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Friday, August 6th, 2021

आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिये अलग से विभाग : हरीश रावत

harish rawat ,harish rawat in invc newsआई एन वी सी न्यूज़ , देहरादून , मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेद को बढ़ावा देने में वैद्य वालेन्दु प्रकाश द्वारा किये जा रहे प्रयासों को पूरी मदद दी जायेगी। वैद्य वालेन्दु प्रकाश आयुर्वेद के द्वारा पीडितों की चिकित्सा के साथ ही किसानों को जड़ी-बूटी उत्पादन के लिये प्रोत्साहन देकर सैकड़ों लोगों को रोजी रोटी का रास्ता दिखा रहे है। वैद्य, वैज्ञानिक, योजनाकार व सामाजिक कार्यकर्ता बनकर वे लोगों की मदद कर अपने साथ जोड़ रहे है। रविवार को ओएनजीसी सभागार में वैद्य चन्द्रप्रकाश कैंसर रिसर्च फाउण्डेशन एवं उत्तराखण्ड काउंसिल फार सांइस एण्ड टेक्नोलाॅजी में संयुक्त तत्वधान में ‘पाथ आफ इनोवेशन’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि एलोपेथी जहां रूकती है वहां से आयुर्वेद शुरू होता है। इससे आयुर्वेद का महत्व समझा जा सकता है। कहा जाता है कि लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान जी जिस पर्वत से संजीवनी बूटी लाये थे, वह स्थान यही पर है। हिमालय जड़ी-बूटियों का घर है। प्रदेश सरकार जड़ी-बूटी उत्पादन के लिये प्रयास कर रही है, इसके लिये 10 बड़े कलस्टर विकसित किये गये है। जहां कृषक जड़ी-बूटी का उत्पादन करेंगे, उसकी मार्केटिंग सरकार द्वारा की जायेगी। आयुर्वेद की चिकित्सा के लिये जड़ी-बूटी की कमी भी इससे दूर हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिये अलग से आयुष विभाग बनाया गया है। आयुर्वेद विश्व विद्यालय बनाया गया है, आयुर्वेदिक कालेजों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आयुर्वेद की अपनी प्राकृतिक विशिष्टता भी है हिमालय की जैब विविधता भी इससे जुड़ी है, यह हमारी पहचान है। आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को नये ढ़ंग से देश व विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने में वैद्य वालेन्दु के प्रयास सराहनीय है, इसके लिये सरकार के स्तर पर जो भी मदद जरूरी होगी वह दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वैद्य वालेन्दु की जरूरत एसे लोगों का ज्यादा है, जिन्हें उन्होंने जिन्दगी का रास्ता दिखाया है। किसी को जिन्दगी देना बड़ी बात है यह सम्मान सबसे बड़ा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने क्रानिक पैंक्रियाटिक्स पुस्तक का भी विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सीएसई की महानिदेशक, पदमश्री सुनिता नारायण ने कहा कि 1935 में लिव 52 आयुर्वेद दवा का निर्माण हुआ था, उसके बाद आज तक इस प्रकार की दवा का निर्माण नहीं हो पाया है इसके लिये आयुर्वेंदिक को बढ़ावा देने की आवश्कता है, इसे आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए सजोने की जरूरत है। स्वास्थ्य की चुनौती का सामना करने में आयुर्वेद मददगार हो इस पर ध्यान देने की उन्होंने आवश्यकता बतायी। पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री सलीम शेरवानी ने कहा कि लोगों के दुःख दर्द को बांटने की हर किसी में कुव्वत नहीं होती है। समाज में डाक्टरों को भगवान मानते है। उन्होंने कहा आशा व्यक्त की कि जिन्दगी से निराश हो चुके लोगों के जीवन में उत्साह व जोश पैदा करने वाले वैद्य वालेन्दु अपनी चिकित्सा पद्धति के माध्यम से दुनिया में मुल्क का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में भारत की इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने के लिये व्यापक चर्चा की गई तथा वैद्य वालेन्दु द्वारा माईग्रेन, पेंक्रियाज व ब्लड कैंसर के उपचार में किये जा रहे सार्थक प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मनोरमा शर्मा डोबरियाल, केरला के पूर्व सांसद एमए बेबी, एम्स दिल्ली के प्रोफेसर वाईके गुप्ता, डा. सीके कटियार, डा. एसके शर्मा, यूकास्ट के महानिदेशक राजन्द्र डोभाल व वैद्य वालेन्दु प्रकाश आदि ने विचार व्यक्त किये।

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