Sunday, April 5th, 2020

आरक्षण : यह बेहद संवेदनशील मामला

नई दिल्ली । कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने नियुक्तियों एवं पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर सोमवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा किया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह ‘संवेदनशील मामला’ है जिस पर सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत सरकार का पक्ष रखेंगे। सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी के अन्य सदस्य इस मुद्दे को उठाने को कोशिश की। कांग्रेस सदस्यों ने संविधान खतरे में होने की टिप्प्णी भी की। द्रमुक, माकपा और बसपा के सदस्यों ने भी अपने स्थान पर खड़े होकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखने का प्रयास किया।


लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल को आगे बढ़ाया, लेकिन विपक्षी सदस्यों का शोर-शराबा जारी रहा। इस पर बिरला ने कहा कि सदस्य इस विषय को शून्यकाल में उठाएं क्योंकि सदन ने ही प्रश्नकाल को सुचारू रूप से चलने देने की व्यवस्था तय की है। कांग्रेस के किसी सदस्य के ‘संविधान खतरे में होने’ की टिप्पणी पर बिरला ने कहा कि ‘संविधान खतरे नहीं हैं। आप संसद की गरिमा क्यों खतरे में डाल रहे हैं?’


इस दौरान सदन के उप नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश दिया है। यह संवेदशील मामला है। सामाजिक न्याय मंत्री इस पर वक्तव्य देंगे। इसके बाद बिरला ने कहा कि सदस्य शून्यकाल के दौरान इस विषय को उठाएं जिस पर सरकार जवाब देगी। फिर उन्होंने प्रश्नकाल को आगे बढ़ाया। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद भवन स्थित कार्यालय में सोमवार सुबह वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की। संसद सत्र के दौरान नियमित रूप से ऐसी बैठकें होती रहती हैं, लेकिन शीर्ष अदालत के फैसले की पृष्ठभूमि में यह बैठक महत्वपूर्ण है। आधिकारिक तौर पर इस बैठक को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पदोन्न्ति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। PLC.

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