Friday, July 3rd, 2020

कैजुअल्टी वार्ड में भर्ती कर दिया कोरोना पॉजिटिव मरीज

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बड़ी लापरवाही सामने आई है। शनिवार शाम कैजुअल्टी वार्ड में कोरोना पॉजिटिव मरीज भर्ती कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक उसे वहां एक डॉक्टर की सिफारिश पर भर्ती किया गया। बहरहाल रिपोर्ट आते ही अफरा-तफरी मच गई। बुजुर्ग के संपर्क में आए 13 रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ ही 52 चिकित्साकर्मियों को 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में मरीज भर्ती करने की व्यवस्थाएं बदल दी गई हैं। दूसरी मंजिल पर स्थित मेडिसिन विभाग को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। कैजुअल्टी वार्ड को आइसोलेट किया जा रहा है। अंदेशा जताया जा रहा है कि बुजुर्ग के संपर्क में आने वाले करीब 100 लोग संक्रमित हो सकते हैं।ट्रॉमा सेंटर में शनिवार शाम नजीराबाद निवासी बुजुर्ग को लेकर परिवारीजन आए। मरीज की सांस फूल रही थी और उसे बुखार भी था। सूत्र बताते हैं कि उसकी हालत देख यहां रेजिडेंट ने देखने से मना कर दिया। उसने फीवर क्लीनिक में ले जाने की सलाह दी। इसी बीच केजीएमयू के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने फोन करके मरीज को भर्ती करने के लिए कहा। वरिष्ठ के कहने पर मरीज को कैजुअल्टी में ले जाया गया, जहां करीब 2 घंटे बाद उसे मेडिसिन विभाग में भेज दिया गया। रविवार सुबह मरीज के सांस फूलने के साथ ही कोरोना के अन्य लक्षण भी आने लगे। इस पर मरीज को आइसोलेशन वार्ड में भेजा गया और उसकी जांच कराई गई।

एक चूक से कई की जान सांसत में
ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों को मास्क के अलावा और कोई भी व्यवस्था नहीं दी गई थी। ये कर्मचारी दो दिन से पॉजिटिव मरीज के संपर्क में थे। वे घर से लेकर अस्पताल तक घूमते रहे। ऐसे में इस बात का की भी आशंका है कि उनके परिवार और दोस्तों तक भी वायरस फैला हो। कैजुअल्टी में ड्यूटी करने वाले कई डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ हॉस्टल में भी रहते हैं। इस बात का भी डर है कि यह अपने साथ वायरस हॉस्टल तक ले गए होंगे। मरीज को भर्ती करने वाली रेजिडेंट देर शाम ट्रॉमा के अन्य रेजिडेंटों के साथ खाना भी खाया था ऐसे में दूसरे विभाग के रेजिडेंट के भी चपेट में आने की आशंका है।

मेडिसिन विभाग में आग लगने के बाद नहीं हुए मरीज भर्ती
ट्रॉमा सेंटर में आग लगने के बाद से मेडिसिन विभाग में मरीज भर्ती नहीं है। इस वजह से राहत मिल गई। मेडिसिन विभाग को सील करने के बाद कैजुअल्टी वार्ड की दो बार रसायनों से धुलाई कराई गई। इस दौरान वहां के स्टाफ को बाहर कर दिया गया था। इस दौरान मरीजों की भर्ती भी प्रभावित रही। करीब तीन घंटे तक इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ट्रॉमा में नहीं आने दिया गया उन्हें आनन-फानन में वृद्ध मानसिक रोग विभाग में बनी चाइल्ड ओपीडी में भेजा गया।

सेंट्रलाइज्ड एसी होने से अन्य मरीजों को भी खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ट्रॉमा सेंटर के मेडिसिन विभाग को सील करने के साथ ही कैजुअल्टी की धुलाई करा दी गई है लेकिन यहां भर्ती अन्य मरीजों पर भी कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा। क्योंकि ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी है। यह एसी चल भी रही है। ऐसी स्थिति में दूसरे वार्डों में भी कोरोना वायरस पहुंचने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है।

रेजिडेंट व कर्मचारियों में आक्रोश
बुजुर्ग की रिपोर्ट आने के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों में आक्रोश है। सुरक्षा का कोई उपकरण नहीं दिए जाने के साथ ही मरीज को भर्ती करने का दबाव बनाने वाले डॉक्टर को लेकर आक्रोश है। आक्रोश को देखते हुए दोपहर बाद तय हुआ कि संबंधित मरीज के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को क्वारंटीन किया जाएगा। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर में उन्हें यूज एंड थ्रो मास्क दिए गए हैं जो दो से तीन घंटे बाद खराब हो जाते हैं। वे कई बार मास्क की मांग कर चुके हैं लेकिन उनकी मांग को अनदेखी की जा रही है।

दोपहर तक नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
ट्रॉमा सूत्रों का कहना है कि मरीज की जांच रिपोर्ट देर रात ही पता चल गई थी, इसके बाद भी दोपहर बाद तक ट्रॉमा सेंटर में कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे भी कर्मचारियों में आक्रोश है। कई रेजिडेंट ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ट्रॉमा से जुड़े अधिकारियों को दी लेकिन इसके बाद भी किसी ने परवाह नहीं की।

पता कर रहे हैं कहां हुई चूक
ट्रॉमा सेंटर में किस स्तर पर चूक हुई इसकी जानकारी की जा रही। मरीज के संपर्क वालों को क्वारंटीन कराया जा रहा है। ट्रॉमा सेंटर की अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जा रहा। डॉक्टरों एवं कर्मचारियों को गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। -डॉ. सुरेश कुमार, चिकित्सा अधीक्षक ट्रॉमा

कैजुअल्टी को कराया सैनिटाइज
मेडिसिन विभाग को सील कर दिया गया है और कैजुअल्टी को सैनिटाइज करा दिया गया है। यहां काम करने वाले कर्मचारियों और रेजिडेंट डॉक्टरों को चिह्नित कर उन्हें क्वारंटीन में भेज दिया गया। ट्रॉमा में मरीजों के आने की व्यवस्था भी बदली जा रही है।PLC.

 
 

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