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Friday, January 21st, 2022

जयपुर साहित्य समारोह का केन्द्र बनता जा रहा है - अशोक गहलोत

आई.एन.वी.सी,,
जयपुर,,
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि साहित्यकारों एवं लेखकों की पुस्तकें छपवाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड की स्थापना की जायेगी। मुख्यमंत्री रविवार को राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा अकादमी परिसर में आयोजित पुस्तक पर्व के दूसरे दिन समारोह में साहित्यकारों, विद्वानों और पुस्तक प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे। श्री गहलोत ने कहा कि साहित्यकारों की रचना यथा समय पर कैसे छपे इस संबंध में राजस्थान ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष द्वारा दिये गये सुझाव के अनुरूप इस रिवॉल्विंग फंड से पुस्तकों को छपवाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रकाशकों से कहा कि वे पुस्तकों की कीमत अर्फोडेबल रखें, जिससे कम से कम कीमत में नवजीवन ट्रस्ट, अहमदाबाद की भांति सभी को सस्ता साहित्य मिल सके। वह प्रयोग आज भी सफल है। श्री गहलोत ने कहा कि जयपुर में बुक मार्केट बने, जिसमें राज्य सरकार सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक पर्व से भाईचारे एवं सद्भाव का माहौल बनेगा तथा पुस्तक प्रेमियों को अच्छी किताबें उपलब्ध हो सकेंगी और ज्ञान की कई बातें सीखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि जयपुर साहित्य समारोह का केन्द्र बनता जा रहा है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के साथ-साथ राज्य की संस्कृत, उर्दू एवं हिन्दी अकादमी के समारोह भी यहां होते रहे हैं। पिछले माह ही हिन्दी ग्रंथ अकादमी और नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा भी पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था। श्री गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी अकादमियों को अपनी गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से उनका बजट दुगुना कर दिया है। उन्होंने बताया कि यहीं नहीं सरकार ने पत्रकार-साहित्यकार कल्याण कोष बना रखा है। इस कोष से साहित्यकारों एवं पत्रकारों को विभिन्न रोगों के इलाज के लिए सहायता दी जाती है। उन्होंंने कहा कि कोष की धन राशि बढ़ती जा रही है परन्तु लेने वाले कम हैं। कई स्वाभिमानी साहित्यकार एवं पत्रकार सहायता लेने में संकोच करते हैं कि हम कोष से कैसे पैसे मांगे। यह समाज सेवा का कार्य है। उन्होंने साहित्यकारों से अपील की कि वे जरूरतमंद लेखकों एवं पत्रकारों को इमदाद दिलाने में आगे आयें।  प्रमुख विचारक एवं राज्य सभा सांसद श्री जनार्दन द्विवेदी ने इस अवसर पर ‘संस्कृति, सद्भाव एवं राजनीति’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अतीत की नींव पर ही भविष्य का निर्माण निर्भर है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के उदात्त मूल्य सद्भाव पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति मानव जीवन की व्यवस्था है जिसे सार्वजनिक जीवन में सामाजिक पटरी पर लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और राजनीति पूंजी से प्रभावित हो रही है जो चिंता की बात है। पत्रकारिता का यह सामाजिक दायित्व है कि इस दिशा में स्वस्थ परम्पराओं को आगे बढ़ाये। श्री द्विवेदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की जीवनी के कई उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हमारे समृद्घ सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि गांधी जी को आज से 15 साल पहले भुलाने का प्रयास किया गया लेकिन गांधी जी आज भी प्रासंगिक हैं और आगे भी रहेंगे। जब-जब भी अन्याय और अत्याचार के खिलाफ प्रतिकार की बात होगी तब-तब गांधी जी के सिद्घांत हमें प्रेरणा देते रहेंगे। श्री द्विवेदी ने कहा कि पं. नेहरू अच्छे इतिहासकार, स्वप्नदृष्टा और आधुनिक विचारों के धनी थे। आजादी के पहले और आजादी के बाद खरी-खरी बात उनसे ज्यादा कोई करने वाला नहीं था। वरिष्ठ साहित्यकार श्री नन्दकिशोर आचार्य ने कहा कि अकादमियोंं के लिए वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था हो। अकादमियां राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं। अत: उन्हें  राजनीतिक संरक्षण की बजाय वास्तविक साहित्यकारों के हाथों में सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनैतिक सत्ता परिवर्तन के साथ इनका परिवर्तन ना होकर अकादमियों को उनकी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए। राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष डॉ. आर.डी. सैनी ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में 150 साहित्यकार भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की प्रेरणा से सन् 2009 में यह आयोजन शुरू हुआ था और अभी यह तीसरा पर्व है। इस पर्व का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकें पढऩे तथा शिक्षकों को लेखन कार्य के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि अकादमी की 150 पुस्तकें विभिन्न प्रदेशों के विश्वविद्यालयों में बिकती हैं। अकादमी को पुस्तकों से एक करोड़ की बिक्री होती है और साहित्यकारों को 20 प्रतिशत रॉयल्टी हर वर्ष, अपे्रल माह में उपलब्ध करा दी जाती है। इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव उच्च शिक्षा एवं जनसम्पर्क श्री राजीव स्वरूप, उर्दू की प्रसिद्घ लेखिका शरबत खान तथा देश-प्रदेश से आये विभिन्न साहित्यकार, साहित्य प्रेमी आदि मौजूद थे।

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