Thursday, February 27th, 2020

कोर्ट-मार्शल रद्द, तीन माह में समस्त-अनुलाभो सहित सिपाही की हो बहाली : सेना कोर्ट

invc newsआई एन वी सी न्यूज़ लखनऊ ,

सेना कोर्ट, लखनऊ के माननीय न्यायमूर्ति देवीप्रसाद सिंह एवं माननीय एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खण्ड-पीठ ने  सिपाही जितेन्द्र कुमार बनाम भारत सरकार एवं अन्य, ओ.ए.नं.102/2012, में कोर्ट मार्शल की कार्यवाही को निरस्त करते हुए सरकार को आदेशित किया कि सैनिक को समस्त लाभ देते हुए तीन महीने के अन्दर सेना में पुनः रखा जाय. प्रकरण यह था कि सिपाही जितेन्द्र 25 जनवरी 2007 को सेना भर्ती हुआ और वर्ष 2010 में वह जम्मू-कश्मीर की “साकरी-पोस्ट” पर तैनात था, 3 जून 2010 को उसका नायक जय प्रकाश से विवाद हुआ जिसके चलते 4 जून 2010 को सुबह 4:30 पर नायक जय प्रकाश ने आरोपी पर मशीनगन से तीन फायर किया, तीसरा फायर आरोपी के कंधे में लगा, आरोपी ने इसकी सूचना  अपने कमांडिंग आफिसर को दी और,  4 जून को ही मामले के जांच के लिए “कोर्ट-ऑफ़-इन्क्वायरी” का आदेश दे दिया 10 दिसम्बर को “समरी-ऑफ़-एविडेंस” की कार्यवाही करके दिनाक 6 अगस्त 2011 को चार्ज-शीट में आरोप यह तय कर दिया गया कि आरोपी ने नायक जयप्रकाश को फंसाने के लिए खुद ही स्वयम पर गोली चलायी है लिहाजा उसके विरुद्ध आर्मी एक्ट की धारा-63 के तहत “कोर्ट-मार्शल” की कार्यवाही की जाएगी फलतः उसका कोर्ट मार्शल करके दिनाक 18 अगस्त 2011 को सेना से बर्खास्त कर दिया गया, आरोपी ने थल-सेनाध्यक्ष के सामने अपील की लेकिन उसे भी ख़ारिज कर दिया गया तत्पश्चात वर्ष 2012 में  ए.ऍफ़.टी लखनऊ में उसने मुकदमा दायर किया और कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही को चुनौती जिसकी सुनवाई आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल द्वारा प्रारम्भ की गयी.

मुकदमें में उसने कहा कि मुझे उलटे केश में फंसाया गया, मैंने प्रथम-सूचना रिपोर्ट आई.पी.सी.की धारा-307 में नायक जयप्रकाश के विरुद्ध दर्ज करायी थी लेकिन, मुझे खुद पर गोली चलाने के अपराध में कोर्ट मार्शल ने बर्खास्तगी की सजा सुनाई जो कि गलत है, उसने यह भी दलील दी की मशीनगन से कोई सैनिक अपने कंधे पर कैसे गोली चला लेगा? खण्ड-पीठ ने भारत सरकार से पूंछा कि ‘बंकर’ की लम्बाई-चौडाई के बारे में कोर्ट को बताईए, सरकार इसको नहीं बता पाई, कोर्ट ने सरकार से कहा कि प्रयुक्त मशीनगन कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जाय, इस पर सरकार ने जवाब दिया कि आर्मी एक्ट की धारा-151 के तहत हमे यह अधिकार प्राप्त है की ऐसे हथियारों को हम सुरक्षित न रखे, इस पर खण्ड-पीठ ने कठोर रुख अपनाते हुए थल-सेनाध्यक्ष को दिनांक 21 सितम्बर 2016 को आदेशित किया कि अपील लगातार की गयी कोर्ट की कार्यवाही है और सर्वोच-अदालत तक इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाय और आप तुरन उचित आदेश, सर्कुलर या निर्देश जारी करें जिससे भविष्य में धारा-151 का दुरूपयोग न हो, खंड-पीठ ने सरकार से पूंछा कि परिस्थितिजन्य-साक्ष्य पर निर्भर इस केश में इतनी असावधानी क्यों बरती गयी? यह एक गम्भीर विषय है क्योंकि; मेडिकल आफिसर ने बयान में स्पस्तः बल देकर कहा है कि आरोपी के घाव पर न ही किसी प्रकार के जलने के निशान थे और न ही अन्य कोई घाव था, भारत सरकार इसका जवाब  नहीं दे पाई, खण्ड-पीठ ने कहा कि ‘मोदी लिखित मेडिकल ज्युरिस्प्रूडेंस’ आरोपी के केश का समर्थन करता है जिससे सिद्ध होता है कि सरकार द्वारा आरोपी को बेनुनियाद आरोप में फंसाया गया है और कोर्ट ने कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही को दरकिनार करते हुए सिपाही जीतेन्द्र कुमार को समस्त लाभों के साथ सेना की नौकरी में बहाल किये जाने का आदेश पारित कर दिया.

ए.ऍफ़.टी. बार के जनरल सेक्रेटरी विजय कुमार पाण्डेय ने पत्रकारों को बताया कि निर्णय की कापी बार को प्राप्त हो गयी है, निर्णय दूरगामी प्रभाव डालने वाला है जहा एक तरफ सेना अपने नियमों में परिवर्तन लाने को बाध्य होगी वही दूसरी तरफ बदलते सामाजिक-संदर्भो में यह निर्णय  पीड़ित सैन्य-कर्मियों को दूरगामी परिणाम प्रक्षेपित करेगा जिससे भविष्य में अन्य लोग इस निर्णय का लाभ उठाने में सफल होंगे, उन्होंने उपस्थित  मीडियाकर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि इस चतुर्थ स्तम्भ का महत्वा उतना ही बढ़ता जायेगा जितनी हमारी लोकतान्त्रिक-संस्थाए मजबूत होगी.

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