मुर्तज़ा किदवई 

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने गुजरात विधानसभा द्वारा पारित आतंकवादी विरोधी अधिनियम ‘गुजरात 
संगठित अपराध नियंत्रण कानून’ (गुजकोका) में तीन संशोधनों की जरूरत पर जोर देते हुए इसे राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। इसे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं को बताया कि केंद्र सरकार ने गुजकोका में तीन अहम बदलावों की जरूरत बताई है। उन्होंने बताया कि ‘गुजकोका में एक यह प्रावधान है कि पुलिस अधिकारी के सामने दिया बयान अदालत में भी स्वीकार्य होगा, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। इस अधिनियम के एक अनुच्छेद में कहा गया है कि अगर सरकारी वकील ने विरोध किया तो अदालत जमानत नहीं दे सकती, जबकि अदालत के पास जमानत देने का अधिकार होना चाहिए। इसके साथ ही सरकार ने इस अधिनियम की धारा 20(2) में भी संशोधन की जरूरत पर जोर दिया है.

उन्होंने कहा कि इन संशोधनों के बाद ही मंत्रिमंडल इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज सकता है. उनका कहना है कि इस बिल में आरोपी के साथ नाइंसाफी की संभावना ज्यादा है.

ग़ौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में भी इसी तरह का एक क़ानून पारित किया गया है,  लेकिन उसे भी अभी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है. इस बिल के ‘दुरुपयोग’ की संभावना के कारण इसका विरोध किया जा रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here