Close X
Sunday, January 16th, 2022

आदिवासी समाज में अथाह ज्ञान का भंडार

आई एन वी सी न्यूज़
रायपुर,
आदिवासी तभी सशक्त होंगे जब उनकी वास्तविक आवश्यकताओं पर ध्यान देकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। संविधान में आदिवासियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं परन्तु उन्हें उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करना होगा। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा ‘‘ट्राइबल ट्रांजिशन इन इंडिया: इशूस, चैलेंजेस एंड द रीड अहेड’’ विषय पर वर्चुअल रूप से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति को इस वेबीनार के लिए शुभकामनाएं दी और भविष्य में ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने को कहा।
राज्यपाल ने कहा कि आमतौर पर यह कहा जाता है कि भारत की आत्मा ग्रामीण इलाकों में बसती है। ठीक इसी प्रकार छत्तीसगढ़ प्रदेश की आत्मा भी जनजातियों में ही बसती है और जिस प्रकार जीव के उत्थान के लिए आत्मा का उत्थान आवश्यक है उसी प्रकार आदिवासी जन समुदायों के उत्थान से ही हमारे प्रदेश सहित भारत की उन्नति संभव है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गुंडाधुर, शहीद गैंदसिंह जैसे कई नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भी कई ऐसी जनजातीय हस्तियाँ हैं, जो इतिहास के पन्नों में गुम हैं। हमें इनका नाम सामने लाने के प्रयास करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि हमें इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए कि उन्नति का अर्थ जनजातियों के रुख को आधुनिकता और भौतिकतावाद की तरफ मोड़ देना नहीं होता, बल्कि उन्नति का असली अर्थ, उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर, संभालकर और उसे आगे बढ़ाकर जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना होता है।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे आदिवासी जनजातियों में जागरूकता के अभाव में कुछ अराजक तत्व उन्हें दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। आदिवासी समाज को उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। उनके दुष्प्रयत्नों का प्रत्युत्तर केवल एक जागरूक और शिक्षित आदिवासी समाज ही दे सकता है। अतः आदिवासी समाज में अधिक से अधिक शिक्षा का प्रसार करना होगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में अथाह ज्ञान का भंडार है। इस ज्ञान का आधुनिक विज्ञान से मेल कराकर उत्कृष्ट सक्षम मानव संसाधन का निर्माण कर सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि जनजातियों की कला को प्रोत्साहन दें और उसे विश्व पटल पर उभारने का प्रयास करें। साथ ही उनके ज्ञान से हम भी कुछ ग्रहण करें और सब मिलकर जनजातियों की उन्नति के लिए प्रयास करें।
इस अवसर पर हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर व्ही.सी. विवेकानंदन, बस्तर जिले के कलेक्टर श्री रजत बंसल एवं रजिस्ट्रार प्रोफेसर उदय शंकर वर्चुअल उपस्थित थे।

Comments

CAPTCHA code

Users Comment