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Saturday, January 16th, 2021

इसलिए सुशील मोदी को किनारे लगाने वाला फैसला हुआ

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद अब सूबे में सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है. नीतीश कुमार सोमवार को साढ़े चार बजे सीएम पद की शपथ लेंगे. बिहार में नीतीश कुमार की कुर्सी तो पक्की थी, लेकिन बीजेपी के एक फैसले से हर कोई चौंक गया है. बिहार में बीजेपी नेता के तौर पर दो नए चेहरे सामने लेकर आ गई है.

अब तक बिहार में सुशील मोदी बीजेपी का चेहरा थे, वो नीतीश कुमार के भी फेवरेट हैं, लेकिन इस बार बीजेपी ने उनकी जगह पर तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को नया नेता और उपनेता बना दिया है. वैसे नीतीश कुमार की पसंद सुशील मोदी ही रहे हैं. 2005 से 2013 तक दोनों ने साथ काम किया. इसके बाद जब 2017 में फिर से नीतीश बीजेपी के साथ आए तो सुशील मोदी के साथ उनकी जोड़ी रिपीट हुई.

बीजेपी की भविष्य की तैयारी

बीजेपी ने सुशील मोदी को क्यों किनारे लगा दिया और क्यों उसने इस बार दो-दो डिप्टी सीएम बनाने का प्लान किया. ये इस तरह से समझा जा सकता है कि ये भविष्य के लिए बिहार में बीजेपी की तैयारी है. इसलिए पुराने नेताओं को किनारे लगाया जा रहा है. बिहार में बीजेपी के नए नेतृत्व की तलाश है. और उसे ऐसा नेतृत्व चाहिए जो आगे चलकर नीतीश कुमार जैसा विकल्प बन सके. नए चेहरे सामने लाने से सत्ता का जातीय संतुलन भी बनेगा.

तारकिशोर प्रसाद का चुनाव इसलिए भी हुआ कि वो कलवार जाति से आते हैं, जो वैश्य समुदाय में आता है. वो बिहार के कटिहार से लगातार चौथी बार विधायक बने हैं. वो ABVP के कार्यकर्ता भी रहे और अपने संघर्ष से बीजेपी में धीरे धीरे आगे बढ़े हैं.


वैसे तो बिहार में बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल भी वैश्य समुदाय है. लेकिन तारकिशोर प्रसाद पुराने नेता हैं और शायद यही वजह है कि बीजेपी उनका नाम सामने लेकर आई. डिप्टी सीएम के तौर पर दूसरा नाम रेणु देवी का बताया गया. जो बीजेपी विधायक दल की उपनेता चुनी गईं. रेणु देवी नोनिया जाति से हैं, जो बिहार में महादलित समुदाय में आती है. इस नाम से भी बिहार में सत्ता का जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई.

नीतीश के लिए भी अच्छे संकेत नहीं

बीजेपी के नए चेहरों से नीतीश कुमार को तो सीधे तौर पर कोई चुनौती नहीं है. लेकिन बीजेपी ने जिस तरह से अचानक ये फैसला किया और जिस तरह से सुशील मोदी को इस बार महत्व नहीं दिया. वो नीतीश कुमार के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. क्योंकि सब ये जानते हैं कि नीतीश कुमार की पहली पसंद सुशील मोदी ही रहे होंगे. 15 साल में सुशील मोदी के साथ नीतीश कुमार की ट्यूनिंग सबने देखी है. लेकिन इस बार सुशील मोदी नीतीश कुमार के साथ नहीं होंगे. और सिर्फ यही बात नहीं, नीतीश कुमार के लिए इस बार चैलेंज बहुत बड़ा है. उनकी नई पारी में कितनी मजबूती होगी ये कहा नहीं जा सकता लेकिन लाचारी कितनी है ये साफ देखा जा सकता है.

बिहार की सियासत का नया उलटफेर

ये बिहार की सियासत का नया उलटफेर है. चुनाव जीतते ही बिहार में बीजेपी ने चेहरा बदल दिया. अब तक सुशील मोदी बीजेपी विधायक दल के नेता होते थे और सरकार में नीतीश के बाद नंबर 2 बनते थे. लेकिन अब नीतीश के साथ सुशील मोदी नज़र नहीं आएंगे. क्योंकि बीजेपी उनकी जगह नए चेहरे लेकर आ गई है.

इस बार 68 साल के सुशील मोदी की जगह पर 64 साल के तारकिशोर प्रसाद को बीजेपी ने बिहार में विधानमंडल दल का नेता चुना है. तारकिशोर कटिहार से लगातार चौथी बार विधायक बने हैं. बीजेपी ने 62 साल की रेणु देवी को उपनेता बनाया है. वो बेतिया सीट से चार बार विधायक रह चुकी हैं.

ये बिहार में बीजेपी की पॉलिटिक्स का नया चैप्टर है. नए चेहरों से बिहार में बीजेपी नई कहानी लिखने जा रही है. बड़ी चुनावी जीत के बाद सुशील मोदी वाला पन्ना बीजेपी ने पलट दिया है. सुशील मोदी अपना दर्द रोक नहीं सके. ट्विटर पर लिखा कि, बीजेपी और संघ परिवार से 40 साल के राजनैतिक जीवन में इतना कुछ दिया कि शायद किसी दूसरे को नहीं मिला होगा. आगे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसका निर्वहन करूंगा. कार्यकर्ता का पद कोई छीन नहीं सकता. इस ट्वीट से ही साफ था कि सुशील मोदी से डिप्टी सीएम का पद छीन लिया गया है. संकेत सुबह से ही मिलने लगे थे. जब एनडीए और बीजेपी विधायक दल की बैठक हो रही थी. इसके बाद नीतीश कुमार को राज्यपाल के पास दावा पेश करने के लिए जाना था.


बदले सियासी समीकरणबिहार में सुशील मोदी 15 साल से बीजेपी का चेहरा थे. 15 साल से सुशील मोदी नीतीश कुमार के जोड़ीदार थे. बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी का बड़ा नाम है. लेकिन ये तब की बात थी जब जेडीयू बड़ी पार्टी होती थी. बीजेपी ने इस चुनाव की बड़ी जीत से बिहार में वक्त और सियासत बदल दी है. अब वो गठबंधन में बड़ा भाई है और जो वो कहेगी उसे नीतीश कुमार मना नहीं कर सकते. इस बार भी नीतीश कुमार के प्लान में डिप्टी सीएम के तौर पर सुशील मोदी ही रहे होंगे. लेकिन बीजेपी को तो बिहार में अपना फ्यूचर प्लान देखना है. शायद इसलिए पुराने चेहरों को किनारे लगाने वाला फैसला हुआ. plc.

 

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