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चंडीगढ़,
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा सरकार छोटे किसानों को जोडकर सहकारी के माध्यम से सामूहिक खेती को शुरू करने पर विचार कर रही है क्योंकि छोटे किसान खेती व्यवसाय में आत्मनिर्भर नही हैं। उन्होंने कहा कि ‘डिस्टे्रस सेल’ से किसानों को किस प्रकार से बचाया जाए, उस पर भी काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सीमंात किसानों को आज कर्ज की मार झेलनी पड रही है इसलिए पारपंरिक खेती के साथ-साथ फलों, फूलों, औषधियां, सब्जियों व डेयरी फार्मिंग को बढावा देना होगा।

मुख्यमंत्री आज यहां चार दिवसीय सीआईआई एग्रोटैक-2014 के उदघाटन समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। चार दिवसीय सीआईआई एग्रोटैक-2014 का उदघाटन हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल, पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल तथा कनाडा के सशकाचवान के प्रीमियर श्री ब्राड वाल ने रिब्बन काट कर किया तथा चार दिवसीय सीआईआई एग्रोटैक-2014 के थीम पेपर का भी अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने एग्रोटेक-2014 में हरियाणा मण्डप का भी रिब्बन काटकर शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के लिए ‘साँयल हैल्थ कार्ड’  को शुरू करने की योजना बना रही है, इसके तहत लघु और छोटे किसानों के लिए सस्ते और निजी अनुदानों और अधिक पैदावाद देने वाले बिजों की उपलब्धतता हो सकें। उन्होंने कहा कि देश में कृषि को बढावा देने के लिए दूसरी हरित क्रंाति लानी होगी और यह किसान, सरकार,खेती उद्योगों, अनुसंधान और खेती से जुडे वैज्ञानिकों की मदद से ही संभव होगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती और आधुनिक खेती के मध्य समन्वय बैठाना होगा ताकि किसान को उसकी लागत का उचित मूल्य मिल सकें और कृषि में बढौतरी हो सकें।

उन्होंने कहा कि कृषि पंजाब व हरियाणा प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ की हड़्डी है, उन्होंने कहा कि जितना कृषि का उत्थान होगा अर्थात बढावा मिलेगा समाज को उतना ही लाभ होगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को वैश्विक रूप प्रतियोगी बनाना बहुत जरूरी है क्योंकि विश्व कृषि के आदान-प्रदाना में छोटी इकाई हो गई है। कृषि उत्पादन की क्षमता पर भी विचार की आवश्यकता है क्योंकि कृषि उत्पादन में कीमतों का भी वैश्विीकरण हो चुका है, इसके अलावा किसान कृषि पर ही निर्भर है। उन्होंने कहा कि चिंतक पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने कहा था कि खेती, उद्योग, परिवहन, व्यापार और समाज सेवा क्रम जितना सहज गति से आगे बढेगा, समाज भी उतना ही सुखी होगा और राष्टï्र आगे बढेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भूमि की उत्पादक क्षमता एक चुनौती है क्योंकि आज रसायनिक खाद का प्रयोग हो रहा है जो लंबे समय के बाद भूमि उवर्रक क्षमता पर फर्क डालता है। इसके उपाय के लिए हमें जैविक खाद के प्रयोग करना चाहिए तभी इस समस्या को दूर कर सकते हैं। इसके अलावा, पारपंरिक सिंचाई के  कारण भी जमीन के पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है जिसके लिए नए प्रयोग जैसे कि ड्रीप सिंचाई, फाऊटेन सिंचाई को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन भी एक बडी समस्या जैसे कि ग्लोबल वाॢमंग हो रहा है, इससे भी खेती में फर्क आता है और हमें इस ओर भी ध्याना देना होगा। उन्होंने कहा कि पानी प्रबंधन में भी हमें ध्यान देने की जरूरत है और इसमें निजी क्षेत्र को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र भूमि की सीमा है और यह लगतार कम होती जा रही है क्योंकि बढता शहरीकरण, लगातार लगते उद्योगों के कारण कृषि भूमि सुकुडती जा रही है इसलिए सघन फसल को नई तकनीकों के इस्तेमाल के तहत बढाना देने की जरूरत है। इसमें, किसानों के लिए प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि आयोजित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मृदा की उत्पादकता को बढाना होगा, जिसमें पारंपरिक और नई तकनीकों का तालमेल आपस में बैठाना होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब के कृषि विश्वविद्यालय अच्छा काम कर रहे हैं। इसके अलावा, हरियाणा और पंजाब को डेयरी फार्मिंग में भी अच्छा काम करना होगा। फसलों की कटाई में भी उद्योग लगाए जा सकते हैं और कृषि को आगे बढाने के प्रयास में तथा निवेश में निजी क्षेत्र पर जोर देना होगा तथा आपसी सहयोग के साथ-साथ विश्वव्यापी सहयोग पर भी जोर देना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा भंडारण की सुविधा के लिए संकल्पबद्घ है और प्रोसेसिंग और भंडारण में निजी क्षेत्र में संभवनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को कृषि में बढावा देने की जरूरत है तथा भविष्य व्यापार पर भी जोर देना होगा।
इस अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में दो प्राकृतिक संसाधन पानी और भूमि हैै। उन्होंने कहा कि केन्द्र में एनडीए की सरकार आई है जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी है, जो एक सूबे के काफी सालों तक मुख्यमंत्री भी रहे और श्री मोदी किसानों की समस्याओं बाखूबी समझते हैं, इसलिए किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए यह सही समय है। श्री बादल ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में देश के अंदर सबसे पुरानी नहरें हैं और इन नहरों की क्षमता को बढाने की आवश्यकता है, यदि नहरों की क्षमता को बढाया जाए, तो देश के खाद्यान्न में 20 प्रतिशत की बढोतरी की जा सकती है। पंजाब के मुख्यमंत्री श्री बादल ने कहा कि हरियाणा व पंजाब में विपणन प्रणाली काफी अच्छी हैं।

समारोह में कनाडा के सशकाचवान के प्रीमियर श्री ब्राड वाल तथा भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव श्री आशिश बहुगुणा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके अतिरिक्त, सीआईआई के अध्यक्ष श्री अजय एस श्रीराम, सीआईआई एग्रोटेक-2014 के चेयरमैन डा. पवन गोयनका, सीआईआई के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बनर्जी, सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन श्री जुबिन ईरानी ने भी समारोह में संबोधित किया तथा सीआईआई के सह-चेयरमैन श्री सलिल सिंघाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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