Sunday, November 17th, 2019
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जरूरतों के मुताबिक बदलाव जरूरी

आई एन वी सी न्यूज़ भोपाल ,

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि आज वर्तमान जरूरतों के मुताबिक शासन तंत्र में बदलाव जरूरी है। अंग्रेजों के जमाने की इस व्यवस्था में परिवर्तन करने पर सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सहायता, सहयोग और समर्थन की व्यवस्था लागू होना चाहिए। यह हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कमिश्नर और कलेक्टर संभाग और जिला स्तर पर सरकार का चेहरा हैं। दोनों अधिकारी जनता और सरकार के बीच नोडल पाइंट हैं, इसलिये इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जब सबसे कमजोर और गरीब वर्ग को तत्काल और त्वरित न्याय मिलेगा, तभी प्रदेश में सुशासन की स्थापना कर पाएंगे। मुख्यमंत्री आज मंत्रालय में कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आज लोगों की जरूरतों, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं में परिवर्तन हुआ है। जो मौजूदा व्यवस्था काम कर रही है, वह 60-70 साल पुरानी है। इस व्यवस्था को हमें आज के संदर्भ में बदलना होगा ताकि वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार का सोच स्पष्ट है। कानून और नियम के कारण आम आदमी को दिक्कत नहीं होना चाहिए। जिसके पास कुछ भी नहीं है, वह सरकार की योजनाओं का लाभ पाएं, यह सुनिश्चित करने का काम जिला कलेक्टरों का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टर-कमिश्नर शासन तंत्र के नोडल पाइंट हैं। इनका आपस में और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो, यह उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

जहाँ सुशासन नहीं, वहाँ समस्याएँ अधिक

श्री नाथ ने कहा कि मेरा अनुभव यह है कि जिस जिले में सुशासन नहीं है, वहाँ समस्याओं के सबसे अधिक आवेदन मिलते हैं और यही उस जिले का रिपोर्ट कार्ड बतलाता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि जनता से जुड़ी संस्थाओं को ऐसा स्वरूप दें कि वे तत्काल तत्परता के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि जो काम जिला और संभाग स्तर पर हो सकते हैं, उसके लिये आम-आदमी को अगर मुख्यमंत्री, मंत्री और मंत्रालय के पास तक आना पड़े, यह उचित नहीं है। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझना होगी और जवाबदेही तय करना होगी।

न्याय से कोई वंचित न हो

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान ने हमारे नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय का जो बुनियादी अधिकार दिया है, उससे वे वंचित न हों, यह मेरी सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समानता और स्वतंत्रता असीमित नहीं है, लेकिन न्याय असीमित है और उसे अधिकार है कि वह स्वतंत्रता और समानता के अधिकार में हस्तक्षेप कर सके। यही हमारे लोकतंत्र की नींव है। सरकार की इस मंशा को अधिकारियों को आत्मसात करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-सुनवाई, सीएम हेल्पलाइन, लोकसेवा गारंटी दिखावे के लिये न हो। इन्हें और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। इनके जरिये हम लोगों की समस्याओं का शीघ्रता से समाधान कर सकते हैं।

संभाग आयुक्त अपनी भूमिका तय करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि संभाग आयुक्त अपनी भूमिका को नये सिरे से तय करें। वे अपने अधीनस्थ जिलों में निरंतर मॉनिटरिंग करें और प्रो-एक्टिव होकर काम करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम को मैदानी समस्याओं की जानकारी अखबारों, आंदोलनों और शिकायतों से नहीं मिलना चाहिए। कलेक्टर और कमिश्नर की ओर से हमें सूचना आएं, तभी हम सुचारु तंत्र संचालन का दावा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर कौन सी समस्या विकास में बाधक है, जो लोगों की समस्याओं का कारण बनेगी, इसकी जानकारी से कमिश्नर-कलेक्टर मुझे अवगत करवाएँ। वे मुझसे सीधे संवाद कर सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं।

नीति से नहीं, वातावरण और विश्वास से आता है निवेश

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि मध्यप्रदेश में निवेश क्यों नहीं आता। उन्होंने कहा कि औद्योगिक जगत से निरंतर उन्हें यह फीडबैक मिला है कि यहाँ निवेश में प्रारंभ से ही दिक्कतें शुरु हो जाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम मध्यप्रदेश में नीति नहीं, ऐसा वातावरण और विश्वास पैदा करना चाहते हैं, जिससे निवेश अपने आप प्रदेश की तरफ आकर्षित हो। उन्होंने कहा कि निवेश की हमें आज सबसे ज्यादा जरूरत इसलिये हैं, क्योंकि हम इसके जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध करवाने के साथ ही प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार कर पायेंगे। उन्होंने इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी।

कौशल विकास के बाद रोजगार भी मिले

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि कौशल विकास के बारे में भी हमें सोचना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हमने नौजवानों को प्रशिक्षित कर दिया और उन्हें रोजगार नहीं मिला, तो ऐसे कौशल विकास का कोई अर्थ नहीं है। हमें ऐसी नीति अपनाना होगी जिससे हम अपने नौजवानों को रोजगार दिला सकें, तभी हमारे कौशल विकास के प्रयास का कोई लाभ है।

ऋण माफी योजना का लाभ तय समय-सीमा में मिले

मुख्यमंत्री ने जय किसान फसल ऋण माफी योजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। इस योजना का लाभ तय समय-सीमा में लोगों को मिले, यह सुनिश्चित करना आप लोगों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कम समय में इतनी बड़ी योजना पर अमल पर अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधा, जिनमें स्वास्थ्य, बिजली, स्कूल, पेयजल सहित अन्य सुविधाएँ शामिल हैं, उनकी डिलेवरी में कोताही नहीं होना चाहिए। उन्होंने बिजली आपूर्ति सुचारु रूप से सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मामले में भी संभाग आयुक्त और कलेक्टरों से सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ आपको प्रदेश में शांति व्यवस्था बनाये रखने में पूरी जिम्मेदारी निभाना है।

कॉन्फ्रेंस में जय किसान फसल ऋण माफी योजना, स्व-रोजगार योजना, पेयजल व्यवस्था, प्रोजेक्ट गौ-शाला, राजस्व प्रकरण के वितरण गलत विद्युत देयकों के निराकरण, अपराधिक प्रकरणों का प्रत्याहरण, कानून-व्यवस्था, आगामी लोकसभा चुनाव, युवा स्वाभिमान योजना, स्वास्थ्य सेवाएँ, मातृ-शिशु मृत्यु दर तथा बोर्ड परीक्षा की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

ऑनलाइन प्रक्रिया का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कृषि प्रयोजन भूमि को अन्य प्रयोजन में लाने के लिये शुरू की गई ऑनलाइन प्रक्रिया का शुभारंभ किया। श्री नाथ ने ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए हुए डायवर्जन की प्रथम प्रति दो हितग्राहियों को सौंपी।

> बदले कृषि परिदृश्य अनुसार कृषि नीति बनाने में मदद करे नाबार्ड :  मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि किसानों के हित में बदलते हुए कृषि परिदृश्य को ध्यान में रखकर नई योजनाएँ बनाना जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से आग्रह किया कि मध्यप्रदेश में परिवर्तित कृषि परिदृश्य को देखते हुए राज्य की कृषि नीति का प्रारूप तैयार करे। इसमें किसानों, कृषि विशेषज्ञों तथा कृषि व्यापार से जुड़ी संस्थाओं का भी सहयोग लें।

मुख्यमंत्री आज मंत्रालय में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की राज्य ऋण संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर जारी किया। उन्होंने नाबार्ड द्वारा सहायता प्राप्त स्व-सहायता समूहों और किसान उत्पाद समितियों को अच्छे प्रदर्शन के लिये सम्मानित किया।

श्री कमल नाथ ने कहा कि नाबार्ड के गठन के समय कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ खाद्यान्न की कमी दूर करने की थी। आज खाद्यान्न तक पहुँच बनाने और अत्यधिक उत्पादन से भंडारण की चुनौतियाँ हैं। किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य दिलाना चुनौती है। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में किसानों के लिये क्रेडिट सुविधाएँ बढ़ाने और कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने के लिये प्रतिबद्ध प्रयासों की सराहना की।

फसल ऋण माफी स्थायी समाधान नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल ऋण माफी किसानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यह उन्हें संकट से उबारने का तात्कालिक उपाय है क्योंकि कर्ज का मनौवैज्ञानिक दबाव होता है। अब ज्यादा लाभ के लिए विविधतापूर्ण खेती को अपनाने का समय है। पहले नाबार्ड ने सोयाबीन प्र-संस्करण और तेल उद्योग को प्रोत्साहित किया, फिर मक्का उत्पादन पर जोर दिया। इस तरह कृषि क्षेत्र की भी प्राथमिकताएँ बदलती रहती हैं।

श्री कमल नाथ ने कहा कि अब सीमित भौगोलिक क्षेत्र में कृषि उत्पादों की मार्केंटिंग का समय आ गया है। चार-पाँच जिलों में एक फूड पार्क स्थापित हो सकता है, जिसमें बने उत्पाद उन्हीं जिलों के ब्रांड बनकर बिकें। मार्केट अर्थ-व्यवस्था में ऐसे ब्रांड टिके रहेंगे, यह कहना मुश्किल है, पर किसानों को इससे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कृषि के नये आयामों को देखते हुए कृषि नीति बनाने की पहल करें।

उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग उभरते क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण सबसे तेज उभरते हुए क्षेत्र हैं। उद्यानिकी में भी फूलों के उत्पादन का एक बड़ा क्षेत्र उभर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों का भी अध्ययन करें, जहाँ नये फूड पार्क उभरने की संभावनाएँ बन रही हैं जिससे पहले से रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि जब किसानों की खरीद क्षमता बढ़ेगी, तभी कृषि से जुड़े क्षेत्रों की अर्थ-व्यवस्था भी सुधरेगी।

1,74,970 करोड़ का ऋण वितरण होगा

नाबार्ड ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए मध्यप्रदेश राज्य के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रूपये 1,74,970 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के अनुमानों से 14.28% अधिक है। "जय किसान ऋण माफी योजना" के कारण पिछले वर्ष के अनुमानों की तुलना में फसली ऋण के अनुमानों को वर्तमान 50 हजार करोड़ से बढ़ाकर 94 हजार करोड़ किया गया है, जो 86.36 प्रतिशत अधिक है। राज्य के 313 ब्लॉकों में संभावित ऋण वितरण की क्षमता ध्यान में रखते हुए राज्य फोकस पेपर "सतत् कृषि पद्धति" तैयार किया गया है।

इस अवसर पर सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह और किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री सचिन यादव, मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड श्री सुनील कुमार बंसल, महाप्रबंधक सुश्री एम. खेस, महाप्रबंधक श्री डी.एस. चौहान, महाप्रबंधक श्री हेमंत कुमार सबलानिया और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



 

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