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दिल्ली,

पिछले कुछ दिनोँ  दिसंबर 2012 में एक कानून इंटर्न से यौन दुर्व्यवहार के मामले मेँ चर्चा मेँ रहे कथित आरोपी सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश ए के गांगुली को आखिरकार पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना ही पड़ा। जस्टिस गांगुली ने इस मामले में सरकार को कार्रवाई करने से रोकने के लिए दायर की गई एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाने के बाद अपना पद छोड़ा। उन्होंने राज्यपाल से मिलकर कुछ देर पहले अपना इस्तीफा उन्हेँ सौँप दिया है।

ध्यान रहे कि गांगुली के समर्थन में डॉ.पद्म नारायण सिंह की याचिका खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम ने कहा कि ,” हमने आपकी याचिका के हर शब्द को पढ़ा है। हम इस बारे में कुछ कहने नहीं जा रहे हैं। इस बारे में हम कोई राय नहीं प्रकट करना चाहते हैं, क्योंकि इससे संबंधित पक्ष प्रभावित हो सकते हैं। इस बारे मेँ कुछ भी कहना अभी जल्दबाज़ी होगी। प्रधान न्यायाधीश सतशिवम ने कहा कि इस स्थिति में हस्तक्षेप करने का यह मामला नहीं है। हम इसे खारिज करते हैं।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने वकील उदय गुप्ता द्वारा दायर एक अन्य याचिका को भी खारिज कर दिया। गुप्ता ने अदालत से अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों के आचरण के लिए नियम बनाने का आग्रह किया था। न्यायालय ने कहा कि यदि आप वास्तव में ऐसा चाहते हैं तो आपको अपना आवेदन सरकार के पास देना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि वह दोनों याचिकाओं को खारिज करते हैं। कानून को अपना कार्य करने दीजिए।

ग़ौर तलब है कि कानून की एक इंटर्न द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एके गांगुली ने आखिरकार पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार को कोलकाता में राज भवन में राज्यपाल एमके नारायण को अपना इस्तीफा सौंपा।इससे पहले पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा था कि न्यायमूर्ति गांगुली ने उन्हें टेलीफोन किया और कहा कि वह पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (डब्ल्यूबीएचआरसी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की सोच रहे हैं।

न्यायमूर्ति गांगुली की सोराबजी के साथ वार्ता ऐसे समय में हुई है, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस मुद्दे पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए राष्ट्रपति की राय (केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रपति द्वारा राय के लिए उच्चतम न्यायालय को भेजा जाने वाला मामला) भेजने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गयी। इसे डब्ल्यूबीएचआरसी अध्यक्ष को हटाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

इस बात से हम सभी वाक़ीफ़ हैँ कि उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति ने प्रथमदष्टया न्यायमूर्ति गांगुली को आरोपी माना था। लेकिन न्यायमूर्ति गांगुली ने कानून की इंटर्न की ओर से लगाए गए सभी आरोपों से इंकार किया था और कहा था कि उनके द्वारा दिए गए कुछ फैसलों के कारण उनकी छवि धूमिल करने के लिए कुछ ताकतें कोशिश कर रही हैं।

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