Tuesday, October 15th, 2019
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कविताएँ - कवयित्री : ज्योति गुप्ता

 कविताएँ 
जोगी चाँद
यूँ खिड़की पर जो आते हो मन जोगन से क्या पाते हो न वचन कोई ना कोई सपना ले खाली दामन ही जाते हो, ... फिर बोलो जोगी रोज-रोज तुम खिड़की पर क्यों आते हो। रमने को कँही क्या बास नहीं क्या कोई भी तेरे पास नहीं रोते हो तब भी भाते हो ये दर्द सा कैसा गाते हो। जब कुण्डी - ताले सोते हैं दरवाजे ग़ाफ़िल होते हैं तुम खिड़की पर आ जाते हो और जी भर जब बतियाते हो इस धुंधले काले आलम पर तब धवल नदी सी बहती है तुम दिल को बेहद भाते हो शायद पहले के नाते हों। जोगी तुम इक बात कहो क्या तुमको नींद नहीं आती या नींद से तुमको प्यारी हूँ बचपन की जैसे यारी होऊं कल आएगी जब फिर रैना तुम जोगी तब ये भी कहना ये जो तप कुंदन के फेरे हैं क्या संग ही मेरे लेने हैं। आज कही है जोगी मैंने जो थी दिल में कुछ बातें कल कहना कैसे दिन बीता क्या-क्या दुनिया ने,की घातें। यूँ रात में मेरी खिड़की पर मैं जान गई क्युँ आते हो क्युँ नैनों में तकते रहते हो पर दूर जरा सा बहते हो...
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            जलती तीली
कभी मेरे पास सिगरेट कँहा रहा पर जलते ख्यालों से इक सिगरेट सुलगाना है कि, जब छींटे बारिश के उंगलियों को होठो को , बदन के हर गोशे को भिगों दें, भिंगो - भिंगो कर थका दें , कि, जब आँखों से कोई आस बारिश का छाता ओढ़ कर बेधड़क निकल पड़े , तो सिगरेट सुलगा कर सुलगती कुछ चाहतों को दिखाना चाहती हूँ, एक जलती तीली |
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Poetess jyoti gupta, jyoti gupta Poetess, Poetess, jyoti guptaपरिचय - :
 ज्योति गुप्ता
लेखिका व् कवयित्री
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लेखन - : अख़बार, पत्रिका, ई-पत्रिका में
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            संपर्क- निवास-- बोरिंग रोड, पटना , E-mail - :  jtgupta9@gmail.com ,  Mob- : 9572418078
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Comments

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Users Comment

रंजीत, says on February 7, 2016, 9:49 PM

लाज़वाब, शानदार जबरदस्त जिंदाबाद

अंजनी कुमार, says on February 6, 2016, 6:11 PM

आह...!!! बेहतरीन कविता ज्योति जी...!!! बेहतरीन रचना / धन्यवाद.

naushad alam, says on February 6, 2016, 4:55 PM

Ati prashanshniya kavita

Deepak Gupta, says on February 6, 2016, 4:54 PM

Nice lines

Nitish, says on February 6, 2016, 4:52 PM

कमाल है दी बहुत प्यारी कवितायें

Nitish, says on February 6, 2016, 4:49 PM

वाह जलती सिगरेट जागा जोगी रात की प्यास है रात की प्यासी है अंधियारा भी सुखा सूखा सीली सीली है ये ज्योति :-)

Abhishek awasthi, says on February 6, 2016, 4:41 PM

"जोगी तुम इक बात कहो क्या तुमको नींद नहीं आती या नींद से तुमको प्यारी हूँ।" वाह वाह वाह ....बहुत उम्दा ॥

raman, says on February 6, 2016, 4:28 PM

jyoti unnda , lik thish

raman, says on February 6, 2016, 4:25 PM

ज्योति जी आपकी कविता दिल को छूने वाली है । बेहतरीन

kumari sandhya, says on February 6, 2016, 4:17 PM

Nyc Jyoti ji,aise hi likhti rahiye ji

अर्पित अनाम, says on February 6, 2016, 3:55 PM

सुन्दर रचना । जोगी को नींद नहीं आती ।