारत माता का नाम ले रहे थे। जेएनयू कैंपस में सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद फैलाया जा रहा है।'

वहीं दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ जेएनयू में हुई हिंसा बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को जेएनयू प्रसाशन के साथ हर संभव कदम उठाने चाहिए।    
 
योगेंद्र यादव से भी धक्का मुक्की
सामाजिक कार्यकर्ता एवं जेएनयू के पूर्व छात्र योगेंद्र यादव को भी धक्का मुक्की से जूझना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा कभी माहौल नहीं देखा। जेएनयू परिसर में प्रवेश करने से रोका गया और उनके साथ धक्का मुक्की भी हुई। यादव ने इसपर सवाल उठाते हुए कहा कि जेएनयू के अंदर घुसकर हंगामा करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय नेताओं को प्रवेश करने से रोका गया।PLC.

 

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