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Wednesday, October 21st, 2020

आदिवासी समुदाय का विकास पहले जरूरी

Jual Oram adivasi ministerआई एन वी सी न्यूज़
दिल्ली, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ने आज कहा कि आदिवासी समुदाय भारत का आधार है और उन्हें सशक्त किए बगैर विकास के बुनियादी ढांचे सुदृढ़ नहीं हो सकते। उन्होंने यह बात आदिवासी अतिथियों और इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की झांकियों में हिस्सा लेने वाले आदिवासी कलाकारों और सहायक कर्मियों के सम्मान में नई दिल्ली में मंत्रालय द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह के दौरान कही। स्वागत समारोह में आदिवासी समुदाय से आने वाले सांसदों को भी आमंत्रित किया गया था। अतिथियों का स्वागत करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत सरकार देश की विकास प्रक्रिया में आदिवासियों को सहयोगी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रक्रिया में आदिवासी के हितों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। श्री जुएल उरांव ने कहा कि आदिवासियों को गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करने की परंपरा पहले गणतंत्र दिवस 1952 से ही चली आ रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी अतिथियों को आमंत्रित करने का उद्देश्य उन्हें राष्ट्रीय राजधानी का दर्शन और इस देश की विविध व समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू कराना है ताकि वे इन पर गर्व कर सकें। इस परंपरा में आदिवासी प्रतिनिधियों का राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से भेंट, दिल्ली दर्शन और संसद के संग्रहालय और पुस्तकालय का दौरा शामिल है। अपने मंत्रालय की गतिविधियों का ब्यौरा देते हुए श्री उरांव ने कहा कि जनजातीय विकास के लिए शिक्षा मुख्य विषय है, इसलिए केन्द्र सरकार बालिका शिक्षा के लिए विशेष कार्यक्रम चला रही है। ये कार्यक्रम विशेषकर उन क्षेत्रों में चलाए जा रहे हैं जहां बालिका शिक्षा दर औसत से कम है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल में ही आदिवासी समुदाय के समेकित विकास के लिए शुरू किया गया एक कार्यक्रम "वनबंधु कल्याण योजना" मील का पत्थर साबित होगा। श्री उरांव ने कहा कि केन्द्र सरकार सांस्कृति विरासत के संरक्षण के साथ जनजातीय विकास के लिए पूरी तरह गंभीर है। फिर भी इस सिलसिले में राज्य सरकारों की भूमिका और सहयोग समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस मौके पर जनजातीय राज्य मंत्री श्री मनसुखभाई धानजीभाई वसावा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड के लिए 25 राज्यों व केन्द्र शासित क्षेत्रों से 60 आदिवासी अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। गणतंत्र दिवस समारोह ने उन सभी को देश की अन्य सांस्कृतिक परंपराओं को ज्यादा जानने का एक बेहतरीन मौका प्रदान किया। जनजातीय प्रतिनिधियों ने भी श्री उरांव और उनके मंत्रालय के प्रयासों व दृष्टिकोण की सराहना की।

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