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देहरादून,
राजभवन में पुष्प प्रदर्शनी/बसंतोत्सव-2017 को प्रभावी तथा अधिक उपयोगी बनाने की दृष्टि से आयोजन की रूपरेखा सुनिश्चित करने के लिये सचिव राज्यपाल डाॅ.भूपिन्दर कौर औलख की अध्यक्षता में आज प्रारम्भिक बैठक आहूत की गई। राजभवन के इस वार्षिक आयोजन में पुष्प प्रदर्शनी की तिथि एवं उससे संबंधित अन्य कार्यक्रमों के निर्धारण, विभिन्न सरकारी विभागों/संस्थाओं/गैर सरकारी संस्थाआंे व फर्मों के स्टाॅल लगाये जाने, डाक विभाग के माध्यम से जारी होने वाले प्रथम दिवस आवरण हेतु पुष्प/पादप के चयन, विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित इस वर्ष कुछ अभिनव, सार्थक व ज्ञानवर्धक प्रयोग करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
सचिव राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में पुष्पोत्पादन के प्रति काश्तकारों के रूझान को प्रदर्शित व प्रोत्साहित करने की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण इस वार्षिक आयोजन का सदुपयोग जन-जागरूकता के लिये एक अनुकूल अवसर के रूप में किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के गुणवत्ता से भरपूर मौसमी फलों, फूलों व अन्न-दाल जैसे उपजों की पौष्टिकता व जैविक शुद्धता को प्रोत्साहित करने के प्रयास करने होंगे। छोटे-काश्तकारों को लाभ पहुँचाने वाली खाद्य प्रसंस्करण संबंधी लघु योजनाओं की जानकारी भी इस प्रदर्शनी के माध्यम से प्रसारित-प्रचारित की जा सकती है।

बैठक में चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से विभिन्न समसामयिक विषयों पर बच्चों की परिकल्पना को देखने के लिये इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण पर आधारित ‘‘पानी और ऊर्जा को बचाने तथा हरियाली बढ़ाने’’ जैसी विषयवस्तु(थीम) रखने का निर्णय लिया गया। सचिव द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता में नारी-निकेतन के बच्चों को भी शामिल करने तथा प्रदर्शनी में नारी-निकेतन की संवासिनियों द्वारा तैयार उत्पादों के लिये एक पृथक स्टाॅल आबंटित करने के भी निर्देश दिये।

बंसतोत्सव-2017 के आयोजन तिथि पर अन्तिम निर्णय अभी नहीं लिया जा सका। मौसम के अनुरूप तथा फ्लावरिंग की स्थिति का आकलन करके ही तिथि निर्धारित होगी। इस वर्ष की पुष्प प्रदर्शनी को विगत वर्षाें के सापेक्ष और अधिक स्तरीय व आकर्षक बनाने के साथ ही पुष्पोत्पादकता को राज्य की आर्थिक उन्नति से जोड़ने, पुष्पोत्पादन की उन्नत तकनीक के विषय में अधिकाधिक जानकारी उपलब्ध कराने, वनोपज तथा पुष्पों पर आधारित हस्तशिल्प की प्रदर्शनी को प्रोत्साहित करने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य की समृद्ध संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने तथा उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों के जैविक खाद्य उत्पादों पर आधारित पौष्टिक फूड कोर्ट की व्यवस्था करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि फूड कोर्ट में उत्तराखण्ड के पौष्टिक व्यंजनों को प्राथमिकता देकर पारम्परिक रूप से खाना पकाने में प्रयुक्त होने वाले लोहे और ताँबें के बर्तनों की उपयोगिता के प्रति भी लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित किया जाये।

राज्य की समृद्ध जैव-विविधता, पर्यावरण, लोक-जीवन व लोक-संस्कृति से जुड़े विषयों को महत्ता देने तथा विलुप्त होती जा रही औषधीय गुणों वाली वनस्पतियांे के संरक्षण की दृष्टि से ‘वनतुलसी(Origanum sp)*] ‘कुण्ज(Artemisia sp)’  व ‘जंगली चेरी(Prunus sp)’  आदि में से किसी एक को बसंतोत्सव-2017 के अवसर पर डाक विभाग द्वारा जारी किये जाने वाले स्पेशल पोस्टल कवर हेतु चयनित किये जाने पर विचार किया गया। इस वर्ष की प्रदर्शनी में दैवीय आपदा सहित अन्य कई समसामयिक विषयों/समस्याओं के प्रति जनमानस में चेतना जागृत करने, पर्यावरण के  परिप्रेक्ष्य में वृक्षारोपण, पाॅलीथीन के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए कपड़े/जूट के थैलों को प्रयोग में लाने, ’कन्या भ्रूण हत्या’ तथा महिलाओं के प्रति बढते अपराधो के प्रति मानसिकता को परिवर्तित करने के लिए विशेष अभियान चलाये जाने पर भी चर्चा हुई।

वर्ष 2017 की पुष्प प्रदर्शनी/वसंतोत्सव की रूपरेखा को अन्तिम स्वरूप देने के लिए यथाशीघ्र एक और बैठक आयोजित की जायेगी जिसमें तिथि तथा विषयवस्तु (थीम)आदि पर निर्णय लिया जायेगा।

बैठक में अपर सचिव उद्यान टी.एस. पंवार, निदेशक उद्यान डाॅ.बी.एस. नेगी, परिसहाय मेजर अनुज राठौर, उप सचिव राजभवन, सूचना, सुरक्षा, लोक निर्माण, व अन्य संबंधित अधिकारियों सहित राजभवन उद्यान से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे।

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