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Wednesday, September 23rd, 2020

कोरोना वैक्सीन के ‎लिए अरबों की डील

लंदन । जानलेवा कोरोना वायरस से निपटने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका जैसे अमीर देशों ने संभावित वैक्सीनों की अरबों खुराकों के लिए पहले ही इनकी निर्माता कंपनियों से अरबों डॉलर की डील कर ली है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अमीर देशों ने पहले से डील कर ली हो, वैक्सीन विकसित होने से सप्लाई होने के बीच कई ऐसी बातें होती हैं, जिनकी वजह से इन देशों को झटका लग सकता है। सभी वैक्सीनें अभी अपने निर्णायक नतीजों का इंतजार कर रही हैं। ऑक्सफर्ड, मॉडर्ना या चीनी सेना की वैक्सीनें भले ही शुरुआती नतीजों में असरदार दिख रही हों, एक बड़ी संख्या में टेस्ट किए जाने के बाद ही इस बात का भरोसा किया जा सकता है कि ये लोगों को दी जा सकती हैं। इसके बावजूद अमेरिका और ब्रिटेन ने सानोफी और ग्लेक्सो स्मीथक्लाइन पीएलसी से सप्लाई की डील की है। वहीं, जापान और पफीजर आईएनसी ने भी वैक्सीन की डील की है। यूरोपियन यूनियन भी इस कोशिश में है कि जल्द से जल्द खुराकें हासिल की जा सकें।
दुनियाभर की सरकारें और वैक्सीन विकसित करने वाले संस्थान इस बात का दावा तो कर रहे हैं कि इन्हें दुनिया के हर इंसान तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा लेकिन ऐसा होना मुश्किल लग रहा है। 2009 में स्वाइन फ्लू के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। लंदन की अनैलेटिक्स फर्म एयरफीनीटी के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और जापान ने अब तक संभावित वैक्सीनों की 1.3 अरब खुराकों की डील कर ली है। अभी करीब 1.5 अरब खुराकों की डील किया जाना बाकी है।एयरफीनीटी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर रेसमस बेक हैन्सन का कहना है कि भले ही वैज्ञानिक सफलता के प्रति आप उम्मीद रख रहे हों, फिर भी दुनियाभर के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं है।
अभी आखिरी चरण के ट्रायल के नतीजे, मंजूरी मिलने और फिर उत्पादन का स्तर और गति तेज करने जैसे काम भी बाकी होंगे। उन्होंने एक खास बात यह बताई है कि ज्यादार वैक्सीनों की दो खुराकों की जरूरत पड़ सकती है। ब्राजीलl ने आस्ट्राजेनेका के साथ डील की है। ट्रंप प्रशासन ने सानोफी  और ग्लाक्सो को 2.1 अरब डॉलर निवेश का भरोसा दिया है जिससे अमेरिका को 10 करोड़ खुराकें मिलेंगी जबकि 50 करोड़ और खुराकों का विकल्प खुला रखा गया है। यूरोपियन यूनियन सानोफी- ग्लाक्सो के साथ 30 करोड़ खुराकों की डील कर रहा है और दूसरी कंपनियों के साथ भी चर्चा में है। हालांकि, ईयू का कहना है कि वह जो वैक्सीन लेगा वे पूरी दुनिया के लिए होंगी। चीन ने देश में विकसित होने वाली किसी भी वैक्सीन को वैश्विक स्तर पर बांटने का ऐलान किया है। 'एयरफीनीटी के मुताबिक 2022 की पहली तिमाही तक दुनियाभर में 1 अरब खुराकें बन पाना मुश्किल है। उत्पादन के लिए निवेश की इसमें एक अहम भूमिका है।
सानोफी और ग्लाक्सो 2021 और 2022 में बड़ी मात्रा में दुनियाभर में खुराकें उपलब्ध कराने की कोशिश में है। इसके लिए वैक्सीन के विकास के बाद उत्पादन और फिर आपूर्ति के प्लान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वहीं, डब्ल्यूएचओ कई एजेंसियों के साथ मिलकर बराबर तरीके से ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए 18 बिलियन डॉल्र का प्लान भी बनाया गया है जिसके तहत 2021 के अंत तक 2 बिलियन खुराकें बनने का लक्ष्य तय किया गया है। गावी- द वैक्सीन अलायंस के सीईओ सेथ बर्कली का कहना है कि जरूरी नहीं है जिन कंपनियों की वैक्सीनों पर इन देशों ने डील की हैं, वे सफल हों। ऐसे में उन्होंने कई तरह के समझौते करने होंगे। हो सकता है कि इसकी वजह से नीलामी जैसी नौबत आ जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कई सारे समझौतों के जाल की जगह बहुत सी वैक्सीनें विकसित हों और सभी देश इन पर साथ काम करें। डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर गावी मुहिम चला रहा है, कोवेक्स जिसके तहत दुनिया के छोटे-बड़े देश साथ आ रहे हैं और वैक्सीन की उपलब्धि को लेकर काम कर रहे हैं। बता दें ‎कि वैक्सीन की खोज में दुनिया के बड़े-बड़े देश और मेडिकल रिसर्च संस्थान लगे हुए हैं। कई देशों की वैक्सीन इस रेस में आगे भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में इन्हें पाने की होड़ भी शुरू हो गई है। पीएलसी।PLC.

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