Wednesday, January 22nd, 2020

कानून और संविधान का लगातार उल्लंघन

आई एन वी सी न्यूज़ नई दिल्ली, धर्म रक्षक श्री दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भरतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय महामंत्री श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हिन्दू संगठनों की बैठक हुई। जिसमें राजभाषा नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहे सर्वोच्च न्यायालय में ताला लगाने की सरकार और महामहिम राष्ट्रपति जी से मांग की गयी। बैठक में अखिल भरतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी ओम जी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय को हिन्दी में याचिकाएं स्वीकार करने और अंग्रेजी में दिये गये आदेशों का हिन्दी अनुवाद देने और हिन्दी में भी आदेश देने का 24-11-98 को महामहिम राष्ट्रपति जी ने आदेश दिये है। जिनका पालन करना तो दूर हिन्दी में याचिकाऐं दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को लगातार परेशान किया जा रहा है। बैठक में अखिल भरतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय महामंती श्री मुकेश जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय राजभाषा नियमों और जानबूझकर संविधान का उल्लंघन करने वाले रजिस्ट्रार और न्यायाधीशों की गुन्डागर्दी का अड्डा बन चुका है और उपर से मुख्य न्यायाधीश साहब फरमा रहे है कि हमारी आलोचना की जा रही है। श्री जैन ने का कि जब सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश जजों की नियुक्ति संबन्धी संविधान के अनुच्छेद 124क 124.2 और 124.3 और महामहिम राष्ट्रपति जी के दिनांक 24-11-98 के हिन्दी में याचिकाऐं स्वीकार करने सम्बन्धी आदेशों का उल्लंघन करेगा और राजभाषा नियमों का उल्लंघन करने वाले गुन्डों को अपने रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रश्रय देगा तो देश की जनता तो इन गुन्डों की गुन्डागर्दी के खिलाफ बोलेगी ही। श्री जैन ने मुख्य न्यायाधीश को चेताया कि आपकी रजिस्ट्री सर्वोच्च न्यायालय के आर्डर 8.1 के तहत हिन्दी में दायर याचिकाओं का जिस प्रकार से आर्डर 8.2 का हवाला देकर अंग्रेजी में अनुवाद याचिकाकर्ताओं से मांग रही है उस गुन्डागर्दी पर आपको गौर करना चाहिये। क्यों कि आर्डर 8.2 के तहत हमारे द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से अंग्रेजी अनुवादक नियुक्ति की मांग करने पर आपके रजिस्ट्रार आचार्य जिस प्रकार से हमको टका सा जवाब दे रहे कि अंग्रेजी अनुवाद हम नहीं करायेंगे जो कुछ करना हो कर लो,ऐसे गुन्डों को सबक सिखाना हिन्दू संगठन अच्छी प्रकार से जानते है। बेहतर है कि आपके अधिकारी कानून को अपने हाथ में न ले। हिन्दू संगठनों ने कानून ,संविधान और राजभाषा नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहे सर्वोच्च न्यायालय में ताला लगाने की सरकार और महामहिम राष्ट्रपति जी से मांग की ।



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