आई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री मुकुट बिहारी वर्मा ने सहकारी बैकों में चल रही एक मुश्त समाधान योजना का लाभ लेकर अपना बकाया जमा करने के लिये कृषको से अपील की है। उन्होंने कहा है कि मा0 मुख्य मंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानो को अधिक से अधिक सुविधा देना चाहती है। जिसके अन्तर्गत प्रदेश में किसानों के लिये सहकारी बैंकों में ‘एक मुश्त समाधान योजना’ लागू की गयी है। जोकि अगामी 30 जून को समाप्त हो जायेगी। इसलिये जिन बकायेदार किसानो ने अभी तक इस योजना का लाभ नही लिया है वे शीघ्र योजना का लाभ लेकर अपना बकाया जमा कर लें।

श्री वर्मा ने बताया कि इस योजना को बहुत ही सरल करके लागू किया गया है, जिससे बकायेदार किसान अपना ब्याज माॅफ करके मूलधन जमा करके झंझट से मुक्त हो सकंे। उन्होंने बताया है कि यह योजना किसानों में काफी लोकप्रिय हुयी है। अब तक इसमें 290 करोड़ रूपये किसानो को छूट दी जा चुकी है तथा 305 करोड़ रूपये वसूला गया है। योजना के बारे में जानकारी देते हुये उन्होंने बताया कि किसानों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देकर उनको ऋण से मुक्त करने हेतु यह योजना लागू की गयी है। इस योजना के अन्तर्गत 245845 कृषक पात्र है।


उ0प्र0 प्रदेश सरकार द्वारा ‘‘फसल ऋण मोचन योजना-2017’’ लागू की गई है जिसमें निवेश ऋण को सम्मिलित नहीं किये जाने के फलस्वरूप ऐसे कृषक जो उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक से दीर्घकालीन एवं मध्यकालीन निवेश ऋण प्राप्त किये हैं एवं कतिपय कारणों से अपना बकाया अदा नहीं कर पाये है। उनके लिये ‘‘एक मुश्त समाधान योजना-2018’’ प्रथम चरण में 28 फरवरी 2019 लागू की गई थी। फिर भी लगभग 2,04,301 बकायेदार ऋणी वंचित रह गये है, जो योेजना का लाभ नहीं उठा सके। उनको राहत पहॅुचाने के उद्देश्य से योजना का विस्तार 30 जून 2019 तक के लिये किया गया है।

श्री वर्मा ने बताया कि एक मुश्त समाधान योजना के अन्तर्गत बकायेदार कृषकों को तीन श्रेणियों में बाॅटा गया है। प्रथम श्रेणी में 31 मार्च, 1997 तक अथवा उक्त तिथि से पूर्व वितरित ऋण प्रकरणों हेतु उन पर देय कुल अवशेष मूलधन की शत प्रतिशत वसूली करते हुए उन पर देय समस्त ब्याज माफ किया जायेगा। द्वितीय श्रेणी में 1 अप्रैल, 1997 को अथवा उसके पश्चात 31 मार्च, 2007 तक के मध्य ऋण लेने वाले कृषको में ऐसे कृषक जिनसे वितरित ऋणराशि के बराबर या अधिक ब्याज की वसूली कर ली गयी है। उनसे अवशेष मूलधन लिया जायेगा एवं जिन प्रकरणों में वितरित प्रकरणों में वितरित ऋणराशि से कम ब्याज की वसूली की गयी है उनमें वितरित ऋण राशि की सीमा तक (पूर्व में वसूले ब्याज को घटाते हुये) अवशेष ब्याज व अवशेष मूलधन की वसूली की जायेगी। 1 अप्रैल 2007 को अथवा उसके पश्चात 31 मार्च, 2012 तक के मध्य ऋण लेने वाले कृषकों से, उन पर देय समस्त मूलधन तथा समझौते की तिथि तक उस पर देय समस्त प्रकार के ब्याज में 35 प्रतिशत तक की छूट अनुमन्य की जा रही है।