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Saturday, October 16th, 2021

आल इण्डिया सुन्नी उलमा फेडरेशन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया कांग्रेस की लुटिया डुबाने पर लगे है अहमद पटेल - मौलाना अब्दुल कादिर

आई.एन.वी.सी,, लखनऊ,, जब से कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया   गांधी के सलाहकार अहमद पटेल बनाये गये है और मुस्लिम मामलों के फैसले अहमद पटेल पर छोड़ दिये गये है, तब से सुन्नी बरेलवी मुसलमान की उपेक्षा होती आ रही है जिसके चलते कांग्रेस की लुटिया किसी भी समय डूब सकती है । उक्त विचार आज यू.पी. प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आॅल इण्डिया सुन्नी उलमा फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री मौलाना गुलाम अब्दुल कादिर ने व्यक्त किये। उन्होने कहा कि पिछले दिनों दरगाह आला हजरत बरेली शरीफ से केन्द्र की मौजूदा कांग्रेस अगुवाई वाली यूपीए सरकार मुसलमानों की अनदेखी और सुन्नियों को मुनासिब नुमाइन्दगी न देने पर आॅल इण्डिया सुन्नी उलमा फैडरेशन के बैनर तले उलमाये अहले सुन्नत ने आवाज बुलंद की जिसको खानकाहे आला हजरत के सज्जादा नशीन हजरत अल्लामा सुबहानी मियां और खानखाए आला हजरत की हिमायत हासिल रही। उन्होने कहा कि पिछली केन्द्रीय सरकारों मंे पंडित नेहरू, इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी और नर्सिम्हा राव के काबीना में मुसलमानों खासकर सुन्नी बरेलवी मुसलमानों की खातिरख्वाह नुमाइन्दगी होती थी। मगर जब से मुस्लिम मामलों का फैसला अहमद पटेल लेने लगे हैं तब से उसका कोई फायदा मुसलमानों को नही मिल पा रहा है। जिसका सबूत ये है कि मजमूई तौर पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व घट कर केवल दो रह गया है। मौलाना गुलाम कादिर ने कहा कि अहमद पटेल खास कर सुन्नी बरेलवी मुसलमानों का इस्तेमाल कर रहे है और उनके हुकूक , मसायल और नुमाइन्दगी को दर किनार और नजर अंदाज करने में लगे हुए है जिसकी वजह से सुन्नी बरेलवी मुसलमानों की नुमाइन्दगी राज्य सभा, प्रशासन मंडल और दीगर सरकारी, नीम सरकारी मुहकमों, कमेटियों और कमीशनों में सिफर हो गयी है। मौलाना अहमद कादिर ने कहा कि हम कांग्रेस पार्टी को आगाह करना चाहते है कि अगर केन्द्र की यूपीए सरकार अहमद पटेल के इशारों पर चलकर मुसलमानों खास कर सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के हुकूक का इस्तेहसाल करती रही  तो आने वाले उत्तर प्रदेश के एसेम्बली इलेक्शन में हमारी संस्था कांगेेेे्रस के खिलाफ तहरीक चलायेगी। मौलाना ने कांगे्रस को छः सूत्री मांग को तत्काल पूरा करने की मांग की जिसमें छः और मुसलमानों को केन्द्रीय मंत्री - मंडल में शामिल किया जाना और प्रतिशत के ऐतबार से कम से कम तीन सुन्नी बरेलवी मुसलमानों को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में नुमाइन्दगी दिया जाना, राज्य सभा, केन्द्रीय कमीशन, कार्पोरेशन , हज कमेटी, दरगाह कमेटी, मौलाना आजाद एजुकेशनल फाउन्डेशन, सेन्ट्रल वक्फ कौन्सिल और दीगर सरकारी, नीम सरकारी मुहकमों के साथ साथ आने वाले यूपी के एसेम्बली इलेक्शन में सुन्नी बरेलवी मुसलमानों को तनासुब के ऐतबार से टिकट दिया जाना, जस्टिस सच्चर कमेटी, जस्टिस रंगनाथ मिश्रा कमीशन रिपोर्ट लागू कर के आईन की धारा 341 की तहत लगी पाबंदी हटाया जाना और दलित मुस्लिम और पसमांदा मुसलमानों को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण दिया जाना शामिल है। संवाददाता सम्मेलन में जामिया मदरसा अश्रफिया मुबारकपुर आजमगढ़ के मौलाना अब्दंुल हक, लखनऊ के मौलाना अशरफ कुरैशी, मौलाना सरफराज अहमद दिल्ली आदि मौलाना मौजूद थे।

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