Sunday, February 23rd, 2020

आई.टी.आई. को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जायेगा : चौहान

shivraj singh chauhanआई एन वी सी,, भोपाल,, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि युवाओं को कौशल देकर उन्हें रोजगार से जोड़कर मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को वाइब्रेंट बनाया जायेगा। प्रदेश में आई.टी.आई. को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जायेगा। रोजगार कार्यालयों को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां लाल परेड ग्राउंड में आयोजित स्किल समिट में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री वैंकैया नायडू विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आगामी मई अंत तक प्रदेश की हर गांव में 24 घंटे बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश के गांव-गांव में लघु उद्योग शुरू होगा। आज हर बड़ा उद्योग समूह प्रदेश में आ रहा है। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। इन उद्योगों में 50 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। राज्य सरकार ने तय किया है कि 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाले नये उद्योगों को विशेष पैकेज दिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह स्किल समिट मध्यप्रदेश के विकास का महायज्ञ है। हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश में देश का अग्रणी राज्य बनायेंगे। पिछले 9 सालों में सिंचाई क्षमता 7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 21 लाख हेक्टेयर की गई है। इस साल इसे बढ़ाकर 25 लाख हेक्टेयर किया जायेगा। आज मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन करने वाले राज्य है। नर्मदा का जल अब क्षिप्रा, कालीसिंध, गंभीर और पार्वती नदी में डालकर नदी जोड़ो परियोजना को मूर्त रूप दिया जायेगा। इससे करीब 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट मिशन युवाओं को रोजगार और उद्योगों के लिये प्रशिक्षित करने का अभियान है। हमारे युवाओं को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जायेगा कि वे दुनिया के किसी भी कोने में जाकर रोजगार कर सकें। युवा खुद अपना उद्योग शुरू करें इसके लिये मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना बनाई गई है। इसमें 25 लाख रूपये तक के ऋण की गारंटी तथा 5 वर्ष तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान राज्य सरकार देगी। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे प्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में योगदान देने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम में घोषणा की कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में तकनीकी प्रशिक्षण के लिये आई.टी.आई. या कौशल विकास केन्द्र होगा। अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल विकासखंडों में 47 कौशल विकास केन्द्र, विशेष पिछड़ी जातियों के लिये विशेष कौशल विकास केन्द्र खोले जायेंगे। कृषि विभाग अलग से 5 कौशल विकास केन्द्र शुरू करेगा। कृषि के क्षेत्र में युवाओं को 20 विधाओं में प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रदेश सरकार के 25 विभाग कौशल विकास मिशन चलायेंगे। लघु और मध्यम उद्योगों में गुणवत्तापूर्ण संसाधन और उपकरणों के लिये भोपाल, जबलपुर और सतना में टूल रूम स्थापित किये जायेंगे। आई.टी.आई. और पॉलीटेक्निक से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिये 4 फिनिशिंग स्कूल शुरू किये जायेंगे। रोजगार कार्यालयों को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। ये केरियर मार्गदर्शन और प्लसमेंट का काम करेंगे तथा रोजगार मेले आयोजित करेंगे। बैतूल और धार की तरह अन्य जेलों में महिला बंदियों के लिये कौशल विकास केन्द्र खोले जायेंगे। एक सौ दस महाविद्यालयों और एक सौ पचास स्कूलों में कक्षा के बाद वोकेशनल ट्रेनिंग दी जायेगी। आई.टी.आई. को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जायेगा। हर आई.टी.आई. में प्लेसमेंट सेल और कम्प्यूटर लेब होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति में वृद्धि की जायेगी। शिष्यवृत्ति-छात्रवृत्ति वितरण को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लाया जायेगा। गांवों में रहने वाले कारीगरों के लिये कौशल दक्षता प्रमाणीकरण की प्रणाली विकसित की जायेगी। ग्लोबल स्किल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिये मध्यप्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। आई.टी.आई और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, लेंग्वेज लैब और वाई.फाई की सुविधा होगी। कौशल विकास प्रशिक्षण का ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जायेगा। करीब 50 करोड़ रूपये की लागत से मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जायेगा। पॉलीटेक्निक कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप बदलाव किये जायेंगे।

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