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Thursday, October 22nd, 2020

कार्यसंस्कृति में सुधार लाने का आह्वान

HARISHRAWATNEWS,harishnewsnewsआई एन वी सी न्यूज़ देहरादून , मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य में कार्यसंस्कृति में सुधार लाने का आह्वान करते हुए कहा कि हममें यह भावना होनी चाहिए कि अपनी नियमित ड्यूटी के साथ ही राज्य को और अतिरिक्त क्या दे सकते हैं। नियमित रूप से यह स्व आंकलन करना चाहिए कि जो हमसे अपेक्षाएं की जाती हैं क्या उसे पूरा कर पाए हैं। ओएनजीसी के कम्यूनिटी हाॅल में अंतर्राष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उŸाराखण्ड जैसा राज्य जहां डाक्टरों का अभाव है, फार्मासिस्टों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें खुशी है कि दूर सीमांतवर्ती गांवों में भी फार्मासिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि कुछ व्यवसाय ऐसे होते हैं जिनको धन के तराजू से नहीं तोला जा सकता है। चिकित्सा का व्यवसाय ऐसा ही व्यवसाय है। मानवीय पहलु को ध्यान में रखकर काम किया जाएगा तो विशिष्ट पहचान बना पाने में सफल हो पाएंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड के कई गांव ऐसे हैं जहां से कई डाक्टर निकले हैं परंतु दुर्भाग्यवश वे डाक्टर भी अपने गांवों को सेवा देने के लिए आगे नहीं आते हैं। राज्य सरकार डाक्टरों को देश के किसी भी राज्य की तुलना में कहीं बेहतर सेलेरी पैकेज दे रही है फिर भी डाक्टरों का अभाव है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उŸाराखण्ड में स्वास्थ्य के क्षेत्र में विद्यमान चुनौतियां फार्मासिस्ट के लिए अवसर भी उत्पन्न कर रही हैं। हमें पूरा विश्वास है कि फार्मासिस्ट हमारी आशाओं पर खरा उतरेंगे। विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांगों के लिए किए जाने वाले प्रदर्शनों की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें परिस्थितियों को भी समझना चाहिए। आज हमारा सिस्टम नियंत्रण में है। परंतु इसके भी संकेत उभर कर सामने आते हैं कि यदि इस समय हमने कोई गलती कर दी तो कहीं अव्यवस्था का डेंगू काट न दे। ‘कल पर कुछ न छोड़ने की भावना’ से ही राज्य की ग्रोथ को ऊपर की ओर ले जाया सकता है। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मचारी अपनी मांगे मनवाने के लिए हड़ताल करने की बजाय उत्पादन को बढ़ा देते हैं। उŸाराखण्ड में यदि ग्रोथ में थोड़ी भी कमी आ गई तो सातवें वेतन आयोग के बाद कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए इस समय हमारा पूरा जोर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार उन लोगों के लिए सोचने को तैयार है जो केवल लेने की बजाय उŸाराखण्ड को कुछ देने की भी बात करे। श्रम मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल ने कहा कि फार्मासिस्ट की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें अपने प्रदेश में कार्यसंस्कृति का वातावरण बनाना है। इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य आरपी भट्ट, कार्यक्रम के मुख्य संयोजक बीएस पयाल, सह संयोजक बीएम भट्ट, बीएस कलूड़ा, पीएल ममगाईं, बीडी रूवारी, रामलाल, प्रमेंद्र सिंह नेगी, डा,एके सिंह, डा.प्रीति केठियाल, डा.प्रेम सैनी सहित बड़ी संख्या में फार्मासिस्ट मौजूद थे।

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