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Friday, January 22nd, 2021

एनएचएम को ज्‍यादा कारगर बनाने के लिए जन प्रतिनिधियों को इससे जोड़ें : जे. पी. नड्डा

jpnaddaआई एन वी सी न्यूज़
नई दिल्ली,
राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (एनएचएम) को ज्‍यादा कारगर बनाने एवं इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए तमाम जन प्रतिनिधियों को इससे जोड़ा जाना चाहिए, चाहे वे प्रधान हों या वार्ड सदस्‍य अथवा विधायक या सांसद। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने आज यहां राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के 8वें साझा समीक्षा मिशन के दौरान यह बात कही। उन्‍होंने कहा कि आम जनता के प्रतिनिधिगण न केवल जमीनी स्‍तर के अपने अनुभवों एवं ज्ञान से इस कार्यक्रम को लाभान्‍वित करेंगे, बल्‍कि इसके लिए जवाबदेही की कारगर व्‍यवस्‍था भी सुनिश्‍चित करेंगे।
15 राज्‍यों के स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों के साथ-साथ दानदाता भागीदारों एवं गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों और स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि एनएचएम के तहत चलाए जा रहे कार्यक्रमों के कार्यान्‍वयन के बारे में आरंभिक जानकारी हासिल करने के लिए अधिकारियों को विभिन्‍न क्षेत्रों का व्‍यक्‍तिगत तौर पर दौरा करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह कवायद कागजों में छपी विभिन्‍न रिपोर्टों से बेहतर साबित होगी और इसके व्‍यापक नतीजे सामने आएंगे। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि राज्‍यों द्वारा कोष का जो इस्‍तेमाल किया जाता है, उसके नतीजों से जरूर वाकिफ कराया जाना चाहिए। इससे आवंटित कोष का अधिकतम इस्‍तेमाल करने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि सूक्ष्‍म स्‍तर पर सामने आने वाले नतीजों को इस्‍तेमाल में लाई गई धन राशि से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्‍वच्‍छ भारत विजन को ध्‍यान में रखते हुए अस्‍पतालों को भी यह सुनिश्‍चित करना चाहिए कि साफ-सफाई उनके कामकाज का अहम हिस्‍सा है। उन्‍होंने इस लक्ष्‍य को पाने के लिए अस्‍पताल आने वाले लोगों के साथ-साथ एनजीओ एवं जन प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी की जरूरत पर भी बल दिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कारण परिणामोन्मुख कार्यक्रमों में अधिकारों, योजनाओं, खरीद और क्रियान्‍वयन का विकेंद्रीकरण संभव हुआ है जिससे राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी ढांचा सुदृढ़ हुआ है। श्री नड्डा ने कहा कि वार्षिक साझा समीक्षा मिशन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निगरानी और सबक के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र है। ये वार्षिक मिशन तय लक्ष्यों और उद्देश्यों के प्रति एनएचएम के तहत हुई प्रगति की समीक्षा का मौका प्रदान करते हैं और स्वास्‍थ्‍य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता, समानता और लागत जैसे मानकों का मूल्यांकन में भी मदद करते हैं। इन मिशनों का उद्देश्य प्रगति को जांचना, कमियों की पहचान और इनके कारणों को ढूंढ़ना और उचित समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अब तक सात साझा समीक्षा मिशनों (सीआरएम) के जरिये सफल रही रणनीतियों को समझने में मदद मिली है। मिशनों की मदद से पूरी अवधि के मध्य में ही नीतियों को दुरुस्त किया गया है।
प्रत्‍येक सीआरएम टीम में तकरीबन 15-16 सदस्‍य थे। सीआरएम टीमों ने वर्ष 2014 में 7 नवंबर से लेकर 14 नवंबर तक भारी बोझ से जूझ रहे 9 राज्‍यों समेत 15 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा किया था। इस दौरान 259 स्‍वास्‍थ्‍य प्रोफेशनलों ने राज्‍यों के साथ गहन सलाह-मशविरा किया था। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अधिकारीगण, दानदाता भागीदारों एवं एनजीओ के प्रतिनिधि और स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ भी इन स्‍वास्‍थ्‍य प्रोफोशनलों में शामिल थे। सेवाएं मुहैया कराना, उच्‍च गुणवत्‍ता का भरोसा दिलाना, 'आरएमएनसीएच+ए', मानव संसाधन, सामुदायिक प्रक्रिया, सूचना एवं ज्ञान, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के लिए वित्‍त पोषण, दवाओं की खरीदारी, इलाज व आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन, एनयूएचएम और सुशासन एवं प्रबंधन इससे जुड़ी कार्य शर्तों में शामिल हैं। स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली में सुधार के सभी पहलुओं का जिक्र सीआरएम की रिपोर्ट में होता है।
सीआरएम में उपस्‍थित राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों में असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्‍तीसगढ़, केरल, मध्‍य प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा, तेलंगाना, राजस्‍थान, तमिलनाडु, उत्‍तर प्रदेश, पंजाब, उत्‍तराखंड एवं पश्‍चिम बंगाल शामिल थे।

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