Friday, June 5th, 2020

एक दर्जन बागियों को मिलेगी जगह,प्रथम चरण में 25 मंत्रियों को दिलाई जाएगी शपथ

भोपाल। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने 17 दिन हो गए हैं। किंतु अभी तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मंत्रिमंडल का गठन नहीं कर पाए हैं। कोरोनावायरस के संक्रमण तथा समर्थन मूल्य पर की जाने वाली खरीदी को लेकर जो आपदा प्रबंधन के कार्यक्रम सरकार चला रही है वह पूरी तरीके से नौकरशाही के भरोसे चल रही है जनप्रतिनिधियों के ना होने से आपदा प्रबंधन का काम जैसा होना चाहिए था वैसा नहीं हो पा रहा है जिसके कारण जन रोष भी बढ़ रहा है सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 से 20 अप्रैल के बीच मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
सिंधिया समर्थक बागी विधायक बने सिरदर्द
कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में जाने वाले विधायकों ने अपने इस्तीफे इसी शर्त पर दिए थे कि उन्हें फिर से उन्हीं विभागों का मंत्री बनाया जाएगा इस बात की पुष्टि करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बेंगलुरु गए थे उन्होंने हवाई अड्डे पर बागियों से बात की थी और उन्हें वचन दिया था कि मंत्रिमंडल गठन होने पर उनके पास वहीं विभाग होंगे इस शर्त पर पूर्व मंत्रियों ने इस्तीफे सौंपे थे
सत्ता परिवर्तन के इस खेल में सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफे पर हो चुके हैं। अतः अब उनसे शिवराजसिंह को कोई खतरा नहीं है। उपचुनाव होने की दशा में यदि वह नाराज होते हैं। तो कुछ असर डाल सकते हैं। अन्यथा सरकार उनको लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है।
शिवराज सरकार की सबसे बड़ी चिंता निर्दलीय सपा एवं बसपा के विधायकों को अपने पक्ष में रखने की है। यदि यह नाराज होते हैं। तो पाला बदल सकते हैं। इनके साथ अन्य भाजपा विधायक जी जो लगातार हो रही उपेक्षा के कारण नाराज हैं। वह भी पाला बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में हाईकमान के वचन की पूर्ति तथा निर्दलीय एवं अन्य विपक्षी दलों के विधायकों में इनको मंत्री बनाना जरूरी हो गया है।
मंत्री मंडल गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों का भारी दबाव है। इसके साथ ही यदि सिंधिया समर्थक बागी विधायकों को मंत्री बनाया जाता है। उन्हें महत्वपूर्ण विभाग भी दिए जाते हैं। वहां से यदि कोई भाजपा का मंत्री नहीं होगा ऐसी स्थिति में पार्टी को आगे चलकर बड़ा नुकसान हो सकता है।
यह सारे समीकरण मंत्रिमंडल के गठन में मुसीबत बन रहे हैं। संगठन और संघ से इस मामले में लगातार चर्चाएं हो रही हैं। जिस तरह से मंत्रिमंडल गठन शीघ्र किए जाने का दबाव बढ़ रहा है। उसको देखते हुए प्रथम चरण में 25 मंत्रियों को शामिल किया जाएगा तत्पश्चात कुछ समय के बाद जो नाराज विधायक होंगे उन्हें किस तरीके से संतुष्ट करना है। इसके लिए मंत्रिमंडल में स्थान खाली रखे जाएंगे
विभाग को लेकर झगड़ा
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की 15 साल सरकार रही है। 12 साल से अधिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहे हैं। कांग्रेस के जो बागी विधायक गए हैं। वह सारी सिंधिया समर्थक हैं। सिंधिया जी ने उन्हें कमलनाथ सरकार में महत्वपूर्ण विभागों से नवाजा था उन्हें महत्वपूर्ण विभागों को दिए जाने का आश्वासन भाजपा हाईकमान ने दिया था ऐसी स्थिति में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री और वरिष्ठ विधायक लगातार असहमति जता रहे हैं। जिसके कारण मंत्रिमंडल गठन में देर हो रही है।
समर्थन दे रहे विधायकों में से 3 को मंत्री पद
सिंधिया समर्थक विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। उनकी सीटें रिक्त हो चुकी हैं। लेकिन निर्दलीय सपा और बसपा के विधायक अभी भी पाला बदल सकते हैं। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद उन्होंने भाजपा के पक्ष में समर्थन दिया है। उन्हें भी मंत्री पद दिए जाने का भरोसा दिया गया है। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल सहित दो और मंत्री का बनना तय माना जा रहा है। जिसके कारण भाजपा के पूर्व मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ विधायकों में से मंत्रिमंडल में किसे शामिल किया जाए इसको लेकर गहन मंथन चल रहा है। अब देखना यह है कि मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल हो पा रहा है और उनको कौन कौन से विभाग आवंटित हो रहे हैं।

- भाजपा से यह होंगे मंत्री
गोपाल भार्गव नरोत्तम मिश्रा भूपेंद्र सिंह रामपाल सिंह गौरीशंकर बिसेन अजय विश्नोई संजय पाठक सुरेंद्र पटवा विश्वास सारंग विजय शाह पारस जैन मालिनी गौड़ उषा ठाकुर यशोधरा राजे सिंधिया। पीएलसी।PLC.

 
 

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