आई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
उत्तर प्रदश के मुख्यमंत्री यागी आदित्यनाथ जी न कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मादी जी के दश की अर्थव्यवस्था का 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचान के संकल्प का सफल बनान में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका हा सकती है। प्रधानमंत्री जी के आह्वान को पूर्ण करन में प्रदश का यागदान तभी माना जायगा, जब हम अपनी अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकं। राज्य का कृषि क्षत्र इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है। प्रदेश में उत्तम जलवायु, भौगालिक परिस्थितियां व प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता है। राज्य द्वारा यदि अपनी उर्वरा भूमि, जल संसाधनों आदि का सही उपयाग कर लिया जाए, ता यहां का किसान पूरी दुनिया का पेट भर सकता है। प्रदश की कृषि विकास की सम्भावनाआं का कृषि विज्ञान केन्द्रां के माध्यम से साकार किया जा सकता है। राज्य की कृषि और किसानां के उत्थान में कृषि विज्ञान केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
 
मुख्यमंत्री जी आज नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्यागिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या में 26वीं क्षत्रीय कृषि विज्ञान केंद्रों की वार्षिक कार्यशाला को सम्बाधित कर रह थ। उन्होंन कहा कि दश में पिछले 5 वर्ष कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रह हैं। प्रधानमंत्री जी न स्वॉलय हल्थ कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा याजना आदि याजनाआं के माध्यम स कृषि के विकास की जा नींव रखी थी, अब उसके परिणाम सामने आन लगे हैं। इन्हीं प्रयासां का परिणाम है कि दश में आज दलहन का पर्याप्त उत्पादन हा रहा है।

मुख्यमंत्री जी न कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों का आह्वान करत हुए कहा कि हमं प्रदश के हर जनपद से एक कृषि उत्पाद की विशिष्ट पहचान बनानी हागी। काला नमक चावल की चर्चा करत हुए उन्होंन कहा कि हम इसका बेहतर व्यावसायिक उपयोग कर सकत हैं। उन्हांन कहा कि प्रदश में एक ऐसा जनपद है जहां गुड़ की 127 किस्में उत्पादित हो रही हैं। मुख्यमंत्री जी न आयात किय जान वाली फसलों के उत्पादन का बढ़ावा देन पर जार दिया। उन्हांने वैज्ञानिकां का आह्वान किया कि जब वर्ष 2022 में दश आजादी के 75 वर्ष पूर्ण करगा, उसके लिए अपन का तैयार करना हागा। उन्हांने सघन खती, कृषि विविधीकरण जैसी तकनीकों को बढ़ावा दन पर जार दिया। गा-आश्रय स्थलां के गाबर का कम्पास्ट खाद मं बदलन की याजना से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री जी न बुन्देलखण्ड क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां किसानों न निराश्रित गोवंश के लिए बन आश्रय स्थलां का चारा उपलब्ध कराया और स्थिति बदल गयी। उन्होंन कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रां के बेहतर तालमेल से कृषि विकास के अच्छे परिणाम लाय जा सकत हैं। उन्होंन प्रदश के 9 एग्रो क्लाइमेटिक जान में बेहतर कार्य करन वाले 2 कृषि विज्ञान केंद्रों का सेंटर फॉर एक्सीलेंस घोषित करन की घाषणा की। मुख्यमंत्री जी न प्रदश की लम्बित सिंचाई परियाजनाआं का दिसम्बर, 2019 तक पूरा करन के निर्दश भी दिये। उन्हांने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा दशकां से लम्बित अधूरी बाण सागर सिंचाई परियाजना महज एक वर्ष में पूरी की गई हैं।
 
मुख्यमंत्री जी न कृषि विश्वविद्यालयां में प्रकाशित हाने वाले साहित्य को पूरे प्रदश मं प्रसारित करन का सुझाव दिया। उन्हांने नवान्मेषी किसानां के अनुभवां को साहित्य के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करन पर बल दिया। उन्हांने नरेंद्र दव कृषि एवं प्रौद्यागिक विश्वविद्यालय द्वारा शाध के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियां का आगे ल जान का आह्वान किया। अपन सम्बाधन के दौरान मुख्यमंत्री जी न आगरा बस हादसे में मारे गए लागों को श्रद्धांजलि देत हुए मृतकां के परिजनां का शासन से हर सम्भव सहयाग करन व हादसे की जांच करान की भी घोषणा की।

इससे पूर्व, विश्वविद्यालय पहुंचन पर मुख्यमंत्री न आचार्य नरेंद्र दव की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यशाला का उद्घाटन करन से पूर्व उन्होंन कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलाकन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी न राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के वित्तपोषण से विश्वविद्यालय में निर्मित हाने वाल 100 शैय्याओं के छात्रावास का शिलान्यास तथा विश्वविद्यालय में स्थापित 750 किलावॉट क्षमता के ग्रिड कनक्टड रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी न प्रसार निदशालय द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका पूर्वांचल खती के विशषांक समेत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अटारी कानपुर द्वारा प्रकाशित वार्षिक प्रतिवेदन व अन्य साहित्य का विमाचन किया।

कार्यक्रम का प्रदश के कृषि राज्य मंत्री श्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह (धुन्नी सिंह), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदशक (कृषि प्रसार) डॉ0 ए0के0 सिंह न भी सम्बाधित किया। कार्यक्रम के अन्त में नरन्द्र दव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति प्रो0 जे0एस0 संधू न अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयां के कुलपति, बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।