Monday, December 16th, 2019

कार्तिक चतुर्दशी : धन संपदा की इच्छा है तो करें उपाए

कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही भगवान कार्तिकेय, राधा-दामोदर, तुलसी-शालिग्राम का पूजन भी किया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें...


कार्तिक माह के दौरान जिन लोगों ने मासपर्यंत व्रत या संकल्प नहीं किया है, वह कार्तिक चतुर्दशी व पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर जाकर राधा-दामोदर का विशेष पूजन कर सकते हैं। कार्तिक मास में राधा-दामोदर के साथ शालिग्राम तथा तुलसी के पूजन का विशेष महत्व है।

* धार्मिक शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के दिन सुपिंडी श्राद्ध का काफी महत्व है। इस दिन पितरों के निमित्त सिद्धवट व रामघाट पर सुपिंडी श्राद्ध दान किया जाता है। खास तौर पर यह पूर्वजों के आत्मा की शांति व घर में सुख-समृद्धि के लिए तर्पण दान एवं पिंडदान किया जाता है।
* निर्णय सिंधु की मान्यता के अनुसार कार्तिक चतुर्दशी पर सर्वप्रथम तीर्थ स्नान करें। अगर तीर्थ स्नान संभव नहीं है तो घर में ही स्नान के समय देश की पवित्र नदियों का स्मरण करें।

* इस दिन राधा-दामोदर का पूजन सुहागिन स्त्रियों के लिए चिर सौभाग्यदायक होता है। अत: श्रीकृष्ण की विशेष उपासना करें। राधा सहस्त्रनाम का पाठ करें।


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तुलसी-शालिग्राम का पूजन परिवार में सुख, शांति, समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन तुलसी विवाह संपन्न माना जाता है अत: तुलसी नामावली और मंगलाष्टक का पाठ कर 5 दीपक मंदिर में लगाएं।

* पूरे घर में 14 दीपक लगाएं। अगर नदी किनारे जाकर दीपक लगाना संभव नहीं है तो घर में एक बड़ी थाल में पानी भरकर उसके आसपास 14 दीपक जलाएं। थाल के पानी में गुलाब पंखुरियां डाल सकते हैं। PLC

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