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Sunday, January 24th, 2021

कांग्रेस की बल्ले-बल्ले से घबराया सुखबीर बादल

आई एन वी सी न्यूज
चंडीगढ़,

सुखबीर सिंह बादल द्वारा मनरेगा योजना के अंतर्गत समान की खरीद में 1000 करोड़ का घपला होने के दोष को सरासर झूठा, पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना, सच्चाई से कोसों दूर और संकुचित राजनीति से प्रेरित बताते हुए पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री श्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा है कि दरअसल अकाली दल का प्रधान मनरेगा के अंतर्गत गाँवों के हो रहे बेमिसाल विकास से घबराकर इसको किसी भी बहाने बंद करवाना चाहता है।

पंचायत मंत्री ने कहा कि अपनी गलत नीतियों और लोक विरोधी फैसलों के कारण हाशीए पर आए हुए अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल से मनरेगा के अंतर्गत पंजाब भर के गाँवों में हो रहे बेमिसाल विकास कार्यों से लोगों में कांग्रेस सरकार की हो रही बल्ले-बल्ले बर्दाश्त ही नहीं हो रही। वह केंद्र सरकार में अपनी हिस्सेदारी के बलबूते यह विकास कार्य रोकना चाहता है, परन्तु उसे यह नहीं पता कि इस योजना के बंद होने से पंजाब में तकरीबन ढाई लाख गरीब परिवारों के चूल्हे बुझ जाएंगे।

श्री बाजवा ने कहा कि सुखबीर बादल का झूठ इस तथ्य से ही सिद्ध हो जाता है कि इस साल मनरेगा के कुल 800 करोड़ रुपए के बजट में से अब तक 390 करोड़ रुपए का कुल खर्च हुआ है जिसमें से मैटरियल की खरीद पर सिर्फ 88 करोड़ का ही खर्च हुआ है। उन्होंने कहा कि साल 2017 में बनी कांग्रेस सरकार द्वारा अब तक मैटीरियल पर सिर्फ 520 करोड़ रुपए का ही खर्च किया गया है।

पंचायत मंत्री ने सुखबीर सिंह बादल से पूछा कि 520 करोड़ रुपए के खर्चे में से 1000 करोड़ रुपए का घपला कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल जैसे जिम्मेदार व्यक्ति को ऐसी गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी और निर्मूल बातें नहीं करनी चाहीए।

श्री बाजवा ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत 60 प्रतिशत खर्चा लेबर और 40 प्रतिशत खर्चा मैटीरियल पर हो सकता है और मैटीरियल पर अब तक सिर्फ 22 प्रतिशत ही हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबर की अदायगी सम्बन्धी फंड राज्य के खजाने में नहीं आता और लेबर की अदायगी सीधे तौर पर ही भारत सरकार द्वारा लाभपात्रीयों के खातों में की जाती है।

उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत राज्य में हो रहे कार्यों बारे बताते हुए कहा कि इस योजना अधीन इस समय पंजाब में तकरीबन दो लाख तीस हजार वर्कर काम कर रहे हैं, जबकि पंजाब में लॉकडाउन लगने के समय यह संख्या सिर्फ 60,000 थी। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौर के इस साल में 114 लाख मानवीय दिहाडि़यां पैदा करके गरीब लोगों को रोजगार मुहैया करवाया गया है। उन्होंने साथ ही बताया कि इस योजना के अंतर्गत काम कर रहे कुल वर्करों में 68 प्रतिशत दलित समुदाय से सम्बन्धित हैं और कुल वर्करों में से 58 प्रतिशत महिलाएं हैं।

श्री बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने मनरेगा योजना को इस साल राज्य में बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपए पर लेकर जाने का लक्ष्य निश्चित किया है। जबकि अकाली दल के शासन के आखिरी साल अर्थात 2016-17 में मनरेगा का कुल बजट सिर्फ 531 करोड़ का था जिसको मौजूदा सरकार पिछले साल 767 करोड़ रुपए पर ले आई थी।

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