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Friday, October 30th, 2020

गांव लौटे मजदूर अब शहर आने को मजबूर - जीवन पर भारी आजीविका

लॉकडाउन में दो टाइम का खाना तो क्या बच्चों को दूध भी नसीब नहीं हुअा। ऐसे में 12 लाख से ज्यादा श्रमिक सूरत से पलायन कर गए। इनमें से सैकड़ों तो मीलों का सफर पैदल तय कर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक पहुंच गए। लेकिन, मजदूर तो मजबूर है।

वहां भी कोरोना के डर और जीवन की चिंता पर पेट की भूख भारी पड़ने लगी। मजबूरन फिर रुख किया गुजरात का। लेकिन, न तो ट्रेनें चल रही हैं और न जेब में पैसा बचा है। थक हारकर घर का सामान गिरवी रखकर बसों में लौट रहे हैं। झारखंड, ओडिशा अौर यूपी-बिहार से रोजाना 150 से ज्यादा बसें सूरत पहुंच रही हैं।

एक आदमी का किराया 8 हजार रुपए के ऊपर वसूला जा रहा है। एक-एक मजदूर परिवार 20-20 हजार रुपए खर्च कर रोजी रोटी पर लौट रहा है। 50 सीट की एक-एक बस में 80-80 लोग भरकर आ रहे हैं। हालांकि कारखानों और मिल मालिकों ने आश्वासन दिया है कि खर्चा दे देंगे, लेकिन वो बस उम्मीद भर है।

हालात इसलिए ज्यादा खराब हैं कि झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से सूरत के लिए एक भी ट्रेन नहीं चल रही है। ओवरलोड बसें रास्ते में हांफ रही हैं। 24 अगस्त को झारखंड के गिरिडीह से 75 श्रमिकों को लेकर निकली बस अब तक सूरत नहीं पहुंची। रास्ते में टायर फटने से उसका एक्सीडेंट हो गया था।

मजदूर खुद ही गुजरात के निजी ट्रवेल्स एजेंसियों से बात कर बसों को सूरत से झारखंड बुला रहे हैं। फिर चार लाख से ज्यादा की लागत में बसों की बुकिंग कर सूरत पहुंच रहे हैं। इन बसों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ रही हैं। बसों की क्षमता के मुकाबले दोगुना यात्री बैठकर आ रहे हैं। नतीजा ये है कि सूरत तक आने में बसें दुर्घटना का भी शिकार हो रही हैं।

झारखंड से 40 सीटों की बस में बैठे थे 72 यात्री 24 अगस्त को झारखंड के गिरिडीह से 72 यात्रियों को लेकर सूरत के लिए रवाना हुई बस शुक्रवार सुबह सूरत पहुंची। प्रत्येक यात्री का इस बस में 6000 से 7000 रुपए किराया लिया। बस की क्षमता लगभग 40 सीट की है। इसमें 72 यात्री सवार हुए थे।

बस मध्य प्रदेश में भारी दुर्घटना होने से बची, क्योंकि इसके पिछले दो टायर फट गए, जिससे बस अनियंत्रित होने लगी थी। ड्राइवर की सूझबूझ से हादसा टला। इसके बाद 8 घंटे यह बस रस्ते में रुकी रही। इसके पीछे गिरिडीह से सूरत आ रही एक और बस की दुर्घटना हुई। इसमें लगभग 65 यात्री सवार थे। हालांकि इसमें जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

यूपी के हाल: 50 सीटों पर आ रहे 95 यात्री जहां एक तरफ झारखंड, छत्तीसगढ़ के लोग ट्रेन नहीं होने से परेशान हैं, वहीं बिहार से होकर यूपी से सूरत के लिए तीन ट्रेनें हैं। लेकिन सितंबर तक ट्रेनों में नो रूम है। यानी ट्रेनें सूरत आने के लिए रिग्रेट हैं। इससे समस्या दोगुनी बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से सूरत के लिए रोजाना बस निकल रही है। इन बसों की हालत इतनी खराब है कि 50 सीटों पर 95 लोगों को भर भरकर लाया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति से 6000 रुपए किराया लिया जा रहा है। बिहार से आ रही बसों के भी यही हाल हैं। वहां से भी रोजाना बसें सूरत आ रही हैं।

रोज 40 से ज्यादा बसें केवल झारखंड से आ रहीं

समस्त झारखंड समाज सेवा ट्रस्ट के महासचिव वासुदेव महतो ने बताया कि झारखंड से एक भी ट्रेन नहीं होने से बहुत ही बड़ी समस्या से गुजरना पड़ रहा है। मैं खुद अपने परिवार के साथ बस से आ रहा हूं। झारखंड के गिरिडीह, कोडरमा, बोकारो और धनबाद से लगभग 40 बसें लोड हो रही हैं। जो श्रमिक मई में अपने गांव आ गए थे, वे यहां बसों की अनुपलब्धता होने से गुजरात की ट्रेवेल्स एजेंसियों से बात करके यहां बसों को बुला रहे हैं। फिर सूरत के लिए रवाना हो रहे हैं। यहां जिन मिलों या फैक्ट्रियों में श्रमिक काम करते थे उन्हें अब फोन आ रहे हैं कि काम शुरू हो चुका है। जैसे तैसे किराया लगाकर आ जाओ। यहां आ जाने के बाद पैसे दे दिए जाएंगे। इसके बाद यहां से लोग अपना सामान बेचकर पैसे का प्रबंध कर रहे हैं और फिर रवाना हो रहे हैं। PLC.
 

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