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Thursday, December 9th, 2021

चारधाम यात्रा मार्गो पर सरायों को मिलेगी ज़मीन

harish rawat ,harish rawat invc newsआई एन वी सी न्यूज़ देहरादून , मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को देर रात एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईफेड), केम्पा व जायका के अन्तर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा की, उन्होने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने व समुदाय आधारित कार्यक्रम संचालित कर भूमि, जल और जैव विविधता की उत्पादन क्षमता वृद्धि के उपायों के साथ उन्हे बाजार की अर्थव्यवस्था से जोडना इन योजनाओं का उद्देश्य है। अतः आवश्यक है कि इन योजनाओं को क्षेत्रीय विकास से जोडते हुए इनके क्रियान्वयन की प्रभावी कार्यवाही की जाय। उन्होने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन तीनो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाय तथा 80 प्रतिशत से कम व्यय होने पर सम्बंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। उन्होने इस सम्बंध में शीघ्र कार्य योजना तैयार करने को कहा तथा एक सप्ताह के अन्दर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि एकीकृत आजीविका सुधार योजना के अधीन गठित स्वयं सहायता समूहो के मूल्यांकन के साथ ही इसके फेडरेशनों में दो-तीन सदस्य जनप्रतिनिधि रखे जाएं। उन्होने सभी फेडरेशनों की अगले माह संयुक्त कार्यशाला आयोजित करने के भी निर्देश दिए ताकि उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यो की जानकारी एवं उनकी समस्याए समझी जा सकें। उन्होने कहा कि आम आदमी से जुडी योजनाओं का बेहतर ढ़ग से क्रियान्वयन आवश्यक है इससे ग्रामीण स्तर पर योजनाओं से लाभान्वित होने वालो की वास्तविक स्थिति मालूम हो सकेगी। उन्होने कहा कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गठित स्वंय सहायता समूहों की स्थिति का भी आंकलन जरूरी है। उनकी क्षमता एवं कार्य करने की स्थिति पर भी नजर रखी जाएं। उन्होने कहा कि इस योजना के अधीन फेडरेशन के माध्यम से कलक्शन सेंटर में एकत्र होने वाली सामग्री के विपणन के लिए हल्द्वानी व देहरादून में मार्केटिंग की व्यवस्था कि जाए। इन उत्पादों को कृषि मण्डी, मेलों व अन्य बाजारों में स्थान चिन्हीत किये जाए व इसके लिए रोड मैप भी तैयार किया जाए, यदि आवश्यकता हुई तो समय-समय पर इनके लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में ग्राउण्ड फ्री दिए जांएगे। उन्होने हर जिले में आईफेट कार्नर स्थापित करने पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा की चारधाम यात्रा मार्गो पर विकसित की जा रही सरायों में भी इसके लिए स्थान उपलब्ध कराए जाएं। उन्होने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में चारागाह विकसीत करने व चारा प्रजाति के वृक्षों के रोपण से पशुपालन, दुग्धविकास व्यवसाय में बढ़ोतरी हो सकती है। पानी की उपलब्धता के लिए चालखाल पर ध्यान देना होगा। कृषि क्षेत्रों में क्लस्टर विकसित कर स्थानीय उत्पादों को बढावा दिया जाय, कृषि उद्यान दुग्ध विकास विभाग इसमें आपसी समन्वय से कार्य करें। केम्पा योजना के अन्तर्गत वन सुरक्षा, चारागाह विकास व सुरक्षा दीवार निर्माण, वनो की अग्नि से सुरक्षा, जलाशय निर्माण, जल श्रोतों का पुनरोद्धार, चेकडेमों का निर्माण के साथ ही वन पंचायतो के सुढ्ढीकरण सम्बंधी योजनाओं पर अमल किया जाय। उन्होेने खेती को जंगली सुवर व बन्दरों से हो रहे नुकसान को कम करने की योजना बनाने को कहा, इससे फसलों को नुकसान होने से लोग खेती के कार्य से विरत हो रहे है।

उन्होने केम्पा योजना में जलसंचय के लिए प्रमुख गदेरो में बंध बनाने के भी निर्देश दिये तथा उदाहरण दिया कि अल्मोडा जनपद में स्योनी, पुजगाड़ व तिताली गदेरे में बंध बनाकर पानी की कमी दूर की जा सकती है। यही प्रयोग अन्य स्थलों पर हो सकता है। जायका से सम्बंधित योजनाओं को शीघ्र धरातल पर लाने के भी उन्होने निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जायका कार्यक्रमों का स्थानीय परिस्थिति के अनुकूल ढ़ांचे में बदलाव तथा कलसटर बेस फेडरेशन बनाने पर बल दिया। उन्होने इन कार्यक्रमों के लिये दिये जाने वाले प्रशिक्षण की व्यवस्था अच्छे संस्थानों से किये जाने के निर्देश दिये। उन्होने पौधो की नर्सरी के लिए किसानो के चिन्हीकरण की भी बात कही। ये सभी योजनाये एक दूसरे की सहयोगी बनकर कार्य करे, कौन योजना कहा के लिये सही है यह देखा जाय। उन्होने योजनाओं व कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार प्रसार पर भी ध्यान देने के निर्देश दिये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हों सकें

इस अवसर पर विधायक शैलारानी रावत, मुख्य सचिव एन रवि शंकर, अपर मुख्य सचिव एस राजु, प्रमुख सचिव डा. रणवीर सिंह, सचिव विनोद फोनिया मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी डा. मनोज शर्मा सहित तीनों परियोजनाओं के निदेशक व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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