imagesआई एन वी सी न्यूज़
भोपाल,
भोपाल जिले के सभी अशासकीय, अर्धशासकीय स्कूल-कालेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब किसी दुकान विशेष से किताब-गणवेश आदि लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा । कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिये हैं। छात्रों पर किसी भी दुकान विशेष से गणवेश-पुस्तकें आदि क्रय करने हेतु दबाव बनाने वाले शिक्षण संस्थान के प्राचार्य/प्रबंधन सदस्यों पर धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।

अशासकीय विद्यालयों द्वारा शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले शाला में प्रवेश लेने वाले तथा पढ़ रहे विद्यार्थियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे दुकान विशेष से ही पुस्तकें एवं गणवेश और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदें। शासन ने इस प्रवृत्ति को उचित नहीं माना है। प्रदेश में संचालित निजी हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल या तो सीबीएसई अथवा माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्ध हैं। शासन ने कहा हैं कि निजी विद्यालय अपने विवेकानुसार निजी प्रकाशकों/एनसीईआरटी/पाठ्य-पुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में से चयन करें। सभी निजी स्कूल के लिये यह जरूरी होगा कि अगले शिक्षा सत्र के शुरू होने के कम से कम एक माह पहले पाठ्य-पुस्तकों की सूची लेखक एवं प्रकाशक के नाम तथा मूल्य के साथ सूचना-पटल पर प्रदर्शित करें। इससे विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक पुस्तकों को अपनी सुविधा से खुले बाजार से खरीद सकेंगे।

किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर अब विद्यालय का नाम अंकित नहीं होने दिया जाएगा। विद्यालय के नोटिस-बोर्ड पर बड़े अक्षरों में यह अंकित करवाया जायेगा कि किसी दुकान विशेष से सामग्री खरीदने की बाध्यता नहीं है। कहीं से भी पुस्तकें और सामग्री खरीदी जा सकती है। पुस्तकों के अलावा शाला की यूनिफार्म, टाई, जूते, कॉपी आदि भी उन्हीं शालाओं से उपलब्ध करवाने का बलपूर्वक प्रयास करने की स्थिति पैदा नहीं होने दी जायेगी। सभी सामग्री, जिन्हें संबंधित शाला उपयुक्त मानती है, उनके लिये विद्यार्थी एवं अभिभावकों को यह स्वतंत्रता दी जायेगी कि वे उसे खुले बाजार से खरीद सकें।

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