Monday, March 30th, 2020

केंद्रीय मंत्री को सोपी शिक्षा सुधार की रिपोर्ट

report-handovered-to-centraआई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली,

  • 189 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में सरकारी स्कूल के सुधार के लिए अह्म सिफारिशें की
  • 25 अक्टूबर को कैब की बैठक के दौरान रिपोर्ट पर होगी चर्चा
  • प्री-प्राईमरी कक्षाए आरंभ करने पर बल
  • पांचवी एवं आठवीं की परीक्षा पुन: आरंभ करने की वकालत
  • आठवीं तक फेल ना करने की नीति पर पुन: विचार करने के लिए कहा
  • शिक्षा पर कुल जीडीपी का न्यूनतम 6 प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश
  • एलीमैंटरी तक की शिक्षा पर अधिक खर्च किया जाये
  • अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक यूनीवर्सिटी में अलग विभाग स्थापित किया जाये
  • प्रत्येक स्कूल के लिए मुखी अनिवार्य हो
  • अध्यापकों की निरंतर भर्ती और भर्ती के मौके समय के अनुसार प्रशिक्षण अनिवार्य बनाया जाये

पंजाब के शिक्षा मंत्री डॉ दलजीत सिंह चीमा जो देश के सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए बनाई गई कैब (शिक्षा संबंधी केंद्रीय सलाहकार कमेटी)  की सब-कमेटी के चेयरपर्सन थे, ने आज कमेटी की रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावेडकर को सौंप दी। आज नई दिल्ली स्थित जावेडकर के सरकारी निवास में डॉ. चीमा ने 189 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं कमेटी के सदस्य सचिव श्री मनीष गर्ग और कमेटी के सदस्य तथा न्यूपा के उप-कुलपति जेबीजे तिलक की उपस्थित में केंद्रीय मंत्री को सौंपी। रिपोर्ट सौंपने के पश्चात जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुये कमेटी के चेयरपर्सन डॉ. चीमा ने बताया कि रिपोर्ट सौंपने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री जावेडकर से मुलाकात के दौरान रिपोर्ट में की सिफारिशों के अह्म नुक्ते भी विचार में लाये गये। उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को 25 अक्टूबर को होने वाली कैब की वार्षिक बैठक में विचारा जायेगा जिसमें देश के सभी राज्यों के स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्री शामिल होंगे। सब-कमेटी की रिपोर्ट में की प्रमुख सिफारिशों संबंधी जानकारी देते हुये डॉ. चीमा ने बताया कि कमेटी द्वारा यह सिफारिश की गई है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थीयों का आधार मज़बूत करने के लिए प्राईमरी स्कूलों में प्री-प्राईमरी कक्षांए आरंभ की जायें। आंठवी तक फेल ना करने की नीति पर पुन: विचार करने के लिए कहा गया। इसके साथ ही पहले की तरह पांचवी से आठवी की राज्य स्तर पर स्वतंत्र परीक्षा पुन: आरंभ की जाये। डॉ. चीमा ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करते हुये विभिन्न देशों द्वारा शिक्षा संबंधी किये जाने वाले खर्च की तुलना की गई है और कमेटीने सिफारिश की है कि जीडीपी (कुल घरेलू उत्पाद) का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया जाये। इसके साथ ही कमेटी ने एलीमैंटरी/प्राईमरी स्तर तक की शिक्षा को अधिक तवज्जो देने पर जोर देते इस स्तर तक अधिक व्यय करने की सिफारिश की है। प्रत्येक स्कूल के लिए मुखी (हैड टीचर/मुख्य अध्यापक/प्रिंसीपल) अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि अध्यापकों की निरंतर भर्ती करने के लिए सेवा निवृति को ध्यान में रखते हुये पहले ही भर्ती कलैंडर बनाया जाये ताकि कोई भी रिक्ति खाली ना रहे। कमेटी ने यह सिफारिश की कि इस समय अध्यापक बनने के लिए करवाये जाते कोर्सो के सलेबस, कोर्स का समय तथा कोर्स के दौरान स्कूलों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग आदि को पुन: जांचने के लिए शैक्षणिक विशेषज्ञों पर आधारित एक कमेटी बनाई जाये। अध्यापकों की सेवा के दौरान प्रशिक्षण को गुणात्मक बनाने के लिए कमेटी ने अह्म सिफारिश करते हुये कहा कि इसकी जिम्मेवारी देश की केंद्रीय, राज्य एवं अन्य यूनीवर्सटियों को दी जाये ताकि अध्यापक को बेहतर वातावरण तथा समय के अनुसार बुनियादी ढांचा तथा यूनीवर्सिटी के शैक्षणिक और साकारत्मक वातावरण का लाभ मिल सके। कमेटी ने जहां देश भर में ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को और मज़बूत करने और स्कूलों में अति आधुनिक सुविधांए देने, स्टॉफ की कमी को पूरा करने, परिवहन सुविधा मुहैया करवाने आदि अनेक सिफारिशें की वहीं कमेटी ने एक अह्म तथ्य सामने रखते हुये बढ़ रहे शहरीकरण के सामने देश के सभी स्कूलों में नये स्कूल ना खोलने के कारण औद्योगिक मज़दूरों, घरेलू कार्य करने वालों, प्रवासी मज़दूरों तथा गरीब शहरों के बच्चों की चिंता संबंधी भी प्रशन खड़े किये। कमेटी ने यह सिफारिश की है कि शहरों में नई कलौनियों में आबादी के लिहाज से स्कूल खोलना अनिवार्य हो। कमेटी ने यह सिफारिश भी की है कि देश के दूरवर्ती और मुश्किल वाले क्षेत्रों में दूरदर्शन और इसके क्षेत्रीय प्रसारण केंद्रों द्वारा शैक्षणिक कार्यक्रमों के आरंभ करने की जोरदार वकालत की है। इसके अतिरिक्त कमेटी ने स्कूलों में लड़कियों की सुरक्षा, उचित वातावरण बनाने पर भी बल दिया। कमेटी द्वारा स्कूली ईमारतों के रखरखाव, बिजली पानी आदि के बिलों की आ रही समस्या, चौकीदार/सेवादारों की रिक्तियां की कमी पूरा करना, स्कूल के खर्चे घटाने के लिए स्कूल की छत्तों पर सौर उर्जा लगाने, पानी बचाने के लिए रेन-वॉटर हारवेस्टिंग तथा बहुमूल्य सुझाव भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किये हैं। कमेटी ने स्कूलों के लगातार मूल्यांकन तथा आम लोगों को स्कूलों से जोडऩे तथा उनका सहयोग लेने के लिए 'शालासिद्धि और इवेल्यूएट यूअर ऑन स्कूलÓ आदि विधियों का प्रयोग यकीनी बनाने के लिए भी कहा है। डॉ. चीमा ने कमेटी के समस्त सदस्यों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रीयों और अधिकारियों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने अपने अपने राज्यों की प्रस्तुति दिखाकर भूमि हकीकतों से अवगत् करवाया। जिक्रयोग्य है कि सरकारी स्कूलों के  सुधार के लिए बनाई गई कैब की यह सब-कमेटी बनाने का फैसला गत् वर्ष कैब की 19 अगस्त को हुई वार्षिक बैठक में हुआ था। डॉ. चीमा के नेतृत्व में बनी इस कमेटी का गठन 15 अक्टूूबर, 2015 को हुआ था और एक वर्ष के भीतर सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपनी थी। इस कमेेटी ने एक वर्ष के भीतर गत दिवस 14 अक्टूबर को अपनी अंतिम एवं सातवीं बैठक के दौरान रिपोर्ट को फाइनल कर दिया था जो आज डॉ. चीमा ने केंद्रीय मंत्री श्री जावेडकर को सौंप दी। इस कमेटी के अन्य सदस्यों में राजस्थान के शिक्षा मंत्री प्रौ. वासु देव देवनानी, बिहार के मौजूदा शिक्षा मंत्री श्री अशोक चौधरी एवं पूर्व शिक्षा मंत्री श्री पी के शाही, उत्तर प्रदेश के  मौजूदा शिक्षा मंत्री श्री अहमद हस्न, पूर्व शिक्षा मंत्री श्री राम गोबिंद चौधरी, झारखंड के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. नीरा यादव, कर्नाटक के शिक्षा मंत्री श्री तनवीर सैत, कैनरा बैंक स्कूल ऑफ मैनेजमैंट स्टडीज के प्रौ. श्री एम के श्रीधर, अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के सीईओ श्री दिलीप रंजेकर एवं न्यूपा के उपकुलपति जे बी जे तिलक थे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री मनीष गर्ग सदस्य सचिव हैं।

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