Wednesday, December 11th, 2019

खुफिया एजेंसियों और पंजाब सरकार का दबाव बेअसर 

पंजाब सरकार की ओर से गूगल प्ले स्टोर पर भारत विरोधी ऐप 2020 सिख रेफरेंडम लांच किए जाने पर आपत्ति जताए जाने के दो दिन बाद भी गूगल ने इस ऐप को नहीं हटाया है। राज्य सरकार द्वारा इस ऐप को हटाने को लेकर केंद्र सरकार से भी अपील की गई थी, जिसपर फिलहाल केंद्र की तरफ से कोई कार्रवाई किए जाने के संकेत नहीं मिले हैं। इसके अलावा पंजाब सरकार की ओर से भी गूगल से संपर्क किया गया है लेकिन सोमवार को भी प्ले स्टोर से यह ऐप आसानी से डाउनलोड होता रहा।
इस बीच, राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने इस ऐप पर नजर रखनी शुरू कर दी है, हालांकि यह ऐप अपने सदस्य बनने वाले लोगों से उनका व्हाट्सअप नंबर मांगता है और सभी तरह की सामग्री व्हाट्सअप पर ही अपडेट कर रहा है। उधर, राज्य पुलिस के खुफिया विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के विभिन्न साइट्स के मुकाबले व्हाट्सअप की सामग्री पर सीधे नजर रख पाना संभव नहीं है। यह ऐप किस नंबर पर डाउनलोड हुआ है, उसका पता लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर खुलने के ऐन मौके पर गूगल द्वारा इस ऐप की अनुमति दिए जाने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की मंशा पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि ऐसे मौके पर जब सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में श्री दरबार साहिब के दर्शनों के लिए जा रहे हैं, पाकिस्तान में छिपे सिख अलगाववादी इस ऐप के जरिए अपने खालिस्तान के एजेंडे को हवा देने की कोशिश में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि अलगाववादियों को इस साजिश के लिए आईएसआई की मदद मिल रही है।
रेफरेंडम के लिए ऐप पर सदस्यता की मुहिम जारी
2020 सिख रेफरेंडम नामक ऐप के पहले पेज पर जरनैल सिंह भिंडरावाला की तस्वीर लगाई गई है। पहले पेज पर सदस्यता पंजीकरण के तहत यह पूछा जाता है कि ऐप डाउनलोड करने वाला किस देश से संबंधित है। इसमें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, मलेशिया, नार्वे, आस्ट्रिया, डेनमार्क, मैक्सिको, बेल्जियम, फ्रांस, नीदरलैंड, इंडोनेशिया, जर्मनी, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मारिशस समेत 26 विकल्प दिए गए हैं लेकिन भारत की बजाए सिर्फ पंजाब का आप्शन दिया गया है।

दूसरे पेज पर सीधे तौर पर पंजाब की स्वतंत्रता के रेफरेंडम में शामिल होने का आह्वान करते हुए पूरा नाम, ईमेल और व्हाट्सअप नंबर भरने को कहा जाता है। इसके साथ ही सदस्यता की प्रक्रिया पूरी होती है, लेकिन ऐप में यह चेतावनी भी दी गई है कि ऐप की सदस्यता लेने वाले यह अंडरटेकिंग दें कि वे रॉ, आईबी, सीबीआई, एनआईए या भारत की किसी अन्य खुफिया एजेंसी के सदस्य नहीं हैं। PLC.

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