Wednesday, December 11th, 2019

जनसंख्‍या वृद्धि, शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण जल की बढ़ती मांग ने जल संसाधनों पर अत्‍याधिक दबाव बनाया है :पवन कुमार बंसल

आई.एन.वी.सी,,
दिल्ली,,
राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों के जल संसाधन / सिंचाई मंत्रियों का 14वां राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन 3 अक्‍टूबर, 2012 को नई दिल्‍ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय मामलों एवं जल संसाधन मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि यह सम्‍मेलन एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय मंच है जो जल क्षेत्र से जुड़े नाजुक मुद्दों और उन्‍हें कारगर रूप से हल करने के आवश्‍यक उपाय सुझाने के लिए सार्थक बातचीत का अवसर प्रदान करता है। उन्‍होंने कहा कि जनसंख्‍या वृद्धि, शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण जल की बढ़ती मांग ने जल संसाधनों पर अत्‍याधिक दबाव बनाया है जिससे कि अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों पर भारत जल की परेशानी से जूझता देश बन गया है। पीने और सफाई व्‍यवस्‍था के लिए जल उपलब्‍ध कराना और खाद्य सुरक्षा अत्‍याधिक जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय ने संसद के माननीय सदस्‍यों; शैक्षिणक समुदाय के विशेषज्ञों और व्‍यवसायियों; गैर सरकारी संगठनों; कोर्पोरेट सेक्‍टर और पंचायती राज संस्‍थाओं के प्रतिनिधियों के साथ व्‍यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद राष्‍ट्रीय जल नीति (2012) तैयार की है। उन्‍होंने बताया कि राष्‍ट्रीय जल नीति का प्रारूप सभी प्रदेशों और संबधित केंद्रीय मंत्रालयों के बीच परिचालित किया है और नीति के प्रारूप को माननीय प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में राष्‍ट्रीय जल संसाधन परिषद् की बैठक में विचार किया जायेगा। श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की कार्ययोजना के तहत राष्‍ट्रीय जल मिशन शुरू किया। इस मिशन का मुख्‍य उद्देश्‍य जल संरक्षण, जल की बर्बादी कम करना और राज्‍यों अथवा संघ में जल का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन करना है। भू-जल संरक्षण एक तत्‍काल प्राथमिकता है क्‍योंकि इस पर हमारी दो तिहाई से अधिक पानी की जरूरत पूरी होती है। देशभर में जल स्‍तर में गिरावट गंभीर चिंता का विषय है। उन्‍होंने कहा कि हमें भूजल को आम या समुदाय संसाधन के रूप में संसाधित करना होगा। हमें जल संसाधनों का टिकाऊ और समान प्रयोग सुनिश्चित करने के लिए भागदारी प्रबंधन को भी बढ़ावा देने और वास्‍तव में उपलब्‍ध भू-जल को फसल के तौर तरीकों से जोड़ने की भी आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि हमें राजनीतिक, वैचारिक और क्षेत्रीय मतभेद से ऊपर उठकर जल प्रबंधन में सुधारों के लिए राष्‍ट्रीय ढांचे के बारे सोच की जरूरत है। इसका मतलब यह है कि निर्धारित मौलिक सिद्धांतों को दृष्टिकोण में अंतर के बावजूद देशभर में जल प्रबंधन का मार्गदर्शन करना चाहिए। इन सिद्धांतों को कानूनी ढांचे में स्‍थापित कर देशभर में लागू किया जाना चाहिए जो कि राज्‍यों द्वारा आम सहमति के माध्‍यम से विकसित किये जा सकते हैं।

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