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Friday, October 30th, 2020

कोरोना महामारी : कफ़न के लिए लगी लाइने 

कोरोना महामारी में उद्योग-धंधों की भले ही कमर टूट गई हो, लेकिन कफन की बिक्री में तेजी है, हालांकि यह तेजी कोई नहीं चाहता है। सूरत की सबसे बड़ी कफन कमेटी ने बताया कि यहां हर महीने औसत 45 से 50 कफन की मांग रहती है, लेकिन कोरोना काल में 26 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन में यह आंकड़ा 500 तक पहुंच गया है।

इसमें जिले का आंकड़ा जोड़ा जाए तो यह संख्या 1000 से ज्यादा है। कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि 40 साल में कफन के लिए कभी लाइन लगते हुए नहीं देखी, लेकिन कोरोना के दौरान ऐसा हुआ है। सूरत में हरिपुरा स्थित सबसे पुरानी कफन कमेटी शहर और जिले में कफन उपलब्ध कराती है। यह कमेटी एकता ट्रस्ट को भी पिछले 25 साल से निशुल्क कफन देती है। गरीब और लावारिश शव के लिए निशुल्क कफन दिए जाते है।

कफन कमेटी की शहर और जिले में 10 से ज्यादा उप कमेटी हैं। कमेटी के प्रमुख जुनेद नानाबाबा ने बताया कि कोरोना काल में बड़े पैमाने पर कफन दिए। विशेषकर 26 जून से 10 अगस्त के दौरान तो केवल कोट विस्तार में ही 300 से अधिक दिए थे। पूरे शहर का यह आंकड़ा 500 कफन से ज्यादा का है।

सूरत में कफन कर्नाटक के इरोट से आता है

कफन 5 मीटर का होता है। इसके साथ दफनविधि में माजरपाट (शव को नहलाना) महिला हो तो सीनाबन, दुपट्‌टा, कपूर, अबील, संदल, अगरबत्ती, लोबान, चटाई, लकड़ी का पाट सहित अन्य वस्तुएं उपयोग की जाती हैं। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि कफन कर्नाटक के इरोट एरिया से सूरत आता है। पीएलसी।PLC.

 

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