Monday, April 6th, 2020

''आप'' के मुख्यमंत्री, जनता के आम आदमी की तरह आम फ्लैट मेँ ही रहेंगे किसी आलीशान फ्लैट मेँ नहीँ!!!!

arvind-kejriwal_295x200_41387278747आई एन वी सी,

दिल्ली,

आम होना आपके बस मेँ नहीँ है लेकिन्र दूसरी ओर आम बनना कोई हंसी खेल नहीँ है। अपनी आम आदमी की छवी को बनाये रखने के लिये कई कवायदेँ और त्याग करने पड़ते हैँ। ''आम आदमी पार्टी'' ने खुद को आम और मामूली दिखाकर ही दिल्ली मेँ चुनावी हड़कम्प मचाया था। अब अपनी इसी छवी को बनाये रखने के लिये दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भगवान दास रोड पर सरकारी आवास औऱ दफ्तर लेने से इंकार कर दिया है। तीन दिन पहले ही शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से उन्हें दो फ्लैट आवंटित किए गए थे। वहां मरम्मत का काम भी शुरू हो गया था। लेकिन इसी बीच विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर केजरीवाल को घेरना शुरू कर दिया। सवाल उठने लगे कि केजरीवाल ने बंगला लेने से इंकार करने के बावजूद ऐसा घर लिया, जिसमें बंगले से ज़्यादा जगह है। इसी विवाद पर विराम लगाते हुए अब केजरीवाल ने  अपने लिए किसी छोटे फ्लैट की मांग की है।

ग़ौर तलब है कि दिल्ली के नए मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मुख्यमंत्री आवास मेँ रहने से इंकार कर दिया था, इसी के बाद शहरी विकास मंत्रालय ने उन्हेँ अधिकारियों के लिए बने अगल-बगल के दो फ्लैट आवंटित किए थे। इनमें से एक में आवास और एक में उनका दफ्तर होना था। लेकिन केजरीवाल के इस फ्लैट मेँ आने से पहले ही विपक्ष ने इसे एक अहम मुद्दा बना दिया। और विधानसभा में इस बाबत् हंगामा भी किया। केजरीवाल की सादगी को ढोंग करार दिया गया। कहा गया कि बंगला न लेने की घोषणा महज दिखावा है क्योंकि अब वे दस कमरों के घर में रहेंगे। कोई बंगला भी इतना बड़ा नहीं होता। सोशल मीडिया में भी इस बात पर तीखी आलोचना का दौर चालू हो गया था। आखिरकार इस बवाल पर आज केजरीवाल पूर्ण विराम लगा ये सारा विवाद ही खत्म कर दिया। उन्होंने भगवान दास रोड पर उन्हेँ आवंटित् फ्लैट लेने से इंकार कर दिया है और अपने उपयोग के लिए छोटे फ्लैट की मांग की है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने इस फैसले के बारे मेँ कहा कि उन्हेँ इतने बड़े  बंगले के आवंटन के बाद में कई लोगों के फोन आए जिसमे सभी ने कहा कि ऐसा आलीशान बंगला न लें। इसलिए उन्होने इसे लेने से मना कर दिय़ा है।

बहरहाल, अब सवाल ये है कि दिल्ली के बाकी मंत्री कहां रहेंगे। आम आदमी पार्टी ने जिस तरह मंत्रियों के ऐशो आराम को मुद्दा बनाया था, उसके बाद उनके हर क़्दम पर सभी की पैनी निगाह है। ज़ाहिर है इस बात से नए नवेले मंत्रियों पर ख़ासा दबाव भी है। इसी मुद्दे पर शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि सरकारी कामकाज के लिेए सरकारी आवास लेना ज़रूरी है, जबकि परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज के मुताबिक वो सरकारी आवास नहीं लेंगे। ‘आप’ नेता मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज ने ये भी कहा कि बड़ा सरकारी आवास लेने से मुख्यमंत्री केजरीवाल के इंकार करने के बाद  हम सभी ने आम लोगों की राय ली कि आखिर वे इस मसले पर क्या सोचते हैं।

ख़ैर, कारण चाहे जो भी रहा हो भगवानदास रोड पर मुख्यमंत्री आवास और कार्यालय के लिए जो फ्लैट केजरीवाल को आवंटित हुआ था उस पर एनडीएमसी समेत तमाम दूसरे विभागों ने रिनोवेशन का काम शुरू कर दिया था, लेकिन अब केजरीवाल के अचानक इसे लेने से इंकार कर देने के बाद अब उनके लिेए किसी दूसरी जगह छोटा घर तलाशा जा रहा है।

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