Close X
Wednesday, January 27th, 2021

छत्तीसगढ़ में देश के चावल की जरूरत को पूरा करने की ताकत : डॉ. रमन सिंह

उमा भारती आई एन वी सी न्यूज़आई एन वी सी न्यूज़ रायपुर, केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खाद्य और आजीविका सुरक्षा के लिए जल और भूमि प्रबंधन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रथम एशियन सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए सुश्री भारती ने कहा- देश में अच्छी खेती और सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिये जल प्रबंधन को जन-आंदोलन बनाना होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने जल-मंथन कार्यक्रम की शुरूआत की है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले हमारे देश में विकास के लिये पानी का बेहतर प्रबंधन जरूरी है। अध्यक्षीय आसंदी से सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन ंिसह ने जल मंथन कार्यक्रम को काफी उपयोगी बताया। डॉ. सिंह ने कहा कि कम पानी में अधिक पैदावार लेने की वैज्ञानिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में देश की चावल की जरूरत को पूरा करने की ताकत है। इसके लिए हमें बेहतर भूमि और जल प्रबंधन के साथ वैज्ञानिक तकनीक से खेती करनी होगी। छत्तीसगढ़ वर्तमान में देश के आठ राज्यों को चावल दे रहा है। सम्मेलन का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय मृदा संरक्षण समिति के सहयोग से किया गया।
सुश्री उमा भारती ने कहा कि हमें कम पानी में अधिक पैदावार लेने की तकनीक इजरायल से  सीखनी चाहिये। इसके लिये इजरायल के सहयोग से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश में तीन पायलट प्रोजेक्ट मराठवाड़ा, बुंदेलखंड और ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र के बलांगीर, नुआपाड़ा, कोरापुट जिलों में शुरू किया गया है। अगर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से प्रस्ताव मिले तो इस पॉयलट प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जा सकता है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों के पानी और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिये नदियों को जोड़ने की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। देश में केन और बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना पहली परियोजना है। उन्होंने कहा कि महानदी-गोदावरी नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना देश के लिये महत्वपूर्ण साबित होगी। इसके लिए विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है । आने वाले 10 वर्षाें में गंगा पूर्णतः स्वच्छ हो जाएगी। उन्होने कहा कि देश की पहली हरित क्रांति के दौरान केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। लेकिन भूमि एवं जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं देने के कारण पंजाब एवं हरियाणा जैसे राज्यों में भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त हो गई।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सम्मेलन में कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, पानी एवं जलवायु अच्छी है। इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस्तेमाल करने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र राज्य है जहां हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों साल पहले जल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। और हर गांव में बड़ी संख्या में तालाब और डबरी खुदवाए। धान के खेती के लिये पानी की जरूरत को पूरा करने के लिये किसान बंधिया बनाते थे। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती में इतना सामर्थ्य है कि अगर वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो देश के खाद्यान्न के लिये चावल की जरूरतों को छत्तीसगढ़ पूरा कर सकता है।  आज छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों की भूगर्भीय संरचना की दृष्टि से जल प्रबंधन की कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। सम्मेलन से निकले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में मिट्टी और जल प्रबंधन के लिये उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने खेती में बूंद-बूंद पानी का उपयोग कर अधिक पैदावार बढ़ाने की तकनीक पर कृषि वैज्ञानिकों को कार्य करने कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रिसर्च के लिये इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। उन्होंने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 31 वें स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
छत्तीसगढ़ के कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता पानी बचाने की है। पानी पूरी प्रकृति को संतुलित करता है। पानी और भूमि के बेहतर प्रबंधन से ही खुशहाली आएगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.एस.के.पाटिल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि देश के 72 कृषि विश्वविद्यालयों में छत्तीसगढ़ के इस कृषि विश्वविद्यालय के 85 छात्राओं ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस प्रकार विश्वविद्यालय ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है, जो हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि ई-गर्वेनेंस मॉडल के लिए इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। उद्घाटन सत्र में विषय-विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. ब्रजगोपाल ने सम्मेलन के उद्देश्यों और महत्व पर प्रकाश डाला। इस सम्मेलन में जल एवं भूमि प्रबंधन के लिए बेहतर रणनीति और नई तकनीकों को चिन्हांकित किया जाएगा, जल एवं भूमि प्रबंधन के लिए नीति निर्धारकों, स्वयंसेवी संगठनों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शिक्षाविदों के अनुभव साझा किया जाएंगे तथा भूमि और जल प्रबंधन के लिए विकसित कम्प्यूटर साफ्टवेयर और हार्डवेयर प्रदर्शित किए जाएंगे। शुभारंभ सत्र में लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, कृषि विभाग के संसदीय सचिव श्री तोखन साहू, इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के.पाटिल और कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय सिंह भी उपस्थित थे। इस अवसर पर केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन और शिलान्यास तथा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और औषधालय भवन का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में भारतीय मृदा संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. सूरजभान भी उपस्थित थे।
आई एन वी सी न्यूज़
रायपुर,
केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खाद्य और आजीविका सुरक्षा के लिए जल और भूमि प्रबंधन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रथम एशियन सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। 
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए सुश्री भारती ने कहा- देश में अच्छी खेती और सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिये जल प्रबंधन को जन-आंदोलन बनाना होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने जल-मंथन कार्यक्रम की शुरूआत की है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले हमारे देश में विकास के लिये पानी का बेहतर प्रबंधन जरूरी है। अध्यक्षीय आसंदी से सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन ंिसह ने जल मंथन कार्यक्रम को काफी उपयोगी बताया। डॉ. सिंह ने कहा कि कम पानी में अधिक पैदावार लेने की वैज्ञानिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में देश की चावल की जरूरत को पूरा करने की ताकत है। इसके लिए हमें बेहतर भूमि और जल प्रबंधन के साथ वैज्ञानिक तकनीक से खेती करनी होगी। छत्तीसगढ़ वर्तमान में देश के आठ राज्यों को चावल दे रहा है। सम्मेलन का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय मृदा संरक्षण समिति के सहयोग से किया गया।
सुश्री उमा भारती ने कहा कि हमें कम पानी में अधिक पैदावार लेने की तकनीक इजरायल से  सीखनी चाहिये। इसके लिये इजरायल के सहयोग से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश में तीन पायलट प्रोजेक्ट मराठवाड़ा, बुंदेलखंड और ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र के बलांगीर, नुआपाड़ा, कोरापुट जिलों में शुरू किया गया है। अगर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से प्रस्ताव मिले तो इस पॉयलट प्रोजेक्ट में छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जा सकता है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों के पानी और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिये नदियों को जोड़ने की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। देश में केन और बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना पहली परियोजना है। उन्होंने कहा कि महानदी-गोदावरी नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना देश के लिये महत्वपूर्ण साबित होगी। इसके लिए विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है । आने वाले 10 वर्षाें में गंगा पूर्णतः स्वच्छ हो जाएगी। उन्होने कहा कि देश की पहली हरित क्रांति के दौरान केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। लेकिन भूमि एवं जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं देने के कारण पंजाब एवं हरियाणा जैसे राज्यों में भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त हो गई।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सम्मेलन में कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, पानी एवं जलवायु अच्छी है। इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस्तेमाल करने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र राज्य है जहां हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों साल पहले जल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। और हर गांव में बड़ी संख्या में तालाब और डबरी खुदवाए। धान के खेती के लिये पानी की जरूरत को पूरा करने के लिये किसान बंधिया बनाते थे। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती में इतना सामर्थ्य है कि अगर वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो देश के खाद्यान्न के लिये चावल की जरूरतों को छत्तीसगढ़ पूरा कर सकता है।  आज छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों की भूगर्भीय संरचना की दृष्टि से जल प्रबंधन की कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। सम्मेलन से निकले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में मिट्टी और जल प्रबंधन के लिये उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने खेती में बूंद-बूंद पानी का उपयोग कर अधिक पैदावार बढ़ाने की तकनीक पर कृषि वैज्ञानिकों को कार्य करने कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रिसर्च के लिये इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। उन्होंने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 31 वें स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
छत्तीसगढ़ के कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता पानी बचाने की है। पानी पूरी प्रकृति को संतुलित करता है। पानी और भूमि के बेहतर प्रबंधन से ही खुशहाली आएगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.एस.के.पाटिल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि देश के 72 कृषि विश्वविद्यालयों में छत्तीसगढ़ के इस कृषि विश्वविद्यालय के 85 छात्राओं ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस प्रकार विश्वविद्यालय ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है, जो हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि ई-गर्वेनेंस मॉडल के लिए इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। उद्घाटन सत्र में विषय-विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. ब्रजगोपाल ने सम्मेलन के उद्देश्यों और महत्व पर प्रकाश डाला। इस सम्मेलन में जल एवं भूमि प्रबंधन के लिए बेहतर रणनीति और नई तकनीकों को चिन्हांकित किया जाएगा, जल एवं भूमि प्रबंधन के लिए नीति निर्धारकों, स्वयंसेवी संगठनों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शिक्षाविदों के अनुभव साझा किया जाएंगे तथा भूमि और जल प्रबंधन के लिए विकसित कम्प्यूटर साफ्टवेयर और हार्डवेयर प्रदर्शित किए जाएंगे। शुभारंभ सत्र में लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, कृषि विभाग के संसदीय सचिव श्री तोखन साहू, इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के.पाटिल और कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय सिंह भी उपस्थित थे। इस अवसर पर केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन और शिलान्यास तथा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और औषधालय भवन का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में भारतीय मृदा संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. सूरजभान भी उपस्थित थे।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment