Wednesday, August 12th, 2020

गुप्त नवरात्रो का तंत्र साधना, जादू-टोना, वशीकरण इत्यादि सिद्धि के लिए विशेष महत्व

शक्ति की उपासना करने वालों के लिए खास है गुप्त नवरात्र

हमारे देश में देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। नवरात्र भी इनमें से एक है। लेकिन लोग सिर्फ दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय) के बारे में ही जानते हैं। इनके अलावा दो और नवरात्र भी होते हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। इस वर्ष 22 जून 2020 से आर्द्रा नक्षत्र और सूर्य-चंद्र की उपस्थिति में नवरात्र प्रारंभ होगी। जो 29 जून 2020 भड़ली नवमी तक चलेगी। इस बार पंचमी और षष्ठी का योग रहेगा इसलिए नवरात्र का पारण 29 जून को किया जाएगा। उसके अगले दिन 23 जून 2020 को जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव भी मनाया जाए

गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं। इस बार आषाढ़ मास मास के गुप्त नवरात्र का प्रारंभ 22 जून से हो रहा है, जो 29 जून को समाप्त होगी। आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र के इन नौ दिनों में क्रम के अनुसार 22 जून 2020 को कलश सुबह 9:30 से 11 के बीच अभिजित मुहूर्त में स्थापित किया जा सकता है।वर्तमान समय में राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए इस बार गुप्त नवरात्र अनुष्ठान अधिक होने की संभावना है। कई जनप्रतिनिधि मंत्री बनने की चाह रखने अपने-अपने घरों में यज्ञ विधान कराएंगे। वैसे अनलॉक-1 में इन अनुष्ठानों के लिए वातावरण भी उनके अनुकूल बना है। ऐसे माहौल में की गई भक्ति-आराधना उपासकों को सिद्धि प्राप्त कराने में सहायक है।

गुप्त नवरात्र में घट स्थापना कर कलश में ही सभी शक्तियों का आवाहन किया जाता है। इस आवाह्न पूजन में सिद्ध मंत्र जाप व कार्य के अनुसार जड़ी-बूटियों से हवन करने का महत्व है। सभी प्रकार की पुष्टता के लिए हमारे शास्त्रों में जड़ी-बूटियों से यज्ञादि करने का विधान बताया है।इन यज्ञों से वायु मंडल में व्याप्त कीटाणु-विषाणु नष्ट हो जाते हैं। श्रद्धालु अपने घर में रहकर गुप्त साधना कर नौ देवियों की कृपा पा सकते हैं।गुप्त नवरात्र में मानसिक पूजा की जाती है। माता की आराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है। गुप्त नवरात्र में माता की पूजा देर रात ही की जाती है। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए भक्त को प्रतिपदा के दिन घट स्थापना करना चाहिए। भक्त को सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करना चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।गुप्त नवरात्र विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।यह नवरात्र तंत्र साधना, जादू-टोना, वशीकरण आदि चीज़ों के लिए विशेष महत्व रखता है। गुप्त नवरात्रिके नौ दिनों तक साधक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या करते हैं। खासकर निशा पूजा की रात्रि में तंत्र सिद्धि की जाती है। इस भक्ति और सेवा से मां प्रसन्न होकर साधकों को दुर्लभ और अतुल्य शक्ति देती हैं। साथ ही सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं। PLC.

 
 

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