खबर की हकीकत का सामना और एक पत्रकार का दर्द

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 Abdul kabij khan,1{अब्दुल काबिज खान * }

कोई IAS, तो कोई IPS अधिकारी बनने का सपना देखता है मगर मैं बचपन में पत्रकार बनने का सपना देखा करता था। आज मैं पत्रकार हूं और मुझे एक खोजी पत्रकार होने का गर्व हे लेकिन आज पूरे भारत में वर्तमान में बाल योन शोषण में घट रही घटनाओ में  मे आप से एक पत्रकार का दर्द बया करना चाहता हूँ!
अंकल ये क्या हो रहा हे ये इतनी सारी मोमबत्तिया क्यों जल रही हे एक मासूम सी बच्ची   के इस सवाल का मे बीती शाम कोई जवाब नहीं दे पाया हर घटना दुर्घटना में दूसरो से सवाल की बोछार  करने वाला मै पत्रकार आज एक मासूम बच्ची के आसान  से सवाल का जवाब नहीं दे  पाया पिछले छ दिनों से जिस खबर पर मेरे पास पल पल की सेकड़ो  जानकारिया  थी जिसे मेने अपने न्यूज़ चॅनल के माध्यम से लोगो को पल पल की खबर से रूबरू  कराया आज में एक मासूम सी बच्ची  के एक आसान  से सवाल का सही जवाब नहीं दे पाया की  ये हजारो मोमबत्तिया क्यों जल रही हे और किसके लिए यही सवाल अगर कोई किशोर या नवजवान पूछता तो मे उसे बेहतर तरीके से समझा सकता था की ये मोमबत्तिया उस मासूम 4 साल की बच्ची की सेहत की दुआ और प्रथना की जल रही हें जिसकी सेहत की फ़िक्र आज पूरा देश कर रहा हे जो नागपुर के केयर हॉस्पिटल में अपनी जिंदगी और मोत  से जूझ रही हे जिसके दर्द को आज हर इंसान अपने दर्द से जोड़ के देख रहा हे जिसकी एक एक सासों के लिए परवर दिगार के सामने लाखो हाथ  दुआ के लिए उठ रहे हे  मनदिरो में पूजा और गिरजाघरो में प्रथनाय चल रही हे क्योकि उसके साथ एक हेवान  ने इंसानियत के रिश्ते को तार तार करने वाला कृत्य किया हे! हां एक फ़िरोज़ नामक शेतान ने उस 4 साल की गुडिया  के साथ बलात्कार किया हे और उस गुडिया के  लिए ही सिवनी के हजारो गमजदा लोगो ने हजारो मोमबत्तिया जलाई हे!  लेकिन  मे उस मासूम को ये केसे समझाता जिसने मुझसे ये सवाल किया की अंकल ये क्या हो रहा हे ये इतनी सारी मोमबत्तिया क्यों जल रही हे क्योकि वो पाच या छ साल की बच्ची क्या जानती की शेतन क्या होता हे बलात्कार क्या होता उस मासूम के सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं था और  जवाब था भी तो मेरे पास इतनी हिम्मत नहीं थी की में उसे बता पता की ये सब क्या हो रहा हे और क्यों हो रहा हे आज छ दिनों से लगातार मे  घन्सोर की खबर को कवरेज  कर रहा हूँ पल पल की उपडेट मेरे पास पहुच रही हे और मे दुनिया को बता रहा हूँ सभी की तरह मेरे अन्दर भी इस घटना को अंजाम देने वाले शेतान के लिए गुस्सा हे पर इस पूरे घटना चक्र में सबसे ज्यादा तकलीफ मुझे आज हुई सही मायने में देखा जाय तो आज इस छोटी सी मासूम के एक मामूली से सवाल से मेरी रूह तक काप गयी इस खबर की हकीकत का सामना आज मुझे एक आसान से सवाल ने कराया हे !मे उस मासूम  के सवाल का  क्या जवाब देता जो खुद  अपने आप से सेकड़ो सवाल कर रहा था और उन सवालों में सेकड़ो नए सवाल पैदा हो रहे थे मेने मुस्कुराकर उसके तरफ देखा एक मोमबत्ती जलाई और उसके हातों से सिवनी के शुक्रवारी बाज़ार के जय स्थम्भ में लगा दी जहा  हजारो मोमबत्ती जल रही थी और सामने ही सभी धर्मो के धर्मगुरू और सिवनी के गमजदा स्त्री पुरुष युवक युवती घन्सोर की बलात्कार पीढित गुडिया के लिए प्रथना सभाय कर रहे थे! मुझ से वहा रहा नहीं गया और मेरी हिम्मत भी जवाब दे रही थी मे वहा से हट गया अभी तक मे उसके सवाल का जवाब नहीं ढून्ढ पाया मुझे उस मासूम को जवाब देना हे वो फिर मुझसे मिलेगी और वही सवाल दोहरायगी और  मे उसका सामना नहीं कर पाउँगा मुझे आपकी मददत चाइये आप मेरी मददत करो और आपको करना ही पड़ेगा  !आज सिर्फ मासूम ने एक सवाल किया हे अगर आज ही जवाब दे देंगे तो ठीक हे वर्ना कही देर होगई तो सेकड़ो सवाल तैयार हो जायंगे   अब मे आप से पूछता हूँ की आप मेरी जगह होते तो उस मासूम को क्या जवाब देते ? सिवनी से एक पत्रकार का दर्द भरा सवाल

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Abdul kabij khan
लेखक :-
अब्दुल काबिज़ खान *
वरिष्ठ पत्रकार है

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