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Monday, September 28th, 2020

आज आयुर्वेद सबसे सुरक्षित चिकित्सा पद्धति

आई एन वी सी न्यूज़
जयपुर,
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा है कि आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति जितनी प्राचीन है मानव स्वास्थ्य के लिए उतनी ही कारगर है। प्राचीनकाल से ही आयुर्वेद का विशेष महत्व है, वेदों में आयुर्वेद को अमृत बताया है। आवश्यकता है इसे जीवित रखने के साथ ही उचित संरक्षण व संवद्र्धन की, जिसे की राज्य सरकार इस तरह के मेले के माध्यम से कर रही है।  

डॉ. शर्मा शनिवार को उदयपुर के फतह स्कूल प्रांगण में राज्य स्तरीय आरोग्य मेले के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।  

उन्होंने कहा कि वर्तमान में मौसमी बीमारियों के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण, अशुद्ध खानपान, नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी के होने, आदि कारणों से अनेक रोग पनप रहे है और इन रोगों की रोकथाम व उपचार के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति लाभदायक है। उन्होंने कहा कि आज आयुर्वेद सबसे सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार सदैव प्रयासरत है और आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ व प्रभावी बनाने के लिए निरंतर नये-नये नवाचार किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ यहां आने वाले पर्यटकों को भी मिले इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार देश-दुनिया में होगा।

उन्होंने इस चार दिवसीय राज्य स्तरीय आरोग्य मेले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जरूरतमंद को एक ही छत के नीचे विभिन्न रोगों का उपचार व परामर्श देने का यह अनूठा प्रयास है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के कोई दुष्प्रभाव नहीं है और आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं से किया गया उपचार बीमारी को जड़ से समाप्त करने में कारगर है। आरोग्य मेले का निरंतर आयोजन होने से लोगों में आयुर्वेद के प्रति रूझान बढ़ने लगा है।

चिकित्सा मंत्री ने  कहा कि मेडिशनल प्लांटेशन बोर्ड को जीवित किया गया है और 19 स्थान नैचुरोपैथी सेंटर के लिए चिह्ति किए हैं जिसे योग, नैचुरोपैथी, ऑर्गेनिक खेती, मेडिशनल प्लांट, प्राकृतिक चिकित्सा के केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा,आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

डॉ. शर्मा ने कहा कि पिछले 70 सालों में आयुर्वेद का आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि सोच से जोधपुर में 700 एकड क्षेत्र में आयुर्वेद विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है, जहां रसायनशाला भी है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर प्रदेश में 500 हैल्थ वेलनेस सेंटर खोले जा रहे है। इन स्वास्थ्य केन्द्रों में विभिन्न अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेगी।

प्रदेश भर में नशा मुक्ति के प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। नशामुक्ति के विरुद्व जोधपुर में अभियान चलाया गया जिसके अंतर्गत 1 दिन में 1 करोड़ 14 लाख लोगों ने नशा मुक्ति की शपथ ली। इसके साथ ही जर्दा-गुटखा पर प्रतिबंध लगाने को लेकर भी सरकार गंभीर है। राजस्थान पहला प्रदेश है जहां स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ माह पहले प्रदेश में मौसमी बीमारियों व स्वाइन फ्लू का प्रकोप फैला था, आयुर्वेद ने इसके निवारण के लिए काढ़ा बनाया, यह काढ़ा पश्चिमी राजस्थान के पाकिस्तान सीमा पर स्थित गडरारोड तक प्रदेशवासियों को पिलाया गया। इसके लिए उन्होंने आयुर्वेद विभाग की सराहना करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया।

इस अवसर पर आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्साधिकारियों, विशेषज्ञों एवं भामाशाहों को मंत्री डॉ. शर्मा ने सम्मानित किया। इनमें भामाशाह पाली के डॉ. अचल चन्द संघवी व बीकानेर निवासी ओमप्रकाश गट्टानी के साथ आयुर्वेद विभाग के सहायक निदेशक डॉ. बाबूलाल कुमावत, उपनिदेशक डॉ. रमाशंकर पचौरी, चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश चन्द्र शुक्ला, डॉ. विनोद कुमार शर्मा व डॉ. नरेन्द्र कुमार, कम्पाउण्डर हेमन्त कुमार शर्मा व अनिल सिसोदिया, सहायक प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती उषा आसवानी, वरिष्ठ सहायक रामकिशोर शर्मा, परिचारक शेर सिंह रावत व शांति बंजारा को सम्मानित किया गया।

शुभारंभ उपरांत डॉ. शर्मा ने विभिन्न स्टॉलों पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी ली। यहां उन्होंने स्वास्थ्य लाभ ले रहे रोगियों से भी संवाद किया। इस मौके पर केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद्, केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद् केन्द्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद् केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद व राष्ट्रीय औषध पादप मंडल द्वारा आयुष क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधानों एवं विकास की गतिविधियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसी प्रकार वहीं राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर, आयुर्वेद निदेशालय, होम्योपैथी निदेशालय, यूनानी निदेशालय के द्वारा राज्य में संचालित जिला चिकित्सालयों, चिकित्सालयों एवं औषधालयों, राज्य औषध पादप मंडल, जड़ी-बूटियों की कृषि, हर्बल गार्डन विकसितीकरण व उनसे सम्बन्धित सरकारी सुविधाओं एवं सब्सिडी आदि से संबंधित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मेले के दौरान स्वर्णप्राशन संस्कार के तहत दिए जा रहे स्वास्थ्य लाभ का भी जायजा लिया।

डॉ. शर्मा ने मेले में प्रसिद्ध निर्माता कम्पनियों द्वारा आयुश व आरोग्य से सम्बन्धित पुस्तक विक्रेताओं, साहित्य प्रकाशकों, आयुष औशध निर्माताओं, प्रेक्टिशनर्स, अनुसंधान संस्थानों, हॉस्पीटल व सर्जिकल उपकरण निर्माताओं, योग व प्राकृतिक चिकित्सा उपकरण निर्माताओं, पंचकर्म उपकरण निर्माताओं, आयुष ट्युरिज्म, औषधीय कृषकों, फार्मास्युटिकल मेकेनिज्म व तकनीकी प्रदाताओं, फूड सप्लीमेंट निर्माताओं के लिये भी अपनी सेवाओं व उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन एवं मेले का परिचय आयुर्वेद निदेशक सीमा शर्मा ने दिया। विभाग की सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग में कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इस तथ्य को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम यह आरोग्य मेला बनेगा। समारोह में पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया ने भी आयुर्वेद के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।

इस अवसर पर पूर्व विधायक सज्जन कटारा, त्रिलोक पूर्बिया, नीलिमा सुखाडिया, समाजसेवी विवेक कटारा,यूनानी निदेशक मोहम्मद उस्मान, होम्योपैथी निदेशक रेण बंसल, आयुर्वेद विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. बाबूलाल जैन, उपनिदेशक डॉ. पुष्करलाल चौबीसा, डॉ. महमूद अरूण, डॉ. अशोक मित्तल आदि मौजूद रहे।  
                 
समारोह में समाजसेवी पंकज शर्मा, आरएनटी कॉलेज प्राचार्य डॉ.डीपी सिंह, सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी, डॉ. शोभालाल औदिच्य, कार्यक्रम का संचालन मनोहर पारिक के किया जबकि आभार मेले के नोडल अधिकारी व अतिरिक्त निदेशक डॉ. आनन्द कुमार शर्मा ने जताया।



 

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