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Friday, October 22nd, 2021

छोटे से प्रयास से दे जलवायु परिवर्तन में अपना योगदान

आई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण के इन्दिरा भवन स्थित कार्यालय में समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति में ‘‘पर्यावरण किसका है?‘‘ विषय पर इण्टरेक्टिव सेशन आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उ0प्र0 राज्य लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष मा0 न्यायमूर्ति श्री सुधीर कुमार सक्सेना ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे को लगाना चाहिए, जिससे आक्सीजन की कमी न रहे। आने वाली पीढ़ी के लिए स्वस्थ पर्यावरण दे। उन्होंने कहा कि हम छोटे से प्रयास से जलवायु परिवर्तन में अपना योगदान दे सकते है। अपने कार्यालय में हमने पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्य की शुरूआत की है।


इस अवसर पर अधिकरण की सदस्य (प्रा0) श्रीमती अनिता भट्नागर जैन द्वारा इस संबंध में एक प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया गया और यूनेस्को द्वारा प्रथम स्क्रीनिंग की गयी, अपनी निर्मित लघु फिल्म ’’हमारी पृथ्वी हमारा घर’’ दिखाई गई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के दोहन के परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन के प्रभाव आज देश-विदेश में सबके समक्ष हैं। हिमालयी क्षेत्र में केवल 7 माह में 26 बार बादल फटने की घटनायें हुई हैं, जबकि 46 वर्षों में केवल 30 घटनायें हुई थी। बाढ़, सुरक्षा, जल का गिरता स्तर, पृथ्वी का अधिकतम तापमान 54.4 डिग्री से0, सब इस वर्ष देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति महत्वूपर्ण हैं, चाहे वह पर्यावरण की दशा में कुछ करे या न करे, क्योंकि सबका प्रभाव पड़ता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने कार्यालय और व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन-शैली को परिवर्तित करें, तो उन सबको मिलाकर एक व्यापक प्रभाव पड़ेगा। कोई भी आदत, प्रयास करने पर 21 दिन में बदली जा सकती है। उन्होंने सभी से अपने लिये और अपने भावी पीढ़ी के लिये पर्यावरण संबंधी सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिये अनुरोध किया।

डा0 अनिता भटनागर जैन ने प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग (विश्व में एक मिनट में 10 लाख प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग होता है) न करने की अपील की गयी। कार्यालय में जब आवश्यकता न हो और जब कक्ष में कोई उपस्थित न हो, तो विद्युत उपकरण/बत्ती, पंखे, ए0सी0 आदि बंद करके ऊर्जा का संचय और ऊष्मा में भी कमी लाई जा सकती है। कागज का दोनों तरफ उपयोग, बार-बार रफ कापी न बनाने, अनावश्यक कागजात न लेने से कागज के उपयोग, वृक्षों के कटने पर सामूहिक रूप से अकुंश लगाया जा सकता है।

डा0 जैन ने कहा कि ’’जितनी प्यास उतना गिलास, उतना भोजन थाली में जो न जाये नाली में’’ को अपनाकर जल और भोजन जैसे महत्वपूर्ण चीजों का अपव्यय रोका जा सकता है। यद्यपि पॉलिथीन के थैले के स्थान पर कपड़ों के थैले का उपयोग हो रहा है। अपने साथ कपड़ों के थैले का उपयोग करने पर प्लास्टिक पर अंकुश लगाया जा सकता है। आज के भौतिकवादी समाज में रिड्यूज,रियूज के अतिरिक्त ‘‘रिफ्यूज‘‘ यानि की जिस वस्तु की आवश्यकता न हो, उसका उपयोग न करने पर बल दिया। यातायात चौराहे पर लाल बत्ती हो जाने पर अपने वाहनों को बंद करने से प्रचुर मात्रा में ईधन व तत्काल में प्रदूषण व पर्यावरण को बचाया जा सकता है। केवल दिल्ली में वर्ष 2006 यानि 15 वर्ष पूर्व किये गये सर्वेक्षण में प्रमुख चौराहों पर करीब 4 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल का अपव्यय हो रहा था। अनावश्यक हार्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है।  

इस अवसर पर राज्य लोक सेवा अधिकरण के सदस्य (प्रशासनिक) श्री के0एस0 अटोरिया, राज्य लोक सेवा अधिकरण (न्यायिक) श्री गोविन्द वल्लभ शर्मा,  निबन्धक श्री सर्वेश कुमार पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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