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Sunday, February 28th, 2021

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से 10 सवालों के मांगे जवाब

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कृषि कानूनों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिख कर 10 सवाल पूछे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से 10 सवालों के मांगे जवाब

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदाेलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र भेजा है। उन्होंने इन कानूनों से किसानों को नुकसान और बड़े व्यापारियों व उद्योगपतियों को कैसे फायदा पहुंचाने के प्रावधान किए गए हैं, इसको लेकर सवाल पूछे हैं। बता दें कि तोमर ने हाल ही में किसानों के नाम एक पत्र लिखा था। जिसके जवाब में दिग्विजय ने उन्हें पत्र लिखा है। इसके माध्यम से 10 सवालों के जवाब मांगे हैं।

दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा कि यदि कृषि कानूनों को संसद की प्रवर समिति को सौंप दिया होता तो किसान आंदोलन की नौबत ही नहीं आतीl कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों द्वारा इन विधेयकों पर चर्चा कराने की मांग को आपके द्वारा निरस्त कर दिया गया था। जबकि संसदीय परंपराओं में यदि एक भी सदस्य मत विभाजन की मांग करता है तो लोकसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, राज्य सभा सभापति और उपसभापति को मत विभाजन की मांग स्वीकार करने की बाध्यता है। उन्होंने तोमर पर आरोप लगाए कि आपने उन सभी संसदीय परंपराओं को ठुकराते हुए मनमाने तरीके से बिल पास कराए और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय जोड़ दिया।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि आपने किसानों को संबोधित कर 8 पेज का पत्र जो लिखा था। उसमें स्वयं को किसान परिवार का बताया है। जबकि आपने केंद्रीय चुनाव आयोग को लोकसभा के समय 2014 में दिए गए शपथ पत्र में अपनी संपत्ति की जानकारी में यह स्वीकार किया है कि आपके पास कोई कृषि भूमि नहीं है। आपने व्यवसाय के कॉलम में किसान नहीं बल्कि समाजसेवी होने का हवाला दिया है।

दिग्विजय सिंह के 10 सवाल

1. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के मुद्दे को कृषि कानून में शामिल क्यों नहीं किया गया? यदि सरकार की नीयत साफ होती तो इन आश्वासनों को कानून में शामिल करने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थीl

2. भारतीय लोकतंत्र की संघीय व्यवस्था में कृषि पर टैक्स लगाने का राज्यों को अधिकार हैl राज्यों के इस अधिकार का अतिक्रमण कर भारतीय संविधान की मूल भावना को गहरा आघात क्यों पहुंचाया?

3. कानूनों में किसानों को किसी भी अदालत में जाने के मूल अधिकार से वंचित क्यों किया? संविधान में आम नागरिक को न्यायिक संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इन कानूनों के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को हर प्रकार के आपराधिक प्रकरण से बचने के लिए संरक्षण दे दिया गया है।

4. केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कृषि समझौते के रजिस्ट्रेशन का अधिकार ना देकर संविधान के विपरीत कार्य किया गया है। यदि सरकार वास्तव में किसानों को यह अधिकार देना चाहती तो कानून में इसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया?

5. कांट्रेक्ट फार्मिंग के अंतर्गत यदि किसी भ्रष्ट राजस्व अधिकारी ने निरीक्षण के समय कृषि भूमि पर किसी कंपनी का कब्जा लिख दिया और यह बात किसान की जानकारी में नहीं आई तो क्या किसान को अपनी जमीन से हाथ धोना नहीं पड़ेगा? राज्यों में भू राजस्व संहिता के तहत इस तरह के प्रावधान हैं, इसलिए देश के किसान कांट्रेक्ट फार्मिंग का विरोध कर रहे हैंl

6. अति आवश्यक वस्तु अधिनियम से कृषि उत्पाद की स्टॉक सीमा क्यों हटाई? अब कारपोरेट कंपनियां बड़ी मात्रा में किसानों की फसल का स्टाक करेंगी। परिणाम स्वरूप जमाखोरी और मुनाफाखोरी बढ़ेगी। ऐसे में कृषि उत्पादों से जुड़े लगभग 15 से 18 लाख करोड़ रुपए के बाजार का रास्ता कारपोरेट कंपनियों के लिए खोल दिया गया हैl यह किसानों के हित में कैसे हो सकता है?

7. किसान कृषि उत्पाद के संबंध में दी गई परिभाषा के अनुसार तैयार तेल एवं दूध के विभिन्न प्रसंस्कारित पदार्थ भी कृषि उत्पाद में शामिल किए गए हैं। इसका मतलब मिल से निकला हुआ तेल, क्रीम, मक्खन और दूध के समस्त उत्पाद कृषि उत्पाद माने जाएंगेl किसान या कृषि उत्पाद आयकर अधिनियम 1961 के तहत कर मुक्त हैं। लिहाजा यह सब उत्पाद कर मुक्त होंगेl इससे आयकर में छूट किसे मिलेगी?

8. किसान की परिभाषा के अनुसार कोई व्यक्ति जो स्वयं किसानी कर रहा है या मजदूरों द्वारा करवा रहा है, वह किसान हैं। इसके अलावा फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन भी किसान हैं। इसमें कहा गया है कि एक किसान का समूह जो वर्तमान कानून के अंतर्गत रजिस्टर्ड हो, ऐसा समूह जो सरकार द्वारा दी गई योजना या कार्यक्रम के अंतर्गत प्रोत्साहित किया जाता होl ऐसे में बड़े व्यापारी उद्योगपतियों को किसान के तौर पर मान्यता मिल जाएगीl क्या यह खेती पर व्यापारिक का कब्जा कराने के लिए है?

9. कानून के अनुसार किसान उत्पाद की राज्य में और राज्य के बाहर इलेक्ट्रॉनिक खरीद बिक्री की जा सकती है। कोई भी व्यक्ति जिसके पास केवल पेनकार्ड हो यह व्यापार कर सकता है। साइबर अपराध में दक्ष कोई भी व्यक्ति किसान के साथ क्या धोखा नहीं करेगा?

10. कृषि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य का कोई जिक्र नहीं है। इसके पूर्व में प्रावधान था कि सरकार हर उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करेगी और एमएसपी पर ही कृषि उत्पाद खरीदेगी। मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 की धारा 36 में प्रावधान है कि समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल नहीं खरीदी जाएगीl क्या इस नियम का मध्य प्रदेश में पालन हो रहा है?PLC.

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