Saturday, February 22nd, 2020

खत्म हों नेताओं का उप्कृत करने वाले यह कानून

Author Tanveer Jafri, defence, Delhi, India, internationalnewsandviews.com, invc, minister, MP, tanveer jafri, Tanveer Jafri Archives . Articles, tanveer jafri columinst, Tanveer Jafri columnis, Tanveer Jafri Columnist, Tanveer Jafri columnist in India, Tanveer Jafri Former Member of Haryana Sahitya Academy, Tanveer Jafri India, tanveer jafri writer, Tanveer Jafri writer & columnist based in Haryana, Tanveer Jafri वरिष्ठ पत्रकार ,समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव,नरेंद्र मोदी,भारतीय जनता पार्टी, प्रधानमंत्री का पद,{ तनवीर जाफ़री } देश में भारतीय जनता पार्टी के शानदार बहुमत की सरकार बन चुकी है। चुनाव के दौरान भाजपा के चुनावी अभियान में पार्टी के पक्ष में तरह-तरह की लोकलुभावनी बातें बढ़ा-चढ़ा कर की गईं। जिनमें मुख्य रूप से जनता को यह समझाने की कोशिश की गई कि पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी की एक लहर चल रही है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मोदी लहर का नाम भी दे रहे थे। और जो अत्यधिक उत्साही नेता थे यहां तक कि स्वयं नरेंद्र मोदी भी कई बार यह कहते सुने गए कि यह लहर नहीं बल्कि ‘सुनामी’ है। परंतु भाजपा द्वारा मतदाताओं के मध्य चुनाव अभियान में बनाए जा रहे इस वातावरण या यूं कहें कि सुनामी रूपी वातावरण के बीच बार-बार भाजपा विरोधियों द्वारा यह सवाल पूछा जा रहा था कि जब यह भाजपा की लहर अथवा सुनामी है फिर आ$िखर स्वयं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी देश में दो अलग-अलग  लोकसभा सीटों से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं? हालांकि वे $कायदे-$कानून व चुनाव आयोग के नियमों के अंतर्गत ही ऐसा कर रहे थे। परंतु उनके दो जगहों से चुनाव लडऩे से जनता को क्या लाभ? जबकि इस नियम में उनका अपना हित बिल्कुल सा$फ दिखाई दे रहा था। और वह यह कि उन्होंने एक जगह से चुनाव लडक़र चुनाव में पराजित होने का ज़ोखिम उठाना गवारा नहीं किया। यह और बात है कि वे दोनों ही सीटों से चुनाव जीत गए। उन्होंने अब वाराणसी की सीट को रखकर वड़ोदरा की सीट छोड़ दी है और अब उस रिक्त की गई सीट पर उपचुनाव होगा। सरकार के करोड़ों रुपये एक बार फिर $खर्च होंगे। हज़ारों सरकारी कर्मचारियों तथा विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ताओं का बहुमूल्य समय इस चुनाव में बरबाद होगा। परंतु यह सब कुछ नियम,$कायदे व $कानून के अंतर्गत ही होगा। आ$िखर ज़रूरत क्या है ऐसे $कानून की और कौन सा देशहित या जनहित छिपा हुआ है इस $कानून के पीछे?
प्राय: लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि रजनेताओं $खासतौर पर चतुर नेताअेां ने संविधान के निर्माण में अपने हितों का भरपूर ध्यान रखा है। यह कैसी विडंबना है कि यदि केंद्रीय लोकसेवा आयोग की परीक्षा में बैठने वाला एक मेधावी छात्र परीक्षा में प्रवेश की परीक्षा अथवा मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार इन तीनों में किसी भी एक परीक्षा में असफल हो जाता है तो उसे अगले वर्ष की परीक्षा की तैयारी पुन:प्रवेश परीक्षा के स्तर से ही करनी पड़ती है। परंतु तथाकथित देश सेवा की आड़ में नेता के लिए $कानून में इतने अवसर प्रदान किए गए हैं कि भले ही देश की जनता व मतदाता उस नेता को ‘सेवा’ के लाय$क न समझते हुए उसे चुनाव में पराजित कर देते हों उसके बावजूद भी वह नेता आपकी सेवा ज़रूर करेगा। सि$र्फ इसलिए कि जनता उसको इजाज़त दे रही हो या नहीं परंतु आ$िखरकार $कानून तो इसकी इज़ाजत दे ही रहा है। जनता ने उसे एक जगह से चुनाव हरा भी दिया तो क्या वह नेता दूसरी जगह से तो चुनाव जीत ही गया है। और यदि दोनों जगह से चुनाव हार गया तो $कानून उसे राज्यसभा या विधानसभा या विधानपरिषद जैसे सदनों का सदस्य बनाने की इजाज़त तो दे ही रहा है। और तो और हमारे $कानून ने इन राष्ट्रहितैषियों को इतना अवसर प्रदान किया है कि भले ही कोई व्यक्ति लोकसभा,राज्यसभा,विधानसभा अथवा विधानपरिषद का सदस्य हो या न हो परंतु यदि पार्टी में आलाकमान की उस पर नज़र-ए-कर्म है या वह नेता स्वयं अपनी पार्टी का आलाकमान है अथवा पार्टी द्वारा उसे उप्कृत करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है तो वह व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने हुए भी निर्धारित समय तक मंत्री,मुख्यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री कुछ भी बन सकता है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी स्वयं को उत्तर प्रदेश के एकछत्र नेता समझने की $‘खुश$फहमी’ के बावजूद पिछले दिनों प्रदेश की दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़े। वह भी दोनों सीटों पर विजयी हो चुके हैं। ज़ाहिर है अब उनके द्वारा छोड़ी गई मैनपुरी सीट पर भी पुन: चुनाव होंगे। और वहां भी करोड़ों रुपये की जनता की $खून-पसीने की कमाई केवल मुलायम सिंह यादव जैसे नेता को लोकसभा में पहुंचाने की चेष्टा अथवा $कानूनी दांव-पेच के चलते बरबाद की जाएगी। आ$िखर क्यों? गुजरात में मोदी सहित 9 विधायकों तथा देश के और भी कई राज्यों में कर्ई विधायकों द्वारा लोकसभा के चुनाव लड़े गए। इनमें जो नेता लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं उन्हें विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देना पड़ा। इन सब के द्वारा छोड़ी गई सीटों पर भी उपचुनाव होंगे। और जनता का पैसा वहां भी बरबाद ही होगा। एक सदन का जो व्यक्ति पहले से ही सदस्य हो उसके किसी अन्य सदन के लिए चुनाव लडऩे की तब तक ज़रूरत ही क्या है जब तक कि उसके अपने सदन की सदस्यता की अवधि समाप्त न हो जाए? इतना ही नहीं बल्कि हमारे नियम व $कायदे-$कानून तथा नेताओं को उप्कृत करने के ऐसे-ऐसे तरी$के हैं जिनमें सिवाए राजनेताओं के अपने कल्याण व सरकारी सुविधा भोगने के उनके इरादों के सिवा नैतिकता नाम की कोई चीज़ दिखाई ही नहीं देती। मिसाल के तौर पर जो व्यक्ति चुनाव हार जाता है पार्टी का आलाकमान ऐसे व्यक्ति को कभी मंंत्री बना देती है कभी राज्यपाल नियुक्त कर देता है तो कभी राजदूत बनाकर विदेश की सैर करने का अवसर मुहैया करा देती है। कभी किसी बोर्ड का चेयरमैन अथवा निगम प्रमुख आदि जैसे सरकारी पद से उसे नवाज़ दिया जाता है। ज़रा सोचिए कि जिस नेता को मतदाताओं ने $खारिज कर दिया हो उसे पिछले दरवाज़े से उप्कृत करने या उसे लाभ पहुंचाने की ज़रूरत ही क्या है? इसमें नैतिकता का कोई पहलू नज़र नहीं आता सिवाए इसके कि यह $कदम मात्र नेताओं के कल्याण के लिए तथा उनके $फायदे व सुविधा आदि के मद्देनज़र उठाया जाने वाला $कदम है।
यह तो भला हो चुनाव आयोग द्वारा गत् दो दशकों से किए जा रहे उन प्रयासों का जिसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण संशोधन आयोग द्वारा किए जा चुके हैं। और अब भी धीरे-धीरे किए जा रहे हैं। और इसी संशोधन की ही देन है कि आज नेता मात्र दो सीटों से ही चुनाव लड़ सकते हैं। अन्यथा पहले तो यह नेता जितनी भी सीटों से चाहें उतनी सीटों से एक साथ चुनाव लड़ सकते थे। परंतु आयोग ने उस $कानून को $खत्म कर अब मात्र दो सीटों से चुनाव लडऩे की अनुमति दे रखी है। जबकि नैतिक रूप से तो यह भी $गलत है। इंदिरा गांधी,सोनिया गांधी,मुलायम सिंह यादव,लालू प्रसाद यादव से लेकर नरेंद्र मोदी तक कई राष्ट्रीयस्तर के नेता दो सीटों से एक साथ चुनाव लडक़र अपने पराजित होने के $खतरे को कम करते देखे गए हैं। चुनाव आयोग को अत्यंत निष्पक्ष सोच रखते हुए राष्ट्रहित व जनहित को ध्यान में रखते हुए तथा जनता की $खून-पसीने की गाढ़ी कमाई का आदर करते हुए और जनादेश का पूरा सम्मान करते हुए ऐसे $कानून बनाने चाहिए जो नेताओं के अहंकार का संरक्षण व उनके उपकारों की पूर्ति न करते हों। किसी नेता को क्या अधिकार है कि वह जनता के पैसों का दुरुपयोग करते हुए यह प्रदर्शित करे कि वह दो सीटों से चुनाव जीतने की हैसियत रखने वाला बड़ा नेता है। या फिर जनता के पैसों के बूते पर ही वह इस बात का ज़ोख्रिम नहीं उठाना चाहता कि वह किसी एक सीट से चुनाव लडक़र हार का सामना करे और सदन का मुंह देखने से रह जाए?
बहुत अच्छा लगा यह देखकर कि देश में पहली बार प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने संसद की सीढिय़ों पर घुटने टेककर सजदा किया। निश्चित रूप से यह देश की जनता की आवाज़,जनादेश तथा जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान को किया जाने वाला सजदा कहा जाएगा। परंतु ऐसा प्रदर्शन उस समय तक केवल भावनात्मक तथा दिखावापूर्ण है जबतक कि जनता के जनादेश का वास्तव में पूरी तरह से मान-सम्मान न हो तथा निर्वाचित सदन जनता की राय को देखने व समझने के बावजूद उसकी अनदेखी करे। लिहाज़ा नेताओं द्वारा उनके अपने पक्ष में बनाए गए $कानून को बदलने की उम्मीद रखने के बजाए चुनाव आयोग को ही इस विषय में अपनी पूरी सक्रियता दिखानी चाहिए। न तो किसी नेता को दो स्थानों से चुनाव लडऩे की इजाज़त होनी चाहिए न ही किसी एक सदन के लिए निर्वाचित किए गए किसी सदस्य को उस सदन की अवधि समाप्त होने तक दूसरे सदन के लिए चुनाव लडऩे की इज़ाजत होनी चाहिए। न ही जनता द्वारा नकारे गए किसी नेता को पिछले दरवाज़े से उप्कृत करने की $कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। जब जनता किसी व्यक्ति को चुनाव में पराजित करती है और वही पराजित नेता यदि राज्यपाल,राजदूत अथवा किसी ऊपरी सदन का सदस्य बनकर फिर उसी जनता की छाती पर सवार हो जाता है तो निश्चित रूप से जनता अपने आपको बहुत ठगा हुआ सा महसूस करती है। राजनेताओं को उप्कृत करने वाले ऐसे $कानून यथाशीघ्र समाप्त कर देने चाहिए। -------------------------------------------------------------------------------------------- Tanveer Jafri**Tanveer Jafri –  columnist,(About the Author) Author Tanveer Jafri, Former Member of Haryana Sahitya Academy (Shasi Parishad),is a writer & columnist based in Haryana, India.He is related with hundreds of most popular daily news papers, magazines & portals in India and abroad. Jafri, Almost writes in the field of communal harmony, world peace, anti communalism, anti terrorism, national integration, national & international politics etc. He is a devoted social activist for world peace, unity, integrity & global brotherhood. Thousands articles of the author have been published in different newspapers, websites & news-portals throughout the world. He is also a recipient of so many awards in the field of Communal Harmony & other social activities.Contact Email : tanveerjafriamb@gmail.com 1622/11, Mahavir Nagar Ambala City. 134002 Haryana phones 098962-19228 0171-2535628 *Disclaimer: The views expressed by the author in this feature are entirely his own and do not necessarily reflect the views of INVC.

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