मुद्दतों ख़ुद की कुछ ख़बर न लगे, कोई अच्छा भी इस क़दर न लगे. मैं जिसे दिल से प्यार करता हूं, चाहता हूं उसे ख़बर न लगे. वो मेरा दोस्त भी है दुश्मन भी, बद्दुआ दूं उसे, मगर न लगे. रास्ते में बहुत अंधेरा है, डर है मुझको के’ तुझको डर न लगे. बस तुझे उस नज़र से देखा है, जिस नज़र से तुझे नज़र न लगे. ________________________ Alok Srvastvaआलोक श्रीवास्तव, पत्रकार आजतक एवं कवी - लेखक निवास दिल्ली ,