Tuesday, February 18th, 2020

आरक्षण की तय सीमा बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार करें संविधान संशोधन : लौटन राम

लौटन रामआई एन वी सी न्यूज़
लखनऊ,
मण्डल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने के समय देश में पिछड़े वर्ग की आबादी 52 प्रतिशत, अनुसूचित जाति की आबादी-15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति की आबादी-7.5 प्रतिशत, धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी-10.5 प्रतिशत व सवर्ण जातियों की आबादी 15 प्रतिशत थी। अनुसूचित जाति व जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में 22.5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जब कि ओ0बी0सी0 को उनकी जनसंख्या के अनुपात में न देकर मात्र 27 प्रतिशत, जो उनकी जनसंख्या का लगभग आधार था। मण्डल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने के बाद 1999  में तमाम असवर्ण अगड़ी व दबंग जातियों जाट, कुर्बा, बोक्कालिगा, लिंगायत, कलवार, विश्नोई, मोढ़ घाची आदि को ओ0बी0सी0 में शामिल कर लिया गया और इस समय कम्मा, पाटीदार, मराठा, जाट, जट सिख, रोड़, त्यागी सहित कुछ अन्य जातियां भी ओ0बी0सी0 में शामिल करने की मांग कर आन्दोलन कर रही हैं। राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चै0 लौटन राम निषाद ने जाट आरक्षण आन्दोलन को असंवैधानिक , अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि आरक्षण की तय सीमा को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार को संविधान संशोधन करना चाहिए, तथा जाट जैसी जातियों को ओ0बी0सी0 के अतिरिक्त विशेष सूची बनाकर कोटा देना न्यायसंगत रहेगा। श्री निषाद ने जाट, कापू, पाटीदार जैसी प्रभु व दबंग जातियों के आरक्षण आन्दोलन के पीछे कांग्रेस जैसी पार्टियों का परोक्ष्य समर्थन व हाथ होने की शिकायत किया है। उन्होंने कहा कि लोक सभा चुनाव 2014 की अधिसूचना जारी होने के एक दिन पहले कांग्रेस सरकार द्वारा जाटों को केन्द्रीय पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी की गयी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने निरस्त कर दिया। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण व्यवस्था है। हरियाणा में एस0सी0 को 20 प्रतिशत, बी0सी0-ए0 को 16 प्रतिशत, बी0सी0-बी को 11 प्रतिशत, एस0बी0सी0 को 10 प्रतिशत, आर्थिक रूप  से बी0सी0-सी0 को 10 प्रतिशत यानी 67 प्रतिशत, महाराष्ट्र में एस0सी0 को 13 प्रतिशत, एस0टी0 को 7 प्रतिशत, ओ0बी0सी0 को 20 प्रतिशत, डी0एन0टी0 को 12 प्रतिशत यानी 52 प्रतिशत, तमिलनाडू में एस0सी0 को 18 प्रतिशत, एस0टी0 को 1 प्रतिशत, ओ0बी0सी0 को 30 प्रतिशत, एम0बी0सी0/डी0एन0टी0 को 20 प्रतिशत यानी 69 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में एस0सी0 को 12 प्रतिशत, एस0टी0 को 32 प्रतिशत, ओ0बी0सी0 को 14 प्रतिशत यानी 58 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। गुजरात में पाटीदार अनामत आन्दोलन, हरियाणा में जाट आन्दोलन व आन्ध्रप्रदेश-तेलंगाना में कम्मा आरक्षण आन्दोलन के पीछे कांग्रेस का ही हाथ है। श्री निषाद ने कहा कि आरक्षण की मांग कर रही जातियों 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा के ऊपर अलग से एस0बी0सी0 के नाम से आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए, न कि पिछड़े वर्ग में शामिल कर पिछड़ों का हक मरवाना चाहिए। उन्होंने एल0आर0 नायक की सिफारिश के अनुसार पिछड़ों, अतिपिछड़ों व विमुक्त घूमन्तु जनजातियों को अलग-अलग आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए अन्यथा आरक्षण की मूल भावना का अनादर होगा। उन्होंने केरल, आन्ध्रप्रदेश, पंजाब, की तरह एस0सी0 में भी वर्गीय विभाजन की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्सात्मक आन्दोलन से ही सरकार का ध्यानाकर्षण होता है तो 17 अतिपिछड़ी जातियों भी हिन्सात्मक आन्दोलन का रास्ता अपना लेंगी।

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