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Thursday, November 26th, 2020

करवा चौथ और पूजन विधि

पति की लंबी आयु की कामना करते हुए सुहागिन महिलाएं करवा चौथ (Karwa chauth 2020) के दिन निर्जला व्रत रखती हैं. रात को चांद देखने के बाद करवा चौथ का व्रत खोला जाता है. इस बार बुधवार, 4 नवंबर 2020 को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. सूर्योदय से पहले से शुरू होने वाला यह व्रत चांद के निकलने तक रखा जाता है. करवा चौथ पर सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसे लेकर बहु अपने व्रत की शुरुआत करती है. आज हम आपको करवा चौथ की पूजन विधि के बारे में जानकारी देंगे.

पूजा विधि : करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले जल्‍दी उठें सरगी के रूप में मिला भोजन ग्रहण कर लें. इसके बाद भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें. शाम के समय पूजा के लिए एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवा रखें थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखकर घी के दीए जलाएं. चांद निकलने के एक घंटे पहले पूजा शुरू कर दें. कई जगहों पर महिलाएं करवा चौथ के मौके पर इकट्ठा होकर पूजा करती हैं चांद के निकलने का इंतजार करती हैं.

मंगलसूत्र का महत्व : करवा चौथ में मंगलसूत्र का बड़ा महत्‍व है. मंगलसूत्र दांपत्‍य जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. माना जाता है कि मंगलसूत्र धारण करने से पति की रक्षा होती है पति के सामने आने वाले संकट कट जाते हैं.

मंगलसूत्र धारण करने के नियम

मंगलवार को मंगलसूत्र न खरीदें
मंगलसूत्र धारण करने से पहले इसे मां पार्वती को अर्पित करें
बहुत ज्यादा जरूरी न हो तो मंगलसूत्र न ही उतारें
कोशिश करें कि मंगलसूत्र में लगा सोना चकोर हो, यह बहुत उत्‍तम होता है. PLC.

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