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Thursday, October 29th, 2020

इग्नू ने किया  ई-क विकास एवं मूक्स एक परिचय विषय पर वेबिनार आयोजित 

आई एन वी सी न्यूज़

लखनऊ ,
 
कोविड-19 के चलते शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। शिक्षण की परम्परागत अवधारणा में बदलाव आ रहा है। चाहें क्लास रूम शिक्षण हो या दूरस्थ शिक्षा पद्धति सभी को समय के अनुसार चलना होगा आॅनलाइन शिक्षण अपनाना होगा तथा ई-कांटेंट को कैसे विकसित किया जाये इसे गम्भीरता से सोचना होगा। उक्त विचार आज इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस राजकीय महिला पी0जी0 काॅलेज के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद डाॅ0 हरिसिंह गौर केन्द्रीय विवि सागर, मध्यप्रदेश में समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डी0एस0 राजपूत ने व्यक्त किये। उन्होनें कहा कि ई-काॅटेंट विकसित करना एक कला है। सर्वप्रथम उसकी विषय वस्तु का चयन करने से लेकर छाया चित्रांकन तक अत्यन्त विवेक की आवश्यकता होती है। विषय वस्तु में क्रम बद्धता का होना नितांत आवश्यक है। विषय वस्तु के प्रस्तुतिकरण में लयबद्धता होनी चाहिये, जिससे वो बोझिल और दूरूह न बन जाये। प्रोफेसर राजपूत ने बताया कि यू जी सी की ई-पाठशाला वेब साइट पर बीस विषयों के लगभग सत्तर हजार काॅटेंट उपलोड हैं, जिन्हें फ्री में ऐक्सेस किया जा सकता है। उन्होने बताया कि ई-काॅटेंट रूचिकर बोधगम्य एवं सरल भाषा में होना चाहिये। काॅटेंट के अन्तिम हिस्से में सन्दर्भ ग्रंथों तथा वेबसाइट का भी विवरण होना चाहिये तथा अन्त में सारांश लिखा जाना चाहिए। ई-काॅटेंट अपलोड करते समय बौधिक सम्पदा कानून का भी ध्यान रखना होगा, जिससे किसी वैधानिक परेशानी से बचा जा सके। उन्होंने ये भी कहा की अन्त बीस प्रतिशत आसान तथा चालिस प्रतिशत मध्यम एवं इतने ही कठिन प्रश्नों का समावेश होना चाहिये।

विशिष्ट वक्ता के रूप में ई.एम.आर.सी., सागर, मध्यप्रदेश के निदेशक प्रोफेसर पंकज तिवारी ई-काॅटेंट के तकनीकी एवं वैधानिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होने कहा कि विडीओ पीपीटी आदि अपलोड करते समय अपनी आवाज़ तथा बाॅडी लैंगवेज का विशेष ध्यान रखना होता है। उन्होंने कहा कि आदर्श विडीओ तीस मिनट का होना पर्याप्त है। श्री तिवारी ने कहा कि आवाज़ सरस लयबद्ध तथा सपाट होनी चाहिये।

कार्यक्रम की संरक्षक के रूप में इग्नू, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ की क्षेत्रीय निदेशक डाॅ0 मनोरमा सिंह तथा काॅलेज की प्राचार्य प्रोफेसर अनुराधा तिवारी ने भी वेबिनार को सामयिक तथा सार्थक बताया संरक्षक द्वय ने कहा कि भविष्य में भी फैकल्टी तथा विद्यार्थियों के लिए ऐसे आयोजन होते रहेंगे। प्राचार्य प्रोफेसर अनुराधा तिवारी ने वक्ताओं का स्वागत किया तथा डाॅ0 मनोरमा सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया। इग्नू सहायक क्षेत्रीय निदेशक एवं वेबिनार केनवेनर डाॅ0 कीर्ति विक्रम ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस वेबिनार की खास बात ये रही कि इस वेबिनार में पूरे देश का प्रतिनिधित्व रहा तथा लगभग पाँच सौ पंजीकरण हुये जिसे देखते हुये ज़ूम ऐप के साथ-साथ यूटयूब पर भी लिंक किया गया तथा समन्वयक डाॅ0 जय प्रकाश वर्मा ने वेबिनार का कुशलतापूर्वक सफल संचालन किया तथा सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सहायक के रूप में श्री जुबेर तथा श्री सुनील ने प्रबन्धन किया।

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